
Why are Gen Zs turning against Islam in Türkiye: एक ऐसा देश, जो खुद को इस्लामिक देशों का खलीफा कहता है. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि उस मुल्क की Gen-Z इस्लामिक परंपरा की ही खिलाफत कर रही है. तुर्किए में ऐसा ट्रेंड शुरू हो गया है जिसे देख दुनियाभर के कट्टरपंथी परेशान हैं. तुर्किए की जेन-ज़ी यानी युवा पीढ़ी ने सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड शुरू किया है. जिसमें वो नमाज का मजाक उड़ा रहे हैं.
आखिर मुस्लिम देश तुर्किये की नई पीढ़ी..नमाज का मजाक क्यों उड़ा रही है, अब इसकी पूरी कहानी समझिए. दिसंबर के महीने में तुर्किए की सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड शुरू हुआ. जिसमें युवा पहले नमाज पढ़ते हैं. सजदा करते वक्त मुस्कुराते हैं. फिर नमाज पढ़ते पढ़ते गिर जाते हैं. कई वीडियोज में तो युवा नमाज पढ़ते वक्त सिगरेट पी रहे हैं. ये ट्रेंड दिसंबर 2025 में टिकटॉक पर शुरू हुआ. पहले कुछ वीडियो आए, जहां लड़कियां नमाज का मजाक उड़ा रही थीं. जल्दी ही ये वायरल हो गया और तुर्किये में दिनों-दिन ये फैलता गया. एक वीडियो को एक हफ्ते में 10 लाख से ज्यादा व्यूज मिल गए. ये ट्रेंड इतना तेज फैला कि सोशल मीडिया पर ‘तुर्किये नमाज मॉकिंग’ जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे.
गुस्से में हैं मुस्लिम देश
तुर्किए में एंटी नमाज ट्रेंड शुरू होने के बाद से पूरा मुस्लिम वर्ल्ड गुस्से में है. कोई कह रहा है इन बच्चों के माता पिता को शर्मसार होना चाहिए. कोई कह रहा है कि अल्लाह इन्हें सदबुद्धि दें. एक शख्स ने लिखा कि इन वीडियोज को देखकर Ottoman साम्राज्य के महान सुल्तान एर्तगल गाजी भी आज शर्मसार होंगे. इन वीडियोज को देखकर कई मौलवी मौलाना भी गुस्से में हैं.
इस्लाम से क्यों गुस्से में हैं युवा
तुर्किए में ऐसा ट्रेंड वाकई चौंकाने वाला है. लेकिन सवाल उठता है कि जिस मुल्क में 99% मुसलमान हैं. वहां नमाज का मजाक क्यों उड़ाया जा रहा है. सवाल उठता है कि जिस मुल्क में सरकार युवाओं को ‘धार्मिक पीढ़ी’ बनाने की कोशिश कर रही है. जिनके दिमाग में मजहबी कट्टरता भरना चाहती है, वहां की Gen-Z..नमाज से दूर क्यों जा रही है?
तुर्किए की जेन-जी के एंटी नमाज ट्रेंड के पीछे दो कारण बताए जा रहे हैं. इस ट्रेंड को तुर्किए की एक टीवी सीरीज से जोड़कर देखा जा रहा है. ‘कुर्तलार वादीसी’ नाम की टेली सीरीज के एक सीन में नमाज पढ़ते हुए एक इमाम की मौत हो जाती है. माना जा रहा है कि युवा इसी सीन का मजाक उड़ा रहे हैं.
इस एंटी नमाज ट्रेंड को तुर्किए के युवाओं में इस्लाम से मोहभंग से भी जोड़कर देखा जा रहा है. तुर्किए की सरकार युवाओं में धार्मिक भावनाओं को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है. माना जा रहा है कि इस ट्रेंड के ज़रिए इन योजनाओं का विरोध किया जा रहा है.
धर्मनिरपेक्षता पर लौट रहा तुर्की
कई लोग इस ट्रेंड को तुर्किए के संस्थापक मुस्तफा कमाल अतातुर्क की सेक्युलर विचारधारा ‘केमलिज्म’ से जोड़कर भी देख रहे हैं. केमलिज़्म को अतातुर्कवाद भी कहा जाता है. केमलिज्म का मुख्य उद्देश्य था ऑटोमन साम्राज्य के पतन के बाद तुर्की को एक आधुनिक राष्ट्र बनाना. केमलिज्म का मुख्य उद्देश्य है धर्मनिरपेक्षता. माना जा रहा है कि तुर्किए की युवा पीढ़ी अब इस्लाम से दूरी बनाकर इसी आदर्श को अपना रही है.
#DNAमित्रों | तुर्किये का Gen-z… इस्लाम छोड़ रहा है? तुर्किये की ‘नमाज विरोधी पीढ़ी’ का विश्लेषण
खलीफा के मुल्क में नमाज का मजाक क्यों?#DNA #DNAWithRahulSinha #Turkey #Namaz @RahulSinhaTV pic.twitter.com/GZ990e0mFo
— Zee News (@ZeeNews) December 25, 2025
जिस तुर्किए के राष्ट्रपति खुद को मुस्लिम मुल्कों का खलीफा मानते हैं. उस मुल्क की युवा पीढ़ी ही इस्लाम से दूरी बना रही है. ये सिर्फ सुनी सुनाई बातें नहीं हैं बल्कि आंकड़ें इस बात की गवाही दे रहे हैं.
तुर्की में इस्लाम क्यों छोड़ रहे लोग?
2025 के KONDA सर्वे के मुताबिक, खुद को ‘धार्मिक’ मानने वालों की संख्या 55% से 46% हो गई है. तुर्किए में ‘नास्तिक या गैर-धार्मिक’ 2% से बढ़कर 8% हो गए हैं. 18 से 24 साल के 11% युवा खुद को गैर धार्मिक मानते हैं. 2023 की एक और रिपोर्ट में ये पाया गया कि 18-24 साल के युवाओं में सिर्फ 18.4% युवा ही खुद को ‘कट्टर मुस्लिम’ मानते हैं. बाकि खुद को धर्मनिरपेक्ष मानते हैं.
यानी तुर्किए सिर्फ कहने को 99% मुस्लिम आबादी वाला मुल्क है. असल में इस्लाम को मानने वालों की संख्या कम होती जा रही है और सोशल मीडिया के नए ट्रेंड के जरिये अब ये दुनिया देख रही है.
