
Patna: किसी भी स्टेट में प्रभारी के बाद सबसे बड़ी हैसियत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की होती है. प्रदेश अध्यक्ष का फरमान आलाकमान का फरमान माना जाता है, लेकिन बिहार कांग्रेस में इन दिनों कुछ उल्टा चल रहा है. प्रदेश अध्यक्ष की बातों को नेता अनसुना कर रहे हैं. यहां तक की अध्यक्ष की ओर से जारी की गई चिट्ठी पर भी पार्टी के नेता अमल करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं.
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा ने 28 अप्रैल को पार्टी के सभी एआईसीसी मेंबरों और कार्यकर्ताओं को एक पत्र लिखा था. जिसमें अपील की गई थी कि कोराना काल में जरूरतमंदों की मदद करना ही सबसे बड़ा सामाजिक और राजनैतिक धर्म है.
इस दौरान एआईसीसी ने ये निर्देश जारी किया था कि एआईसीसी के सभी कोटी के नेतागण और कार्यकर्तागण यथासंभव जरूरतमंदों की सहायता करें. इसी परिपेक्ष में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आपसे यह आग्रह किया है कि आप यथाशक्ति ज्यादा से ज्यादा आर्थिक सहायता पार्टी के अकाउंट नंबर पर करें.
चिट्ठी में पार्टी की ओर से एसबीआई के कुर्जी ब्रांच का अकाउंट नंबर भी जारी किया गया था. साथ ही ये भी अपील की गयी थी कि सहयोग राशि भेजने की जानकारी बिहार प्रभारी भक्त चरण दास और अध्यक्ष मदन मोहन झा को अवश्य दें.
इसके बाद भी इस पत्र का संज्ञान पार्टी के नेताओं ने नहीं लिया. हालांकि, अध्यक्ष मदन मोहन झा इसे बुरा नहीं मानते हैं. उनका कहना है कि हमारा मकसद सभी की ज्यादा से ज्यादा मदद करना है. पार्टी के कई सीधे तौर पर लोगों की मदद कर रहें हैं. ऐसे में आर्थिक मदद देना जरूरी नहीं हैं.
जानकारी के अनुसार केवल 8 नेताओं ने ही पार्टी के सहायता कोष में राशि जमा की है, जबकि एआईसीसी के 100 से ज्यादा डेलीगेट्स बिहार में हैं. इसके अलावा 19 एमएलए, तीन एमएलसी और दो सांसद भी पार्टी के हैं. जिसमे ज्यादातर ने राशि देने में कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाई है.
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कांग्रेस के हाल पर बीजेपी ने चुटकी ली है. बीजेपी नेता और राज्य सरकार में मंत्री नितिन नवीन ने कहा है कि कांग्रेस के नेता सेवा भाव जानते ही नहीं है, उन्हें सिर्फ अपना फायदा दिखाई देता है.
