
Court order required for vote recount- EC Anwarul: बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के नतीजे आने के बाद सियासत थमने का नाम नहीं ले रही.चुनाव परिणाम घोषित होने के कुछ ही दिनों बाद जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन ने बड़ा आरोप लगाया है.उनका कहना है कि 32 संसदीय सीटों पर चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई और उनके उम्मीदवारों को जबरदस्ती हराया गया. गठबंधन ने चुनाव आयोग से इन सीटों पर वोटों की दोबारा गिनती कराने की मांग की है, जिससे देश में राजनीतिक बहस और तेज हो गई है.
कोर्ट के आदेश के बिना नहीं होगी मतगणना
इस पूरे विवाद पर बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने अपना रुख साफ कर दिया है.चुनाव आयुक्त Anwarul Islam Sarker ने कहा कि आयोग तभी वोटों की दोबारा गिनती पर विचार करेगा, जब अदालत से स्पष्ट आदेश मिलेगा. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि किसी भी पक्ष को अगर चुनाव परिणाम पर आपत्ति है तो वह कानूनी रास्ता अपना सकता है.यानी अब गेंद पूरी तरह कोर्ट के पाले में है.
गजट जारी होने के बाद बढ़ी मुश्किल
चुनाव आयोग यानी Bangladesh Election Commission का कहना है कि चुनाव परिणाम का आधिकारिक गजट पहले ही प्रकाशित हो चुका है. ऐसे में मौजूदा चरण में सीधे री-काउंट संभव नहीं है. विपक्ष ने आरोप लगाया कि गजट जल्दबाजी में जारी किया गया, लेकिन आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया कानून के तहत तय समय पर पूरी की गई.
गठबंधन का दावा- नतीजे बदले जा सकते हैं
जमात-ए-इस्लामी गठबंधन का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच और दोबारा मतगणना हुई तो कई सीटों के परिणाम बदल सकते हैं.उनका आरोप है कि मतदान और मतगणना दोनों चरणों में अनियमितताएं हुईं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर अदालत हस्तक्षेप करती है तो कुछ सीटों पर बड़ा उलटफेर संभव हो सकता है.
चुनाव आयोग का पलटवार- चुनाव रहा निष्पक्ष
आयोग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और तटस्थ तरीके से कराया गया.आयोग के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी रही और परिणाम जनता के जनादेश को दर्शाते हैं. चुनाव खत्म होने के बावजूद सियासी तनाव लगातार बढ़ रहा है.अब पूरे देश की नजर अदालत के फैसले पर है. क्या वोटों की दोबारा गिनती होगी या घोषित नतीजे ही अंतिम माने जाएंगे.

