Australia Bondi Terror Attack: ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच में बीते दिनों 2 हमलावरों ने कई लोगों पर ओपन फायरिंग की. माना जा रहा है कि यह घटना ‘ग्लोबलाइज द इंतिफादा’ नारे का नतीजा है. वैसे तो सामान्य अर्थ में इंतिफादा का मतलब विद्रोह या बगावत होता है, लेकिन अरबी भाषा में इसका मतलब हंगामा, हलचल, छुटकारा पाना या उथल-पुथल भी होता है. इसका आमतौर पर  फिलीस्तिनयों की इजरायल के खिलाफ जंग में इस्तेमाल होता है. 

क्या है इंतिफादा?  

इजरायल के खिलाफ पहला इंतिफादा साल 1987 में शुरु हुआ था, जो साल 1993 में समाप्त हुआ. इसके बाद यह वापस साल 2000 में शुरु हुआ था, जो 4 साल तक था. यह पहले से कहीं ज्यादा खूनी था. इंतिफादा का यह नारा अरब से निकलकर देशों में ‘ग्लोबलाइ द इंतिफादा’ कहा जाने लगा. इसका सीधा अर्थ था इंतिफादा यानी इस संघर्ष को पूरे विश्व में फैलाओ. सशस्त्र हिंसा का ये नारा इंतिफादा के बहाने कश्मीर भी पहुंचा था. सैकड़ों कट्टरपंथी इसकी चपेट में आए थे. कई समर्थक इंतिफादा को शांतिपूर्ण प्रतिरोध या वैश्विक एकजुटता का आह्वान मानते हैं, लेकिन यहूदी संगठन और कई सरकारें समेत आलोचक इसे यहूदियों और इजरायल के खिलाफ हिंसा भड़काने वाला मानते हैं.  

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कैसे बुलंद हुआ इंतिफादा का नारा 

दूसरी इंतिफादा में सुसाइड बॉम्बिंग और नागरिकों पर हमले जैसी कई घटनाएं देखी गई थीं. इस हमले में हजारों लोगों की जानें गई थीं. साल 2023 में गाजा युद्ध के दौरान यह नारा ज्यादा चर्चा में आया था. खासतौर पर  पश्चिमी देशों के प्रदर्शनों में यह अधिक चर्चित हुआ था, जो आगे चलकर एंटीसेमिटिज्म के आरोपों का कारण बना.  14 दिसंबर 2025 को सिडनी के बॉन्डी बीच में यहूदियों पर हूए आतंकी हमले के बाद से एक बार फिर ‘ग्लोबल इंतिफादा’ की चर्चा शुरु हो गई है. यह हमला इसी का विस्तार माना जा रहा है.   

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कश्मीर में भी उठी थी इंतिफादा की गूंज

कश्मीर में भी कई युवा इंतिफादा की गलत डेफिनेशन से प्रभावित हुए थे, जिसके परिणामस्वरूप कई युवा इसकी आड़ में भारत के खिलाफ हिंसा फैलाने में जुट गए थे. आतंकवादियों की ओर से इसे मजहबी रंग देकर युवाओं को बरगलाया जाता था और उनका अपने मकसद के लिए इस्तेमाल किया जाता था. जिस दौर में बड़े पैमाने पर घाटी में विरोध प्रदर्शन होता था उस समय इंतिफादा की खूब चर्चा होती थी. साल 2010 में कश्मीर में महीनें तक चले प्रदर्शन को  ‘कश्मीरी इंतिफादा’ कहा जाने लगा. इस प्रदर्शन में कई युवा पत्थर फेंककर भारत के खिलाफ विरोध करते थे. साल 2016 में हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर बुरहान वानी के मरने के बाद भी भड़की हिंसा और विरोध को इंतिफादा से जोड़ा गया. इस दौरान महीनों तक चली हिंसा में दर्जनों लोग मारे गए थे.