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Patna: जीतन राम मांझी ने भले ही एनडीए में रहने की घोषणा कर दी हो लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि वे सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करते रहेंगे. इसी क्रम में उन्होंने सरकार के सामने एक नई डिमांड रख दी है. दरअसल, मांझी ने सरकार से कोरोना की दूसरे लहर में 1 करोड़ बेरोजगार हुए लोगों को 5-5 हजार रुपए महीना देने की मांग की है. जिसके बाद सरकार के प्रतिनिधि ने मांझी की डिमांड के आगे सरेंडर कर दिया है.

हालांकि, विपक्ष का दावा है कि मांझी विपक्ष की ही मांगों को उठा रहे हैं. ऐसे में अगर उनकी मांगें नहीं मानी जाती है तो वो कोई निर्णायक फैसला लें.

बता दें कि जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की नई डिमांड सरकार के लिए मुसीबत बन सकती है. बीते दिनों हम पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की हुई बैठक में मांझी ने बेरोजगार लोगों के लिए बडी डिमांड सरकार से कर दी. मांझी की मानें तो कोरोना (Corona) की दूसरी लहर में एक करोड लोग बेरोजगार हो गए हैं. ऐसे मे सरकार को बेरोजगार लोगों को 5-5 हजार रुपए देने का प्रावधान करना चाहिए.

मांझी की डिमांड सुनने में वाजिब भले ही लगे लेकिन फाइनेंशियल कैलकुलेशन में डिमांड को पूरा करने में सरकार के पसीने छूट जाएंगे. यही वजह है कि सरकार के नुमाईंदे मांझी की मांग पर सरेंडर करते नजर आए.

बिहार सरकार के मंत्री अमरेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा है कि ‘मांझी अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. सरकार के समाने डिमांड रखना उनका हक है. सरकार कई बार मांगों को पूरा भी करती है. लेकिन सरकार की क्षमता भी सीमित है. मांझी जी इस बात को भली-भांति समझते हैं.’

इधर, आरजेडी और कांग्रेस ने मांझी की डिमांड को अपने-अपने दलों की डिमांड बताकर सियासी तापमान को बढ़ा दिया है. आरजेडी विधायक राहुल तिवारी ने कहा है कि ‘तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने हमेशा बेरोजगारों के हित में ये मांग उठाई है. मांझी सरकार के अंग हैं उन्हें ठोस फैसला लेना चाहिए. दो तरह की नीति बिलकुल नहीं चलेगी. अगर सरकार उनकी मांग नहीं मानती है तो मांझी एनडीए का साथ छोड़ दें.’

वहीं, कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड ने भी कहा है कि ‘मांझी जिन मांगों को उठा रहे हैं राहुल गांधी (Rahul Gandhi) उसको पहले से उठाते रहे हैं. कांग्रेस पार्टी चाहती है कि बेरोजगारों को 6 हजार रुपए उनके खाते मे सरकार दे. मांझी जी सरकार में हैं. उन्हें बेरोजगारों के मसले पर ठोस फैसला लेना चाहिए. अगर फैसले को सरकार नहीं मानती है तो मांझी सरकार का साथ छोडें.’

ऐसे में अगर सरकार मांझी की डिमांड को मान लेती है तो एक करोड़ बेरोजगार लोगों को 5 हजार रुपए भत्ता देने में सरकार को हर महीने 50 अरब का खर्च आएगा. इसी तरह से इसका आकंड़ा अगर एक साल का जोड़ लिया जाए तो इस वित्तीय बोझ को उठाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा. हालांकि, बिहार सरकार की तरफ से बेरोजगारी भत्ता के रूप में अभी एक हजार रुपए दिए जा रहे हैं.