
Jhunjhunu : आज विश्व पर्यावरण दिवस है. हम आपको रूबरू कराने जा रहे है एक पर्यावरण प्रेमी से, जिन्होंने अपनी बेटी की शादी में पौधे का कन्यादान किया. वहीं, पिछले नौ सालों से वे पौधों को बेटे के माफिक सार संभाल करते हैं. कुल मिलाकर कह सकते है कि इस शख्श के लिए आज जो भी है. वो सब पौधे है, उनकी रखवाली, सार संभाल और अधिक से अधिक पौधे लगाना है. ये शख्श है झुंझुनूं के सुलताना के समीप सोलाना गांव के रहने वाले होशियारसिंह. होशियारसिंह (Hoshiyar Singh) का पर्यावरण संरक्षण के प्रति ऐसा समर्पण की सालाना लाखों रुपए खर्च कर झुंझुनूं जिले के सार्वजनिक जगहों पर छायादार पौधें लगा रहे हैं.
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आपको बता दें कि सोलाना (Jhunjhunu News) के होशियार सिंह पिछले 9 साल से ग्लोबल वार्मिंग को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण संरक्षण का काम कर रहे हैं. उन्होंने अपने खेत की चार बीघा जमीन पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कर रखी हैं. इस जगह से हर साल हजारों पौधे तैयार कर उनको सार्वजनिक जगहों पर लगाया जाता है. होशियार सिंह चाहते है कि दूर दूर फैले रेतीले धोरे हरे भरे हो जाए. जब भी श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार में जाते तो वहां बैठने के लिए छायादार जगह नही होने से विचार आया क्यों न इन जगहों पर छायादार पौधे लगाए जाए. फिर ग्लोबल वार्मिंग के बारे में पढ़ा तो जहन में इस समस्या से निपटने का एक मात्र उपाय हरियाली ही सूझा. फिर क्या था. इन्होंने अपने खेत की चार बीघा जमीन में पौधे तैयार कर गांव गांव ढाणियों के सार्वजनिक जगहों पर स्वयं के साधनों से पहुंचाने और लगाने लगे.
कोई बताए पौधे की पीड़ा, फिर नहीं रूकते पांव
होशियारसिंह इन पौधों को अपने नन्हें बेटों—बेटी की तरह मानते है. यही कारण है कि कोई इन्हें यह सूचना दे दें कि किसी जगह पौधे बीमार है, या उन्हें कीट आदि ने घेर लिया है तो वे रूकते नहीं है. बिना कोई पैसा लिए दौड़ पड़ते है उसी सार संभाल करने के लिए. उनके इसी पर्यावरण संरक्षण प्रेम की वजह से हर साल पौधे लगाने में लाखों रुपए खर्च हो जाते है. इस बार उनके यहां बरगद,पीपल, नीम, पापड़ी, बकाण जैसे छायादार पौधे निशुल्क वितरण के लिए तैयार हो रहे हैं.
पौधे से किया बेटी का कन्यादान
सोलाना के होशियारसिंह ने अपनी पुत्री दीपिका की शादी में भी अनूठी पहल की. बेटी की शादी में कन्यादान में पौधा दिया था. इसके साथ साथ गांव में होने वाले मांगलिक कार्यों में भी पौधारोपण करवा कर ये इसे गांव की परम्परा बनना चाहते हैं.
जिलेभर में 9 सालों में लगाए पैंतालीस हजार पौधे
जिलेभर के गांवों में युवाओं की मदद 9 सालों से स्कूल, उप स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम, कब्रिस्तान,खेल मैदान के साथ साथ आम रास्तों और खेतों की मेड़ो में करीब पैंतालीस हजार से अधिक पौधे लगावा चुके हैं. किसान बताते हैं कि उत्तर दिशा की मेड़ों में पौधे लगने से उनकी फसल सर्दी और पाळे से बची रहती है.
रिपोर्ट : संदीप केडिया
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