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कोंडागांव : कोरोना महामारी का असर देशभर में पड़ा है. कोरोना से पीड़ित ही सिर्फ परेशान नहीं हुए बल्कि पीड़ितों के परिजन के अलावा आम जनता को भी इसके परिणाम झेलने पड़े है. एक तरफ रोजगार बंद हुए तो दूसरी तरफ स्कूली बच्चों को भी घर में कैद होकर पढ़ने को मजबूर होना पड़ा.

बच्चों में चिड़चिड़ापन
लगातार 2 सत्र से स्कूल बंद का असर अब बच्चों और उनके परिजनों पर दिखा है. बच्चे जहां घर में रहने को मजबूर हुए है तो माता पिता भी बच्चों के घर में रहने से चिड़चिड़े हो गए है. माता-पिता भी मानते है कि शारीरिक खेलकूद बंद होने से बच्चों में भी चिड़चिड़ापन दिखने लगा है. लेकिन डॉक्टर अभी भी मानते है कि अभी वक़्त नहीं आया है बच्चे घरों से बाहर निकले और माता पिता भी बच्चों को समय जरूर दे.

अब पेरेंट्स भी परेशान
कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर किसी पर हुआ है तो वे है छोटे छोटे बच्चे. जो पिछले 1 साल से जैसे पिंजरे में पक्षियों को बन्द किया गया है वैसे ही बच्चों को. पिछले एक साल से बच्चों का खेलकूद बंद है. वहीं पेरेंट्स की मजबूरी है कि मोबाइल और अन्य चीजों से इनका समय कटवाना है. ऐसे में अब पेरेंट्स भी परेशान दिखने लगे है.

मां दे रही ज़्यादा समय
सबसे ज्यादा समय बच्चों को मां दे रही है. कुछ माताओं से बात करने से पता लगा वे कहती है कि बच्चों का 6 घण्टे स्कूल में कटता था तो वो ज़्यादा परेशान नहीं होती थी. हुरदेश्वरी जोशी अपना अनुभव साझा करती हुई बताती हैं कि जबतक बच्चे स्कूल में रहते थे इस बीच घर का काम कर लिया करती थी. अब पूरा समय बच्चों में निकल जाता है. बच्चों के साथ साथ हममें भी कभी कभी चिड़चिड़ापन आ जाता है.

क्या कहते है एक्सपर्ट
बच्चों के डॉक्टर आर बघेल का कहना है बच्चों को ड्राइंग गेम, डॉन्स, गीत-संगीत जैसे कार्यों में लगाकर रखे.
मोबाइल बच्चों को ज्यादा न दें.
पेरेंट्स देखें कि बच्चे मोबाइल में क्या देख रहे है.
बच्चों के साथ आप भी खेलें और एंजॉय करें
बच्चों को रोज़ एक मजेदार टास्क दें ताकि वो उसमें उलझे रहे साथ ही टारगेट पूरा करना भी सीखें.
बच्चों के साथ मनोरंजन के लिए मिलकर मूवी, मोटिवेशनल वीडियोज़ देखें.
अभी खतरा टला नहीं है घर में ही बच्चों को रखें.

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