
Iraq-Iran News: अमेरिका अपनी मनमानी की वजह से अपने सहयोगी देशों में ही अलग-थलग पड़ता जा रहा है. दूसरी तरफ ईरान की इस्लामिक सत्ता अपने लोगों के बीच अलग-थलग पड़ती जा रही है. दिन बीतने के साथ-साथ खामेनेई की हुकूमत का विरोध भी बढ़ता जा रहा है.यहां तक कि अब खलीफा के पुलिसवाले भी वर्दी उतारकर प्रदर्शनकारी बनने लगे हैं. पुलिस के विद्रोह से परेशान ईरान सरकार अब इराक़ी मिलिशिया के भरोसे है. लोगों के विद्रोह को कुचलने के लिए खलीफा ने पड़ोसी देश इराक से हथियारबंद भाड़े के सैनिक बुलाए हैं.खामेनेई के इस प्लान को डिकोड करने से पहले आपको ईरान के सबसे बड़े विद्रोह का अपडेट जानना चाहिए.
ईरान की सड़कों पर उतरी अवाम
सरकार को हटाने के लिए ईरान के लोगों का सड़कों पर उतरना जारी है. बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. ईरान के लगभग 100 शहरों में 300 ठिकानों पर ये प्रदर्शन चल रहे हैं. प्रदर्शनकारियों से एकजुटता जताने के लिए कई शहरों में बाज़ार पूरी तरह बंद हैं. लोगों को लग रहा है कि ये आख़िरी लड़ाई है और अगर अभी इस्लामिक सत्ता को उखाड़ नहीं पाए तो दूसरा मौक़ा नहीं मिलेगा. वो खामेनेई के सत्ता से बाहर करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं.
#DNAमित्रों | भाड़े के सैनिकों के सहारे खलीफा, खलीफा के पुलिसवाले..प्रदर्शनकारी बन गए?
ईरान में इराक की ‘प्राइवेट आर्मी’ क्यों उतरी?#DNA #DNAWithRahulSinha #Iran #Iraq #Protest @RahulSinhaTV pic.twitter.com/iKzmMkWhpi
— Zee News (@ZeeNews) January 7, 2026
2 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार
ईरान के 27 प्रांतों में 2 हजार से ज्यादा लोगों को प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि इसके बावजूद प्रदर्शन कम होने के बदले बढ़ता ही जा रहा है. लेकिन ईरान के अब्दानान शहर में जो हुआ वो खामेनेई सरकार के लिए खतरे का सबसे बड़ा इशारा है. यहां प्रदर्शन के दौरान पुलिस के जवान भी प्रदर्शनकारियों का साथ देते नज़र आए. जब प्रदर्शनकारी पुलिस स्टेशन के पास पहुंचे तो पुलिसकर्मियों ने छत पर चढ़कर सरकार विरोधी प्रदर्शन के लिए अपना समर्थन जताया.
सुरक्षाकर्मी छोड़ रहे खामेनेई का साथ
सोचिए जिन सुरक्षाकर्मियों के सहारे खामेनेई इस प्रदर्शन को कुचलने की उम्मीद लगा रहे हैं, अब वो भी साथ छोड़ रहे हैं. ये क्रांतिकारी बदलाव का संकेत है. अगर पुलिस या सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हो जाएं तो शासन बहुत कमजोर पड़ जाता है. ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान भी ऐसा हुआ था. लेकिन उस वक़्त सुरक्षाकर्मी इस्लामिक सत्ता लाने के साथ थे. इस बार वो विरोध में ख़ड़े हो रहे हैं.अब्दानान को पहला शहर माना जा रहा है जहां प्रदर्शनकारियों का कब्ज़ा हो गया है. अगर कुछ और शहरों में पुलिस का यही रुख़ रहा तो आंदोलन और मज़बूत हो सकता है.
