नई दिल्ली: आज हम आपको फ्लाइंग कार की एक शानदार लॉन्ग ड्राइव पर लेकर चलते हैं. 28 जून को स्लोवाकिया में फ्लाइंग कार के एक प्रोटोटाइप ने पहली बार Intercity Flight पूरी की. सरल शब्दों में कहें तो इस कार के जरिए हवा में एक शहर से दूसरे शहर की उड़ान भरी गई, जिसमें इस कार को 75 किलोमीटर का सफर तय करने में सिर्फ 35 मिनट का समय लगा. 

रफ्तार के मामले में बुलेट ट्रेन को टक्कर

फ्लाइंग कार के इस प्रोटोटाइप पर कंपनी वर्ष 2017 से काम कर रही है और अब तक इस उड़ने वाली कार ने 40 घंटे की टेस्ट फ्लाइट पूरी कर ली है. इस कार की खासियत ये है कि ये अधिकतम 190 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा में 8 हज़ार 200 फीट तक की उड़ान भर सकती है.

इसके अलावा कंपनी ने इस फ्लाइंग कार का एक और प्रोटोटाइप तैयार किया है, जिससे कार 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ पाएगी.

अभी हवा में उड़ने वाले एक पैसेंजर विमान की औसत स्पीड 900 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. जबकि बुलेट ट्रेन औसत 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ती है.

यानी ये फ्लाइंग कार उड़ान के मामले में विमानों को और रफ्तार के मामले में बुलेट ट्रेन को टक्कर दे सकती है. हालांकि आपमें से बहुत से लोगों का ये सवाल होगा कि हवा में उड़ने वाली ये गाड़ियां कब तक ज़मीन पर आपके लिए उतर आएंगी?

पहले भी हुआ ऐसा प्रयोग

इस सवाल का जवाब जानने के लिए आज आपको हमारे साथ 85 वर्ष पीछे चलना होगा, जब पहली बार किसी ने ये सोचा कि एक गाड़ी जितने खर्च में कैसे हवा में उड़ कर एक जगह से दूसरी जगह जाया जा सकता है. उस समय अमेरिका के मशहूर उद्योगपति हेनरी फोर्ड इस सवाल के जवाब में Sky Flivver नाम का सिंगल सीट एयरक्राफ्ट लाए थे, लेकिन टेस्ट फ्लाइट के दौरान ये विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसका प्रोडक्शन रोक दिया गया.

हालांकि वर्ष 1947 में अमेरिका में फिर से इस कोशिश को दोहराया गया और तब फ्लाइंग कार के एक प्रोटोटाइप ने टेस्ट फ्लाइट पूरी की. इस फ्लाइंग कार को उस समय Hall Flying कहा गया. ये कार देखने में ऐसी लगती थी, जैसे गाड़ी के ऊपर किसी विमान को बांध दिया गया हो और उस समय इसका काफी मजाक भी बना और बाद में इसके भी दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह से ये प्रोजेक्ट बंद हो गया.

1949 में भी एक ऐसी ही कार आई, जो देखने में काफी आकर्षक थी और ये उड़ भी सकती थी और सड़क पर दौड़ भी सकती थी. इसे दुनिया की पहली प्रैक्टिकल फ्लाइंग कार माना गया और इसे बनाने वाली कंपनी ने इसके 6 प्रोटोटाइप तैयार किए, लेकिन फिर कुछ खामियों की वजह से ये कार भी लोगों तक नहीं पहुंच सकी. इस दौरान कई और कंपनियों ने फ्लाइंग कारें बनाईं, लेकिन किसी भी जमाने में ये फॉर्मूला हिट नहीं हुआ.

उड़ने वाली कारों का आकर्षण

हालांकि हर दौर में उड़ने वाली कारों की तस्वीरों ने लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया और इन्हें बनाने वाली कंपनियों को इससे काफी लोकप्रियता और फंडिंग मिली. आज भी लगभग ऐसा ही हो रहा है. स्लोवाकिया की जिस कंपनी ने उड़ने वाली कार का टेस्ट किया है, उसमें निवेश करने के लिए दुनिया की कई बड़ी कंपनियां लाइन में खड़ी है, लेकिन इस कंपनी का कहना है कि उसके पास पहले से ही इस प्रोजेक्ट के लिए बहुत पैसा है.

आप जब भी कभी ट्रैफिक जाम में फंसते होंगे तो आपको लगता होगा कि काश, आप उड़ कर वहां से निकल सकते. फ्लाइंग कार असल में इसी कल्पना पर आधारित है, जिसे कुछ कंपनियों ने धीरे धीरे सच करना शुरू कर दिया है. हालांकि आज भी ये एक बड़ा सवाल है कि ये गाड़ियां कब तक बाजार में आएंगी और अगर आ भी गईं तो आम लोग इसे कैसे उड़ाएंगे क्योंकि, आज भी इंसान सड़कों पर सही से गाड़ी चलाना नहीं सीख पाया और इसी वजह से पूरी दुनिया में हर घंटे 150 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हो जाती है.