Iran Protest: ईरान में पिछले कुछ दिनों से लोग सड़कों पर उतरे हैं. यहां सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन हिंसक हो चुका है. आर्थिक समस्या को लेकर शुरु हुआ यह प्रदर्शन अब सत्ता बदलने की मांग पर उतरा है.  ईरानी न्यूज मीडिया के मुताबिक पिछले हफ्ते भड़के इस हिंसक प्रदर्शन में ईरान के सुरक्षा बलों का एक सदस्य मारा गया. मीडिया चैनल ने इसकी जानकारी लोरेस्टान प्रांत के उप राज्यपाल सईद पौराली के हवाले से दी. जिसमें बताया गया,’ पब्लिक ऑर्डर को डिफेंड करने वाले कौहदाश्त शहर के बासिज के 21 साल सदस्य की बुधवार 31 दिसंबर 2025 की रात दंगाइयों ने हत्या कर दी.’ 

सुरक्षाबल की मौत 

बता दें कि रविवार 28 जनवरी 2025 को तेहरान में शांति से शुरु हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद से यह पहली बार आधिकारिक रूप से पुष्टि की गई मौत है. बता दें कि बासिज एक स्वयंसेवी अर्धसैनिक बल है जो ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ा हुआ है. यह इस्लामिक रिपब्लिक की आइडियोलॉजिकल ब्रांच है. स्टेट मीडिया की ओर से पिछले विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को दंगाई बताया गया था. सईद पौराली ने कहा,’ कोहदाश्त में प्रदर्शनों के दौरान पत्थरबाजी से 13 पुलिस अधिकारी और बासिज सदस्य घायल हो गए.’ 

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ईरान में बढ़ता विरोध प्रदर्शन 

ईरान में पहले यह विरोध प्रदर्शन तेहरान में शुरु हुए, जहां दुकानदारों ने हाई कॉस्ट ऑफ लिविगं और आर्थिक गतिरोध के खिलाफ हड़ताल की. इसके बाद मंगलवार 30 दिसंबर 2025 को कम से कम 10 यूनिवर्सिटी के छात्रों के शामिल होने के बाद यह आंदोलन बाकी शहरों में भी फैल गया. प्रदर्शनको लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने गुरुवार 1 जनवरी 2025 को सरकार से आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए जल्दी कार्रवाई करने का आह्वान किया. उन्होंने एक टीवी चैनल में कहा,’ इस्लामिक नजरिए से अगर हम लोगों की आजीविका के मुद्दे को हल नहीं करते हैं तो हम नरक में जाएंगे.’ 

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ईरान में आर्थिक संकट 

ईरान में प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कई पैंतरे अपनाए जा रहे हैं. पुलिस की ओर से कई जगहों पर आंसू गैस और बल का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा सरकार ने 18 प्रांतों में यूनिवर्सिटी और ऑफिस बंद कतरने का निर्देश भी दिया है, जिसे प्रदर्शन रोकने की कोशिश का साफ संकेत माना जा रहा है. बता दें कि तेहरान में इस संकट का कारण केवल इकोनॉमिक मिसमैनेजमेंट नहीं है. यहां जून साल 2025 में इजरायल-अमेरिका के साथ 12 दिन तक चली जंग ने ईरान की हालत काफी खराब की है. इसमें 1000 से अधिक लोग मारे गए और साथ ही ईरान के कई बुनियादी ढांचों और परमाणु ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है. इसके अलावा UN की ओर से ईरान पर 10 साल पहले हटाए गए इंटरनेशनल बैन को भी वापस लागू कर दिया है, जिससे वहां की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है.