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कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां पर मंदिर की छत से चिलचिलाती धूप में अचानक पानी की बूंदे टपकने लगती हैं. बारिश की शुरुआत होते ही इन बूंदों का टपकना बंद हो जाता है. यह मंदिर यूपी की औद्योगिक नगरी कहे जाने वाले कानपुर जिले के भीतरगांव इलाके से ठीक तीन किलोमीटर की दूरी पर बेहटा गांव में स्थित है. इस प्राचीन मंदिर में भगवान जगन्नाथ की पूजा होती है. 

आज भी है एक राज 
बताते हैं कई बार वैज्ञानिक और पुरातत्‍व विशेषज्ञों ने मंदिर से गिरने वाली बूंदों की पड़ताल की. लेकिन, सदियां बीत गई हैं इस रहस्‍य को, आज तक किसी को नहीं पता चल सका कि आखिर मंदिर की छत से टपकने वाली बूंदों का राज क्‍या है.

मंदिर में टपकती बूंदों के हिसाब से होती है बारिश
कहा जाता है कि इस मंदिर का इतिहास 5 हजार साल पुराना है. इस मंदिर में भगवान जगन्‍नाथ, बलदाऊ और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं. इनके अलावा मंदिर में पद्मनाभम की भी मूर्ति स्‍थापित है. स्‍थानीय निवासियों के अनुसार सालों से वह मंदिर की छत से टपकने वाली बूंदों से ही मानसून के आने का पता करते हैं. कहते हैं कि इस मंदिर की छत से टपकने वाली बूंदों के हिसाब से ही बारिश भी होती है.

इस बार होगी कम बारिश
इस मंदिर के गुंबद से जब बूंदे कम गिरीं तो यह माना जाता है बारिश भी कम होगी. इसके उलट अगर ज्‍यादा तेज और देर तक बूंदे गिरीं तो यह माना जाता है कि बारिश भी खूब होगी. मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस बार बारिश कम होगी. क्योंकि दो दिन से छोटी बूंदे टपक रही हैं. 

पुरी जगन्नाथ मंदिर की तरह निकलती है रथ यात्रा 
जगन्नाथ मंदिर पुरातत्व के अधीन है. जैसी रथ यात्रा पुरी उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर में निकलती है वैसे ही रथ यात्रा यहां से भी निकाली जाती है. पुरातत्व विभाग कानपुर के एक अघिकारी के मुताबिक मंदिर का जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी के आसपास हुआ था. मंदिर 9वीं सदी का हो सकता है. 

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