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Patna: बिहार में 15 साल बनाम 15 साल की राजनीति एक बार फिर लौट आयी है. चुनाव से पहले नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने 15 साल बनाम 15 का मुद्दा उठाकर सत्ता हासिल की. अब स्वास्थ्य सुविधाओं के मसले पर 15 साल बनाम 15 साल के जरिए लालू प्रसाद यादव (Lalu Yadav) सरकार पर सवाल उठा रहे हैं. 

हालांकि, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय (Mangal Pandey) ने आंकड़ों के जरिये लालू प्रसाद को आईना दिखाने की कोशिश जरूर की है. विपक्ष जिस तीर के जरिये नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के सत्ता पर निशाना साधा था. अब उसी तीर के जरिये लालू प्रसाद सरकार की पोल खोलने में जुटे हैं. 

दरअसल, बीते एक महीने से लालू प्रसाद लगातार ट्वीट रीट्वीट कर रहे हैं. इस दौरान वो हरेक जिले के खंडहर हो चुके स्वास्थ्य केन्द्रों की तस्वीर भी डाल रहे हैं.
 
साथ ही इस बात का जिक्र कर रहे हैं कि उनके समय के स्वास्थ्य केन्द्रों को नीतीश कुमार ने अपने शासनकाल में बंद करा दिया. जिसके कारण आज लोग सही स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हो गये हैं. जबकि सरकारी फाइलों में ये स्वास्थ्य केन्द्र अभी भी चल रहे हैं. लालू प्रसाद ने ऐसे सरकारी फाइलों को गुलाबी फाइलों का नाम दिया है.

लालू यादव द्वारा उठाए गए सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने लालू प्रसाद को आंकड़ों के साथ जवाब देने की कोशिश की है. मंगल पांडे ने कहा है कि 15 साल पहले एक पीएचसी में महीने में केवल 39 मरीज जाते थे. अब 10 हजार मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. पहले सरकारी हॉस्पिटल में दवा नहीं मिलती थी अब दवा मुफ्त दवा मिल रही है. 

उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस जैसी महामारी के लिए सरकार प्रति मरीज 4 से 5 लाख तक की दवा मुफ्त दे रही है. लोग बयान देकर सिर्फ राजनीति कर सकते हैं लेकिन हम सेवा में लगे हैं.

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वहीं, आरजेडी के मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र का दावा है कि नीतीश सरकार में स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है. लालू प्रसाद के शासनकाल में स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था काफी दुरुस्त थी. नीतीश कुमार इन मामलों में फेल हो चुके हैं.

वहीं, जेडीयू ने लालू प्रसाद के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. पूर्व मंत्री नीरज कुमार ने कहा है कि लालू प्रसाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर बोलते हैं तो अच्छा नहीं लगता.15 सालों में स्वास्थ्य सुविधाओं में काफी बदलाव आया है. पहले पीएचसी में मरीज नहीं जाते थे. लालू प्रसाद को बताना चाहिए कि उनके शासनकाल में कितने हॉस्पिटल खुले और आज कितने हैं.