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राजधानी दिल्ली में 72 लाख परिवारों को लाभान्वित करने वाली घर-घर राशन योजना (Doorstep Delivery Of Ration Scheme) पर केंद्र द्वारा रोक लगाए जाने से दिल्ली सरकार ने ऐतराज जताया है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में इस हफ्ते से घर-घर राशन पहुंचाने की योजना शुरू होने वाली थी, इसको लेकर सारी तैयारियां हो चुकी थीं मगर केंद्र सरकार द्वारा 2 दिन पहले इसे रोक दिया गया. केंद्र का दावा है कि हमने मंजूरी नहीं ली. इसको लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है… 

आदरणीय प्रधान मंत्री जी,

दिल्ली में अगले हफ़्ते से घर घर राशन पहुँचाने का काम शुरू होने वाला था. इसके तहत अब एक गरीब आदमी को राशन लेने के लिए, राशन की दुकान पर धक्के नहीं खाने पड़ते, बल्कि सरकार बढ़िया से राशन पैक करके, उसके घर भिजवाती सारी तैयारी हो चुकी थी. टेंडर हो चुके थे. बस अगले हफ़्ते से ये शुरू होने वाला था और अचानक, दो दिन पहले इसको रोक दिया गया। लोग पूछ रहे हैं कि आपने ऐसा क्यों किया?

पिछले 75 साल से इस देश की गरीब जनता राशन माफिया का शिकार होती आयी है. पिछले 75 सालों से हर महीने, फाइलों में जनता के नाम का राशन जारी होता है, पर उनको मिलता नहीं है, अधिकांश राशन चोरी हो जाता है. कहते हैं कि इस राशन माफिया के तार बहुत ऊपर तक हैं. 75 साल में आज तक, कोई सरकार, इस माफिया को खत्म करने की हिम्मत नहीं कर पायी दिल्ली में पहली बार एक सरकार आयी है जिसने ये हिम्मत दिखाई है. 

अगर ये घर घर राशन व्यवस्था लागू हो जाती तो राशन माफिया का खात्मा हो जाता. पर देखिए, ये राशन माफिया कितना ताकतवर है. दिल्ली में ये योजना अगले हफ़्ते से लागू होने वाली थी और एक हफ़्ते पहले, इन्होंने इसे खारिज करवा दिया. ये कह कर हमारी स्कीम ख़ारिज की गई है कि हमने केंद्र सरकार से इसकी अप्रूवल नहीं ली. ये ग़लत है सर हमने एक बार नहीं, पांच बार आपकी अप्रूवल ली है. 

कानूनन हमें दिल्ली में ये स्कीम लागू करने के लिए केंद्र सरकार की कोई अप्रूवल लेने की ज़रूरत नहीं है. कानूनन इस स्कीम को लागू करने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सक्षम है. लेकिन हम केंद्र सरकार के साथ किसी तरह का विवाद नहीं चाहते थे. इसलिए हमने एक बार नहीं, पाँच बार आपका अप्रूवल लिया। वो सभी चिट्ठियाँ संलग्न हैं.

दिल्ली के खाद्य मंत्री श्री इमरान हुसैन ने 04.02.2019, 04.03.2020, 17.06.2020, 19.11.2020 और 03.12.2020 को केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सूचित किया था कि दिल्ली सरकार दिल्ली में मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना लागू करने जा रही है. आपकी ओर से एक बार भी इस पर कोई आपत्ति नहीं की गयी. फिर 20 फ़रवरी को दिल्ली सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके इस योजना को लागू कर दिया. इस योजना के तहत टेंडर जारी कर दिए गए.

इस योजना का 25.03.2021 को उद्घाटन होने वाला था कि अचानक 19.03.2021 को केंद्र सरकार ने कुछ आपत्तियां लगाकर इसे रोक दिया. हमने आपकी सारी आपत्तियां मान लीं और योजना में उचित संशोधन कर दिए. जैसे आपने आपत्ति की कि हम इस योजना का नाम मुख्यमंत्री के नाम से नहीं रख सकते. हमारा मकसद अपना नाम चमकाना नहीं था. हमने आपकी बात मान ली और हमने स्कीम का नाम ही हटा दिया. आपने और जितनी आपत्ति कीं, हमने सारी मान ली. इस सबके बाद भी आप कहते हैं कि हमने आपकी अप्रूवल नहीं ली और आपने ये स्कीम ख़ारिज कर दी?

लोग पूछ रहे हैं अगर पिज्जा की होम डिलिवरी हो सकती है, बर्गर की होम हो सकती है, स्मार्टफ़ोन और कपड़ों की भी होम डिलिवरी हो सकती है तो फिर गरीबों के घरों में राशन की होम डिलिवरी क्यों नहीं होनी चाहिए?

केंद्र सरकार ने ये भी तर्क दिया है कि चूँकि राशन दुकानदारों ने दिल्ली हाई कोर्ट में इस योजना के ख़िलाफ़ केस किया हुआ है, इसलिए ये स्कीम ख़ारिज की जा रही है. इस बात पे आप स्कीम कैसे ख़ारिज कर सकते हैं? ये राशन दुकानदार इस योजना के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट से स्टे लेने गए थे. हाई कोर्ट ने इन्हें स्टे देने से मना कर दिया. जब हाई कोर्ट ने इन्हें स्टे नहीं दिया तो केंद्र सरकार स्टे कैसे दे सकती है? 

अगर केंद्र सरकार राशन माफिया के साथ खड़ी होगी, तो इस देश के गरीब लोगों के साथ कौन खड़ा होगा, सर? और एक बात उस हाई कोर्ट के केस में केंद्र सरकार भी पार्टी है. कोर्ट में केंद्र सरकार ने इस योजना के ख़िलाफ़ एक भी आपत्ति नहीं की. जब कोर्ट में आपको हमारी योजना के ख़िलाफ़ कोई आपत्ति नहीं है, तो फिर कोर्ट के बाहर अब इस योजना को ख़ारिज क्यों किया जा रहा है?

ये कोरोना का कठिन समय है. कई लोग कोरोना के डर से राशन लेने नहीं जाते क्योंकि राशन की दुकान पर भीड़ लगती है. ये सब गरीब लोग हैं. कई लोगों ने कोरोना-काल में नौकरी भी खो दी है. उनके घर में खाने को नहीं है. अगर हम इन्हें इनके घर राशन पहुँचाना चाहते हैं, तो इसमें आपत्ति क्यों है? मुझे तो लगता है कोरोना काल में केवल दिल्ली में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में घर घर राहुॅच की ये योजना लागू करनी चाहिए.

केंद्र सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि दिल्ली सरकार चाहे तो अपनी अलग स्कीम चला ले, केंद्र की स्कीम से छेड़छाड़ ना करे सर, आप और हम अलग कब से हो गए? केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार अलग कब से हो गए? आपकी और हमारी स्कीम अलग कब से हो गय? सब कुछ इस देश का है सर, सब कुछ इस देश के लोगों का है. 

क्या अब एक ही मुद्दे पर एक ही राज्य में दो दो स्कीमें हुआ करेंगी एक केंद्र सरकार की और दूसरी राज्य सरकार की? क्या एक ही राज्य में एक ही मुद्दे पर डबल खर्चा हुआ करेगा? मतलब दिल्ली में राशन बाँटने के लिए एक तरफ केंद्र सरकार 2000 करोड़ रुपए खर्च करेगी और दूसरी तरफ़ दिल्ली सरकार अलग से 2000 करोड़ रुपए खर्च करेगी? 

क्या ये समझदारी की बात होगी सर? और क्या केंद्र सरकार का ये कहना उचित है कि ये केंद्र की स्कीम है और दिल्ली सरकार उस से छेड़खानी ना करे? ये राशन ना आपका है, ना मेरा, ये राशन ना आम आदमी पार्टी का है, ना भाजपा का ये राशन देश के लोगों का है और इस राशन की चोरी रोकने की ज़िम्मेदारी हम दोनों की है।

मीडिया में केंद्र सरकार द्वारा ये भी कहा जा रहा है कि दिल्ली सरकार घर घर राशन योजना में गरीब लोगों से ज्यादा पैसे लेगी. ये सरासर गलत है सर। केंद्र सरकार के आदेशों के विपरीत हम एक भी पैसा नहीं लेंगे. केंद्र सरकार के कुछ अफ़सरों का कहना है कि इस स्कीम के खारिज करने का असली कारण ये है क्योंकि ये केंद्र सरकार का राशन है, ये योजना लागू करके दिल्ली सरकार इसका श्रेय नहीं ले सकती.

सर, यकीन मानिए, ये काम मैं रत्ती भर भी क्रेडिट के लिए नहीं कर रहा. मेरा सिर्फ एक ही मकसद हैं, किसी भी तरह ग़रीबों को उनका पूरा राशन मिले. आप प्लीज़ मुझे ये लागू करने दीजिए, सारा क्रेडिट आपका सारा श्रेय आपका मैं खुद सारी दुनिया से कहूँगा कि ये योजना प्रधान मंत्री जी ने लागू की है. इस वक्त देश बहुत भारी संकट से गुजर रहा है.

ये वक्त एक दूसरे का हाथ पकड़ कर मदद करने का है सर. ये वक्त एक दूसरे से लड़ने का नहीं है. हम सब आपस में लड़ेंगे तो कोरोना से कैसे जीतेंगे? हमें आपस में नहीं, कोरोना से लड़ना है. मैं हाथ जोड़कर, दिल्ली के सत्तर लाख गरीब लोगों की ओर से आपसे विनती करता हूँ, स प्लीज़ इस योजना को मत रोकिए, ये राष्ट्रहित में है. इसे होने दीजिए.

आज तक राष्ट्रहित के सभी कार्मों में मैंने आपका साथ दिया. मैंने हमेशा कहा है कि राष्ट्रहित के किसी भी काम में राजनीति नहीं होनी चाहिए. अगर कोई विपक्षी पार्टी की सरकार भी राष्ट्रहित में कोई काम करती है तो हम हमेशा उसका साथ देंगे. राष्ट्रहित के इस काम में आप भी हमारा साथ दीजिए सर. अभी तक की सरकारों ने देश के गरीब लोगों को 75 साल राशन की लाइनों में खड़ा रखा. 

इन्हें और अगले 75 साल राशन की लाइनों में खड़ा मत कीजिए सर ये लोग मुझे और आपको कभी माफ नहीं करेंगे. केंद्र सरकार इस योजना में जो बदलाव करवाना चाहती है, हम वो करने के लिए तैयार हैं. कृप्या हमें इस योजना के तहत लोगों के घर राशन पहुँचाने की इजाजत दी जाए.

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