China threatens America over Taiwan: रशिया और यूक्रेन के युद्ध को बुधवार को पूरे 154 दिन हो गए. इसके दुष्प्रभाव पूरी दुनिया महसूस कर रही है. ऐसे में सोचिये अगर चाइना और अमेरिका के बीच वॉर का एक और फ्रंट खुल गया तो क्या होगा? हम आपको डरा नहीं रहे कि युद्ध होने ही वाला है बल्कि सावधान कर रहे हैं कि कई बार युद्ध के हालात भी युद्ध से कम नहीं होते. अमेरिका और चाइना (China) के बीच ये तनाव ताइवान (Taiwan) को लेकर पैदा हुआ है. ताइवान पहले से दोनों महाशक्तियों के बीच खींचतान का कारण है. लेकिन इस बार इस तनाव की वजह एक महिला का ताइवान प्रेम है.

अमेरिकी संसद की स्पीकर की ताइवान यात्रा पर विवाद

ऐसी खबरें हैं कि अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) बहुत जल्द ताइवान यात्रा पर जाने वाली हैं. चाइना (China) हमेशा से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है. ऐसे में नैंसी पेलोसी की इस यात्रा को वो ताइवान की स्वतंत्रता को अमेरिका की मान्यता के तौर पर देख रहा है. इसीलिये चाइना धमकी दे रहा है कि नैंसी पेलोसी की ये यात्रा उसके शस्त्र उठाने का यानी ताइवान पर हमला करने का कारण बन सकती है और ताइवान (Taiwan) भी चाइना की धमकी को गंभीरता से ले रहा है. इसलिए उसने भी युद्ध की तैयारियां और बचाव के उपाय तेज कर दिए हैं. 

ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग वेन समुद्र में ताइवान के एक युद्धपोत से अपनी सेना की तैयारियों की समीक्षा कर रही हैं. ताइवान साल 1984 से हर साल हान कुआंग मिलिट्री एक्सरसाइज़ करता आ रहा है. इसमें ताइवान की तीनों सेनाएं हिस्सा लेती हैं. ये एक्सरसाइज़ वैसे तो 29 जुलाई तक होनी है, लेकिन अब इसकी समय सीमा बढ़ाई भी जा सकती है. ताइवान की मिलिट्री आसमान में चाइना के लड़ाकू विमानों पर नज़र रख रही है, क्योंकि ताइवान पर दबाव बढ़ाने के लिए चाइना के फाइटर जेट उसके एयरस्पेस के करीब उड़ान भर रहे हैं. ताइवान ने पहली बार अपने रिजर्व सैनिकों को भी इस अभ्यास में शामिल होने के लिए बुलाकर उनकी ट्रेनिंग तेज़ कर दी है.

ताइवान की सेना कर रही युद्धाभ्यास

सैन्य तैयारियों के साथ ताइवान (Taiwan) अपने नागरिकों को चाइना के हमले से बचने की भी ट्रेनिंग दे रहा है. इस ट्रेनिंग को नाम दिया गया है- वान आन, जिसका मतलब है शांति. ताइपे में वर्षों बाद हमले से अलर्ट करने वाले सायरन बजे हैं. वहां ताइवान की आर्मी और सिविल डिफेंस की टीम लोगों को सिखा रही हैं कि हमला होने की स्थिति में उन्हें कैसे खुद का बचाव करना है, किन जगहों पर छुपना है और किस स्थिति में खुद को सुरक्षित रखना है.

ताइवान को इस समय अमेरिका का पूरा साथ मिल रहा है. चाइना को नियंत्रित रखने के लिये अमेरिका खुलकर ताइवान का साथ देता है. ऐसे में ताइवान पर चाइना (China) के हमले का अर्थ है सीधे तौर पर अमेरिकी हितों पर हमला. अमेरिकी थिंक टैंक पेंटागन को अंदेशा है कि नैंसी पेलोसी ताइवान (Taiwan) जाती हैं तो चाइना उनके विमान पर हमला कर सकता है. ऐसे में ये जानना महत्वपूर्ण है कि नैंसी पेलोसी ताइवान क्यों जाना चाहती हैं और उनसे चाइना की इतनी चिढ़ की वजह क्या है?

नैंसी पेलोसी की घोषणा से चिढ़ा चीन

दरअसल अमेरिकी में हाउस ऑफ़ रेप्रेज़ेंटेटिव के स्पीकर का पद राष्ट्रपति के बाद सबसे प्रतिष्ठित पद होता है. अमेरिका के हाउस ऑफ़ रेप्रेज़ेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) लंबे वक्त से चाइना की आलोचक हैं. नैंसी पेलोसी ताइवान (Taiwan) की स्वतंत्रता की समर्थक हैं और चीन की दखलंदाजी का विरोध करती रही हैं. 35 वर्षों के राजनीतिक करियर में पेलोसी ने कई बार चाइना के लोकतंत्र समर्थकों से मुलाक़ात की है. नैंसी पेलोसी ने तियानमेन स्क्वायर का भी दौरा किया था, जिसपर चाइना ने काफ़ी नाराजगी जताई थी. नैंसी पेलोसी वर्ष 1997 के बाद पहली अमेरिकी राजनेता होंगी जो ताइवान की यात्रा पर जाने वाली हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन भी नहीं चाहते कि नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) की ताइवान यात्रा अमेरिका और चाइना में टकराव का कारण बने. खासकर ऐसे वक्त जब दुनिया पहले ही रशिया-यूक्रेन युद्ध के असर झेल रही है. जो बाइडेन ने इसे अमेरिकी थिंक टैंक पेंटागन का विचार बताते हुए कहा कि इस टकराव को टालने के लिए  नैंसी पेलोसी को ताइवान यात्रा टाल देनी चाहिये. बाइडेन ने ये भी कहा कि इस संभावित यात्रा पर चीन (China) की धमकी जैसी टिप्पणी गैरजरूरी थी. राष्ट्रपति बाइडेन की गुरूवार को चाइना के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चर्चा होनी है. इस मुलाकात में इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी. दोनों राष्ट्रपतियों के बीच ये बातचीत 4 महीने बाद होने जा रही है.

बौखलाहट में अमेरिका को दे रहा धमकी

हांलाकि नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) ने अभी अपनी ताइवान (Taiwan) यात्रा की तारीख का खुलासा नहीं किया है. पहले वो अप्रैल में जाने वालीं थीं, लेकिन कोरोना की वजह से तब ये दौरा टाल दिया गया है. नैंसी पेलोसी का कहना है कि उनके लिये ताइवान जाने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी स्वतंत्रता का समर्थन करना है. स्वतंत्रता पर फैसला तो खुद ताइवान के लोगों को लेना है. उनका ये बयान भी चाइना की बौखलाहट में बढ़ोतरी करने वाला है.

यहां जो बात समझने वाली है, वो ये कि जिस तरह आज अमेरिका चाइना के ख़िलाफ़ ताइवान (Taiwan) के साथ खड़ा होने का भरोसा दे रहा है, ठीक ऐसा ही भरोसा उसने रशिया के खिलाफ़ यूक्रेन को भी दिया था. लेकिन जब रशिया ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू किया तो अमेरिका आर्थिक प्रतिबंध लगाने के अलावा रशिया के खिलाफ कोई कदम नहीं उठा पाया. इसलिए बड़ा सवाल ये है कि क्या अमेरिका खुद को दुनिया की सुपरपावर दिखाने के लिए यूक्रेन की तरह ताइवान को भी युद्ध क्षेत्र में फंसा देगा.

(ये ख़बर आपने पढ़ी देश की नंबर 1 हिंदी वेबसाइट Zeenews.com/Hindi पर)