

कर्ण मिश्रा/जबलपुर: जबलपुर का स्वास्थ्य महकमा पिछले कुछ दिनों से एक ऐसे अस्पताल की खोज में है, जिसने सीरम इंस्टीट्यूट में 10 हजार कोविशिल्ड का ऑर्डर दे रखा है. लेकिन स्वास्थ्य महकमा अभी तक इस अस्पताल को ढूंढ नहीं पाया है.
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दरअसल 25 मई को सीरम इंस्टीट्यूट में मध्य प्रदेश के 6 निजी अस्पतालों ने कोविशील्ड का आर्डर दिया. इसमें भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के एक-एक और इंदौर के तीन हॉस्पिटल का नाम था. जानकारी के मुताबिक जबलपुर से मैक्स हेल्थ केयर नाम के एक अस्पताल ने 10 हजार कोविशील्ड का आर्डर दिया था.
देखा को कोई अस्पताल ही नहीं था
ऐसे में वैक्सीन के लिए अस्पताल की कोल्ड स्टोरेज क्षमता की जांच के लिए भोपाल से जबलपुर के स्वास्थ्य महकमे को इस अस्पताल के संबंध में जानकारी जुटाने का आदेश आया. आदेश के मुताबिक जबलपुर के टीकाकरण अधिकारी ने मैक्स हेल्थ केयर अस्पताल की जानकारी जुटाई लेकिन इस नाम का शहर में ना तो कोई हॉस्पिटल है, और ना ही कोई क्लीनिक. जिसके बाद टीकाकरण अधिकारी ने ऐसे किसी भी तरह के हॉस्पिटल ना होने की जानकारी भोपाल को भेज दी.
किसने दिया अस्पताला का गलत नाम और पता?
लेकिन अब सवाल यह खड़े होते हैं कि आखिरकार किसने इतनी बड़ी मात्रा में वैक्सीन का आर्डर दिया था और ऑर्डर देने वाले ने आखिरकार क्यों गलत पता दिया? हालांकि टीकाकरण अधिकारी के मुताबिक सीरम इंस्टीट्यूट से वैक्सीन रवाना हुई या नहीं इस बात की जानकारी उनके पास नहीं है. लेकिन टीकाकरण अधिकारी का कहना है कि उनकी जानकारी के बिना शहर में कोई भी हॉस्पिटल वैक्सीन नहीं लगा सकता.
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अब स्वास्थ्य महकमा जुटा ढूंढने
अब इस काल्पनिक हॉस्पिटल की जानकारी जुटाने में जबलपुर से लेकर भोपाल तक का स्वास्थ्य महकमा जुट गया है. इसके साथ ही सीरम इंस्टीट्यूट से भी जानकारी ली जा रही है कि आखिरकार किसने इतनी बड़ी मात्रा में वैक्सीन का आर्डर दिया था. सबसे मुख्य बात यह है कि भोपाल से दी गयी जानकारी में भी सिर्फ हॉस्पिटल का नाम बताया गया है और स्थान के नाम पर सिर्फ जबलपुर. ऐसे में मध्यप्रदेश के इस महानगर में इस काल्पनिक अस्पताल की खोज एक अनसुलझी पहली का रूप लेती जा रही है. ऐसे में देखना होगा कि की यह खोज कहां तक जाती है.
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