
नई दिल्ली: कोरोना के इस संकट काल में डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों के लिए ‘मैं और वो’ के द्वारा नोएडा के सेक्टर -16 में ऑनलाइन काव्य सम्मेलन का आयोजन किया गया. जिसमें युवा कवयित्री याक्षी यश ने खूब धमाल मचाया. दिल्ली एनसीआर सहित पूरे देश के नवोदित कवियों को एक नया मंच देने वाला काव्य मंच मैं और वो कोरोना काल में भी लोगों का मनोरंजन कर रहा है. मैं और वो के दर्शकों के प्यार की वजह से आज यह एक जाना माना काव्य मंच बन गया है.
कोरोना काल में लोगों को डिप्रेशन से बचाने के लिए एक बार फिर मैं और वो के मंच से लोगों का मनोरंजन करने के लिए काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. जिसमें युवा कवयित्री याक्षी यश ने धमाल मचा दिया. उनके युवा जोश ने सभी दर्शकों को खूब रोमांचित किया. उनकी स्वलिखित कविताएं और उनके बोलने का अंदाज लोगों को खूब पसंद आया.
वायरल हो रहीं कविताएं
आइए मिलते हैं युवा कवि याक्षी यश से जिनकी कविताएं एवं नज्म मैं और वो कार्यक्रम के बाद तेजी से वायरल हो रही हैं.
काबिलत पर विश्वास रखने वालो की कभी हार नहीं होती अगर हौसले बुलंद हों तो कामयाब होने से आपको कोई नहीं रोक सकता फिर चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइया क्यों ना हों. ये हम सब जानते हैं कि बिना मेहनत के कभी भी मंजिल नहीं मिलती हमें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
कौन हैं याक्षी यश?
याक्षी यश ने रुड़की का ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरांचल का नाम रोशन किया है इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करना कोई आसान काम नहीं है जो रुड़की की होनहार ने कर दिखाया.
याक्षी यश के करियर की शुरुआत स्कूल प्रोग्राम से हुई जहां उन्होंने अपने दिल में छिपे हुआ डर को बाहर निकाला और स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अपनी कविता सुनाई जिसके बाद सबको उनकी कविता बहुत पसंद आई. उससे याक्षी यश को काफी मोटीवेशन भी मिला जिसके बाद उन्होंने सोच लिया की बस अब तो यही मेरी मंजिल है और हर दिन नई-नई कविताएं नज्म लिखना शुरू कर दिया जिसके बाद कॉलेज की मैंगजीन में याक्षी की लिखी कविताएं व नज्म छपने लगीं.
राहत फतेह इंदौरी साहब तो इस दुनिया को अलविदा कह गए लेकिन भारत के युवाओं में एक जुनून और जज्बा छोड़ गए जिनमें एक नाम याक्षी यश का भी शामिल है. याक्षी कहती हैं कि अगर वो आज इस मकाम पर हैं तो एक वजह ये भी है कि वो हमेशा इंदौरी साहब को फॉलो करती रही हैं.
याक्षी यश रुड़की निवासी का कहना है कि वह ग्यारह वर्ष की आयु में छोटी-छोटी कविताएं लिखा करती थीं. इसके बाद वे हॉस्टल में पढ़ने चली गईं. वो वहां अकेली बैठी रहती थीं. अपने अंदर की भावनाओं को लिखना शुरू कर दिया. अपनी लिखी नज्म व कविताओं को अपने दोस्तों एव गुरुजनों को पढ़कर सुनाया. सबको याक्षी की लिखी हुई कविताएं व नज्म बहुत पसन्द आईं.
छोटी सी उम्र में लिख दीं दो किताबें
याक्षी ने बताया कि बारहवीं कक्षा में ही उन्होंने नज्म की दो किताबें लिख डालीं. आरजू तेरी है प्रथम 2. आरजू तेरी है द्वितीय. तीसरी किताब लिखना शुरू कर दिया है, आप भी याक्षी यश की कविता अनेक ऑनलाइन प्लेट फार्म पर सुन सकते हैं Spotfy, Apple Music, Gana Music आदि पर भी.
याक्षी यश कहती है कि में उन लोगों की शुक्र गुजर हूं जिन्होंने मुझे इस योग्य समझा. मैं अपने माता-पिता भाई व अपने समस्त दोस्तों व गुरुजनो का भी आभार प्रकट करती हूं. जिनकी प्रेरण से मैं यहां तक पहुंची हूं. मैं अपने समस्त श्रोताओं का तहेदिल से धन्यवाद करती हूं. जिन्होंने अपना कीमती समय देकर मेरी नज्म व कविताओं को सुना और मुझे यहां तक पहुंचाया. यह पुरस्कार मैं अपने श्रोताओं को समर्पण करती हूं और में उत्तर प्रदेश, हरियाणा एवं उत्तराखण्ड सरकार व राष्ट्रीय कविता चयन समिति के समस्त जजों का भी शुक्रिया अदा करती हूं.
