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दुर्गेश बिसेन/पेंड्रा: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Pradhanmantri Ujjwala Yojna) के तहत बांटे गए गैस कनेक्शन बढ़ती महंगाई में गरीबों की तोड़ रहे हैं. महंगी गैस के कारण गरीब परिवार सिलेंडर नहीं भरवा रहे, बल्कि वे अब लकड़ी-कोयले से खाना बनाने को मजबूर हैं. उन्होंने सिलेंडर और चूल्हों को कबाड़ में रख दिया है. 

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की बात करें तो यहां उज्जवला गैस कनेक्शन के लगभग 40 हजार से ज्यादा कनेक्शन बांटे गए. कनेक्शन बांटने के बाद से ग्रामीणों ने योजना के प्रति अच्छा रिस्पांस दिखाते हुए शुरू के एक-दो महीने गैस रिफिलिंग कराई. उसके बाद लॉकडाउन लग गया. कोरोना काल में सभी गैस कनेक्शन धारकों को केंद्र की ओर से रिफिलिंग के लिए राशि प्राप्त हुई पर कमाई ना होने की वजह से ज्यादातर ग्रामीणों ने रिफलिंग नहीं कराई. कोरोना की दूसरी लहर ने अब ग्रामीणों की कमर पूरी तरह तोड़ दी है तीन चार महीनों से महिलाओं ने सिलेंडर के रिफलिंग नहीं कराई है. ग्रामीणों का कहना है कि महंगाई इतनी है कि दो वक्त का भोजन ही कर लें वही बहुत है, सिलेंडर भरवाने के लिए पैसे कहां से लाएं , इसलिए गैस चूल्हा और सिलेंडर कबाड़ की तरह घर में पड़ा हुआ है फिलहाल ग्रामीण कंडे और लकड़ी  इकट्ठा कर  मिट्टी के चूल्हों में ही भोजन बना रहे हैं.

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हालांकि योजना के तहत गैस चूल्हा और सिलेंडर मिलने के बाद महिलाएं सबसे ज्यादा खुश थीं. अपनी क्षमता और हैसियत के हिसाब से हर ग्रामीण ने अपने घर में मिट्टी का दिया सीमेंट का प्लेटफार्म तैयार किया था. प्लेटफार्म के ऊपर चूल्हा एवं प्लेटफॉर्म के नीचे सिलेंडर रखने की व्यवस्था की थी. महंगाई की वजह से उसी प्लेटफार्म में यह चूल्हे कबाड़ और कचरे की तरह नजर आते हैं.

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वहीं गैस संचालकों की मानें तो पिछले दो-तीन महीनों में 5% ही उज्जवला गैस कनेक्शनों की रिफलिंग हुई है. एजेंसी संचालकों की मानें तो गैस के बढ़ते रेट एवं कम होती सब्सिडी की वजह से उज्जवला गैस कनेक्शन की रिफलिंग ना के बराबर हो गई है. उज्जवला कनेक्शन की रिफलिंग के लिए लॉकडाउन में जब पैसे मिले थे तब रिफिलिंग का प्रतिशत अच्छा था.

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