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Jaipur: राजस्थान (Rajasthan) में कोरोना (Corona) के मामलों में कमी आने के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों (Political appointments) को लेकर चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं. 

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राजस्थान सरकार (Government of Rajasthan) को ढाई साल से अधिक का वक्त बीत चुका है लेकिन कुछ अहम नियुक्तियों के अलावा बड़ी संख्या में अभी भी राजनीतिक नियुक्तियां पेंडिंग है. इतना ही नहीं, कांग्रेस (Congress) के सियासी घमासान के बाद से हटाए गए पायलट कैंप के मंत्रियों को भी अपनी वापसी का इंतजार है. इन सब के बीच एक नई चर्चा सचिन पायलट (Sachin Pilot) को गुजरात का प्रभारी बनाने को लेकर चल पड़ी है. 

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दरअसल, राज्यसभा सांसद और गुजरात के प्रभारी राजीव सातव के निधन के बाद दिल्ली के कांग्रेस के सियासी गलियारों में कांग्रेस के युवा नेता को गुजरात (Gujarat) का प्रभारी बनाए जाने की चर्चा है. सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि आलाकमान सचिन पायलट को यह जिम्मेदारी दे सकता है हालांकि अभी सचिन पायलट की ओर से और से इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. माना जा रहा है कि सचिन पायलट को देश में किसी भी राज्य में कांग्रेस के लिए काम करने में गुरेज नहीं होगा लेकिन प्रदेश में मंत्रिमंडल और राजनीतिक नियुक्तियों में अपनी टीम को एडजस्ट किए बिना किसी भी स्टेट की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होंगे.

निश्चित तौर पर सचिन पायलट लगातार इस दिशा में कोशिश कर रहे हैं कि सियासी घमासान के बाद हुई सुलह में प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) और अहमद पटेल के साथ किए गए वादों को अब राजस्थान में लागू किया जाए. जिसमें पायलट कैंप के दो मंत्रियों को बहाल करने सहित अन्य विधायकों को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने और पार्टी में सक्रिय तौर पर काम करने वाले समर्थकों को निगमों बोर्डों सहित विभिन्न राजनीतिक नियुक्तियों में भी अवसर दिलाना शामिल है. यह बात सचिन पायलट भी बखूबी समझते हैं कि उन्होंने जो वादा किया उसके बाद कभी चुनाव के नाम पर तो कभी कोरोना के नाम पर लगातार देरी हो रही है. 

पहले भी कई बार दी जा चुकी हैं तारीखें
पूर्व प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे के बाद नई जिम्मेदारी संभालने वाले अजय माकन ने भी कई बार मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों की तारीख दी लेकिन कुछ एक नियुक्तियों को छोड़ दिया जाए तो स्थिति आज भी वही है. यही वजह है कि हेमाराम चौधरी जैसे उनके समर्थक विधायक पिछले दिनों इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं. पायलट कैंप के एक और विधायक वेद प्रकाश सोलंकी (Ved prakash Solanki) भी लगातार मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों की मांग कर रहे हैं. 

क्या कहना है सचिन पायलट का
सचिन पायलट से भी जब जब मीडिया ने इस संबंध में सवाल पूछा है. उन्होंने कहा है कि पार्टी के लिए मेहनत करने वाले और खून पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं को उसका हक मिलना चाहिए लेकिन पायलट खेमा अब यह सवाल पूछने लगा है कि उन्हें इस का हक कब मिलेगा. इन सबके बीच पायलट को गुजरात प्रभारी बनाए जाने की चर्चाओं से लगता है कि प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है.