DNA Analysis: सबसे पहले आपको अमेरिका में ट्रंप के तख्तापलट की झांकी को समझना चाहिए. अमेरिका के कई शहरों में इस वक्त सड़क पर संग्राम हो रहा है. अमेरिका की आम जनता इस वक्त इतने गुस्से में है कि मरने मारने को तैयार है. अमेरिका के प्रदर्शन इतना उग्र हो गया है कि प्रदर्शनकारी अब हथियारबंद कमांडोज पर हमला कर रहे हैं. ट्रंप की स्पेशल फोर्स के कंमाडोज को घेर घेर कर पीटा जा रहा है. जिस होटल में ट्रंप की स्पेशल फोर्स के कमांडोज ठहरे हुए हैं. उसे चुन चुन कर निशाना बनाया जा रहा है.

उग्र भीड़ होटल के बाहर जमा होकर तोड़फोड़ कर रही है. अमेरिकी सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प की घटनाएं सामने आ रही हैं.हिंसा की ये घटनाएं अमेरिका में आम हो गई हैं. सड़कों पर लाखों की संख्या में लोग ट्रंप के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उतर आए है. ट्रंप के खिलाफ इस भीड़ को देखकर ही कहा जा रहा है कि ये ट्रंप के तख्तापलट का काउंटडाउन है. अमेरिका में पैदा हुए इस हालात को ईरान का एक्शन रिप्ले कहा जा रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि अमेरिका में बगावत की ये आग भड़की कैसे. इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको हमारा ये खबर बहुत गौर से समझनी चाहिए.

ट्रंप की फोर्स
कुल मिलाकर ईरान में जो बगावत की आग खामेनेई के खिलाफ भड़की है. ठीक वैसी ही आग आज अमेरिका में भी लगी है लेकिन इस आग की पहली चिंगारी कब और कहां से भड़की अब हम आपको वो बताने वाले हैं. ट्रंप ने दूसरी बार सत्ता की कमान संभालते ही देशभर में अप्रवासियों को गिरफ्तार करने का ऐलान किया और इसकी जिम्मेदारी दी गई ICE एजेंट्स को लेकिन ट्रंप ने जिस फोर्स को तैनात किया है उसका इतिहास बहुत दागदार रहा है.

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आईसीई का रिकॉर्ड
ICE को साल 2003 में 9/11 हमले के बाद तैयार किया गया था. इसका काम है बॉर्डर कंट्रोल और अवैध प्रवास को रोकना. लेकिन डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इसपर कई सवाल उठे. साल 2018 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ICE पर 1480 अमेरिकी नागरिकों को अप्रवासी बताकर गिरफ्तार करने का आरोप लगा. साल 2020 में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक ICE के डिटेंशन सेंटर में 440 यौन शोषण के मामले सामने आए. ट्रंप के पहले कार्यकाल में ICE की गिरफ्त में 50 से ज्यादा लोगों की जान गई है. 2025 में ICE के डिटेंशन सेंटर में 32 लोगों की मौत हो गई, जो एक दशक में सबसे ज्यादा है.

ट्रंप बचाव में उतरे
लेकिन 2026 में ICE एजेंट्स अब शक के बिनाह पर सरेआम लोगों को गोली मार रहे हैं. ट्रंप की इसी बेलगाम फोर्स की वजह से ट्रंप के तख्तापलट की मांग शुरू हो गई है. ट्रंप के खिलाफ लोगों का गुस्सा इसलिए भी भड़क रहा है क्योंकि एक आम अमेरिकी को गोलियों से भूनने के बावजूद ट्रंप ICE एजेंट्स की पैरवी कर रहे है. खुद तस्वीर जारी कर ये बता रहे हैं कि जिस शख्स को गोली मारी गई उसके पास गन मौजूद थी और आत्मरक्षा में गोली मारी गई. तस्वीरें देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि क्या सचमुच आत्मरक्षा में गोली चलाई गई. 

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बराक ओबामा विरोध में 
अमेरिका में ट्रंप की इस कमांडो टुकड़ी के आंतक के विरोध में अब पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा तक उतर आए हैं. ओबामा ने 37 वर्षीय एलेक्स प्रेटी की हत्या को दिल दहला देने वाली त्रासदी करार दिया है. कुल मिलाकर ट्रंप ने अप्रवासियों की गिरफ्तारी की आड़ में अमेरिका में अपने डेथ स्क्वाड यानी ICE एजेंट्स को खुली छूट दे दी है लेकिन ट्रंप का यही निर्णय उनकी सत्ता के लिए साढ़े साती साबित होगा.