
Iran crisis: ईरान में खलीफा ने ‘ऑपरेशन खातून’ लॉन्च किया है. इसमें खलीफा खामेनेई के निशाने पर वो महिलाएं हैं. जो खामेनेई की सत्ता के लिए खतरा बन सकती हैं. उनमें से एक है वो महिला जिसे दुनिया ने शांति का नोबेल पुरस्कार दिया है. ईरान में उसे खामेनेई और इस्लामिक शासन का विरोध करने के लिए 44 साल की सजा दी गई है. अगले कुछ घंटे ईरान, इजरायल और अमेरिका तीनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं. क्योंकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू अमेरिका के दौरे पर हैं. 24 घंटे के अंदर वॉशिंगटन में बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बड़ी बैठक होगी. जिसमें ईरान पर हमले की डेट तय हो सकती है. हालांकि वेस्ट एशिया से ईरान ने इस संभावित हमले का जवाब देने के लिए डबल लेयर वाली तैयारी की है.
‘दो महिलाओं से डरे खामेनेई’
ईरान में दो महिलाओं की गिरफ्तारी और सजा का विरोध पूरी दुनिया में हो रहा है. ये दोनों महिलाएं ईरान में दशकों से इस्लामिक शासन का विरोध कर रही थीं. इनमें से एक का नाम नरगिस मोहम्मदी है, जिन्हें 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया. ईरान में नरगिस को महिला आंदोलन की सबसे बड़ी आवाज़ बनने की सज़ा मिली. 2022–23 के ‘Woman, Life, Freedom’आंदोलन का उन्होंने खुला समर्थन किया था. ईरान की नैतिक पुलिस और हिजाब का विरोध किया. लेकिन ईरान के इस्लामिक शासन की नजर में महिला नेतृत्व को सबसे बड़े खतरे के तौर पर देखा जाता है. इसलिए नरगिस जेल में हैं.
अब तक नरगिस कुल 13 साल की सजा काट चुकी हैं. 2022 में वो कई साल बाद जमानत पर रिहा हुईं. तब उनकी दिल की सर्जरी की गई थी. उसके बाद वापस जेल भेजा गया. कुछ महीनों पहले इलाज के लिए फिर जमानत मिली थी. लेकिन इस्लामिक शासन के खिलाफ नए आंदोलन की शरुआत होते ही उनको फिर से गिरफ्तार कर लिया गया. अब अपने बयानों के लिए 7 साल की नई सजा सुना दी गई है.
नरगिस 90 के दशक से खामेनेई शासन का विरोध कर रही हैं. 44 साल की सज़ा सुनाए जाने के बावजूद उन्होंने कभी माफी नहीं मांगी, कभी बयान वापस नहीं लिया. आज उनका एक पुराना वीडियो बहुत वायरल हो रहा है. जब उनको इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था. तब काफी बीमार होने के बावजूद उन्होंने खुले बालों में सरकार विरोधी नारे लगाए.
नरगिस मोहम्मदी वुमेन, हमेशा लाइफ एंड फ्रीडम का नारा लगाती हैं. ये ईरान के 2022-2023 के बड़े विरोध आंदोलन का सबसे प्रसिद्ध स्लोगन है, जो हिजाब का विरोध कर रहीं महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुआ था. नरगिस कहती हैं कि आजादी हमारा हक है. ईरान में ऐसी मजबूत महिलाओं को इस्लामिक शासन का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है. इसलिए वो सलाखों के पीछे रहती हैं. इसलिए खामेनेई समर्थक छुटभैये नेता नरगिस मोहम्मदी को जेल में रखने की जगह तुरंत फांसी पर लटकाने की अपील कर रहे हैं.
दूसरी विपक्षी महिला नेता की गिरफ्तारी की आलोचना हो रही है, उनका नाम अजर मंसूरी है. अजर मंसूरी ईरान के सुधारवादी मोर्चा की प्रमुख हैं. ये संगठन ईरान में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, महिला और नागरिक अधिकार और सुप्रीम लीडर की शक्तियों पर संवैधानिक सीमाओं की वकालत करता है. ये उन ईरानी लोगों का समूह है, जो दुनिया से टकराव नहीं संवाद चाहते है.
खलीफा की नई लिस्ट
ईरान में पूर्व उप विदेश मंत्री मोहसेन अमीनजादेह को भी मंगलवार रात गिरफ्तार किया गया. सुधारवादी नेता अमीनजादेह पश्चिमी देशों से संवाद और परमाणु समझौते के समर्थक हैं. इन पर विदेशी ताकतों से सांठगांठ का आरोप लगाया गया है. इसके लिए ईरान में इनको उम्र कैद या मौत की सजा दी जा सकती है. विपक्षी नेता इब्राहिम असगरजादेह को भी सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार कर लिया. 1979 में क्रांति के दौरान इब्राहिम अमेरिकी दूतावास पर कब्जा करने वाले छात्र नेताओं में शामिल थे. बाद में इब्राहिम ने इस्लामी शासन की सख़्ती की आलोचना करनी शुरू कर दी. उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे व्यवस्था के भीतर बदलाव चाहते थे. ईरान के सुधारवादी मोर्चे के सेक्रेटरी-जनरल जवाद इमाम को भी गिरफ्तार किया गया है. ये मीडिया में सरकार की नीतियों के मुखर आलोचक थे. जवाद शांतिपूर्ण सुधार और चुनावी राजनीति के समर्थक हैं. इनको भी इस्लामिक शासन का विरोध भारी पड़ा.
पिछले एक दशक में ईरान में 3 बड़े विरोध प्रदर्शन हुए.
2019–20 के पेट्रोल और आर्थिक आंदोलन में 7,000 लोग गिरफ्तार किए गए, जिनमें 1,000 महिलाएं थीं.
2022–23 में महसा अमीनी की मौत के बाद Woman–Life–Freedom में 20,000 गिरफ्तारियाँ हुईं, जिनमें 7,000 महिलाएं थीं.
2025–26 के सरकार विरोधी आंदोलन में करीब 26,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसमें महिलाओं की संख्या 8,000 रही.
2022-25 के बीच के चार सालों में ईरान के अंदर लगभग 3,400 लोगों को फांसी भी दी गई है.
जबकि 1979 यानी इस्लामिक क्रांति से अब तक ईरान में कम से कम 31,000 लोगों को फांसी दी गई है, जिनके नाम दस्तावेजों में दर्ज हैं. असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है. ये आंकड़े बताते हैं कि ईरान का इस्लामिक शासन किसी भी आंदोलन को बुरी तरह कुचलने के लिए कुख्यात है. यानी खलीफा को विरोध में उठने वाली शांतिप्रिय आवाजें भी पसंद नहीं आतीं. वैसे ईरान का इस्लामी शासन महिलाओं को आजादी दे या ना दे. लेकिन सलाखों के पीछे डालने में वो महिलाओं से कोई भेदभाव नहीं करता. ईरान का इस्लामिक शासन, महिलाओं को अपने लिए पुरुषों से बड़ा खतरा मानता है.
एक तरफ ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता देश के अंदर अपने विरोधियों को चुन चुन कर सलाखों के पीछे डाल रहे हैं. दूसरी तरफ ईरान को अपने परमाणु केंद्रों की चिंता भी सता रही है. ईरान को डर है अगर अमेरिका ने हमला किया तो सबसे पहले उसके परमाणु केंद्र निशाने पर होंगे. इसीलिए अब ईरान अपने परमाणु केंद्रों को सील कर रहा है. ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र की सैटेलाइट इमेज से इस बात का खुलासा हुआ है.
ईरान, इस्फहान परमाणु केंद्र की सुरंगों और एंट्री गेट को कंक्रीट और मिट्टी से बंद कर रहा है. ताकि अंदर तक पहुंचना मुश्किल हो जाए.
ईरान की कोशिश है कि अमेरिका के लिए हवाई हमला करना और स्पेशल फोर्स ऑपरेशन से साइट के अंदर घुसना आसान न रहे. इस तरह सुरंगों और गेट को सील करने से बमबारी होने पर नुकसान कम होगा और अंदर रखा यूरेनियम सुरक्षित रह सकता है. ईरान के इस परमाणु केंद्र में यूरेनियम ऑक्साइड को गैस में बदला जाता है. यही गैस आगे नतांज़ और फोर्डो जैसे प्लांट्स में भेजी जाती है, जहां यूरेनियम का संवर्धन होता है. इस्फहान में ईंधन निर्माण, रिसर्च और स्टोरेज से जुड़ी इकाइयां मौजूद हैं. यहां पिछले हमले में भी बम बरसे थे.
इजरायल ने अमेरिकी अधिकारियों से साफ साफ कह दिया है. ईरान अगर इजरायल की तय की गई बैलिस्टिक मिसाइल ‘रेड लाइन’ को पार करता है तो इजरायल जरूर हमला करेगा. इजरायल इस मुद्दे पर इतना आक्रामक है कि उसने अमेरिका की भागीदारी के बिना भी ईरान पर सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर ली है. इजरायल ने ईरान से समझौते के लिए जो शर्त रखी है. उसमें भी ईरान को सिर्फ 300 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलें रखने की छूट दी है. जिसे ईरान मानने को तैयार नहीं. इजरायली इंटेलिजेंस के मुताबिक ईरान हर महीने 300 बैलिस्टिक मिसाइल बना रहा है. इस हिसाब से हर साल 3,600 मिसाइलें बनेंगी. यानी ईरान भी इस बार लंबे युद्ध के लिए तैयार है.
यानी दोनों देशों के बीच बात नहीं बनने वाली. इस बीच इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू वॉशिंगटन के दौरे पर जा रहे हैं. इस दौरे से पहले ही वेस्ट एशिया में इतिहास के सबसे अधिक हथियार इकट्ठे किए जा चुके हैं. अमेरिका पहुंचने से पहले इजरायल के प्रधानमंत्री ने कड़ा संदेश दिया है.
