
Patna: नीति आयोग की तरफ से आई SDG की रिपोर्ट में बिहार सबसे फिसड्डी साबित हुआ है. जिसके चलते जेडीयू ने एक बार फिर से विशेष राज्य के दर्जे की मांग को दोहराया है.
JDU नेता उपेंद्र कुशवाहा के द्वारा सोशल मीडिया पर विशेष राज्य के दर्जे की मांग करने पर सियासत गरमाई हुई है. वहीं, इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के मुखिया जीतनराम मांझी ने भी ट्वीट कर अपनी राय जाहिर की है.
मांझी ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि ‘नीतीश कुमार ने बदतर कानून व्यवस्था और बिहार शिक्षा महकमे को दुरुस्त करने में अपनी पूरी ताकत लगा दी है. अब आधारभूत संरचना को ठीक करने के लिए विशेष राज्य के दर्जे की जरूरत है. डबल इंजन की सरकार में विशेष दर्जा नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा.’
वहीं, इसे लेकर बीजेपी के नेता जिबेश मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है. जिबेश मिश्रा ने कहा कि ‘पीएम मोदी बिहार को विशेष राज्य बनाने में लगे हैं. जरूरत के मुताबिक आर्थिक मदद दी जा रही है. हमारी कोशिश बिहार को विकसित राज्य बनाने की है, हम विशेष दर्जे से आगे का सोच रहे हैं.’
जेडीयू नेता नीरज कुमार का कहना है कि ‘पैकेज और विशेष दर्जा दोनों अलग-अलग मामले हैं. नियमों में संशोधन समय-समय पर होते रहे हैं. हम पिछड़े हैं तो इसमे हमारा कसूर नहीं है. पिछड़े राज्यों का भी अपना हक है. बिहार को विशेष दर्जा मिले.’
प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि ‘बीजेपी-जेडीयू को ये पता है कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता. दोनों इस मुद्दे पर बस राजनीति ही कर रहे हैं. पीएम मोदी ने अपनी सभाओं में भी बिहार को विशेष दर्जा देने की बात कही थी और नीतीश कुमार ने भी कहा था जो विशेष दर्जा देगा हम उसके साथ जाएंगे.’
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इधर, विशेष दर्जे पर प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने बयान दिया है. मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि ‘कुर्सी का मोह छोड़कर लालू प्रसाद और तेजश्वी यादव विशेष दर्जे की लड़ाई लड़ते रहे हैं. नीतीश कुमार को वाकई बिहार की चिंता है तो वे हमारी लड़ाई को मजबूत करें.’
वहीं, जदयू महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रवक्ता डॉक्टर तारा श्वेता आर्य ने कहा कि ‘बिहार राज्य को विशेष राज्य का दर्जा मिलना ही चाहिए क्योंकि बिहार के कई सारे जिले या तो बाढ़ से प्रभावित होते हैं या फिर सूखे का सीधा असर उन पर होता है. राज्य सरकार को अपनी पूरी क्षमता इन परिस्थितियों से निपटने में लगाना पड़ता है. यदि विशेष राज्य का दर्जा मिलेगा तो राज्य और तेजी से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा. विशेष राज्य के दर्जे को लेकर सभी को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.’
इसके साथ ही भारतीय पंचायती राज पार्टी लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन ने भी नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ‘जिस तर्ज पर नीति आयोग ने बिहार के विकास के पैमानों को फिसड्डी माना है उसको देखकर अब कम से कम बिहार की वर्तमान सरकार को बातें बनाने का काम छोड़कर, वास्तविकता के धरातल पर काम करना चाहिए. ताकि बिहार का मान सम्मान एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय पटल पर बेहतर हो सके.’
राजीव रंजन के मुताबिक, राज्य सरकार केवल स्थानीय राजनीति के विषयों पर गंभीरता दिखाती है लेकिन उन मुद्दों को छोड़ देती है जिससे बिहार और बिहारियों का भला होने वाला है.’
