
Iran-US Conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर 2025 में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपनी मुलाकात के दौरान आश्वासन दिया था कि अगर अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर उसके साथ कोई समझौता नहीं कर पाता है तो वह ईरान पर इजरायल के हमलों का समर्थन करेगा. अमेरिकी न्यूज मीडिया ‘CBS’ न्यूज के मुताबिक इस बैठक के 2 महीने बाद अमेरिकी सेना के सीनियर ऑफिसर्स और इंटेलिजेंस कम्युनिटी के बीच ईरान पर इजरायली हमले की संभावनाओं का आकलन करने के लिए चर्चा शुरू हो गई थी.
इजरायल की मांग
अमेरिका और इजरायल दोनों देश ईरान के न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम के खिलाफ एक समान रुख अपनाते हैं. सोमवार 16 फरवरी 2026 को नेतन्याहू ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में इजरायल के रुख की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में नयूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से नष्ट करना शामिल होना चाहिए. उन्होंने कहा,’ अगर कोई समझौता होना है तो उसमें कई महत्वपूर्ण चीजें शामिल होनी चाहिए. पहली यह कि सभी संवर्धित सामग्री ईरान से बाहर जानी चाहिए. दूसरा यह कि संवर्धन क्षमता का कोई अस्तित्व नहीं होना चाहिए. संवर्धन प्रक्रिया को रोकना नहीं, बल्कि उन टूल्स और बुनियादी ढांचे को नष्ट करना जो संवर्धन की अनुमति देते हैं.’
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इजरायल की कैसे मदद करेगा अमेरिका?
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु ढांचे को नष्ट करना शामिल होना चाहिए न कि केवल संवर्धन प्रक्रिया को रोकना. उन्होंने कहा,’ अगर कोई समझौता होना है, तो उसमें यह शामिल होना चाहिए.’ रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका इजरायल की गतिविधियों में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करेगा. इसके बदले वॉशिंगटन इजरायल के लिए हवा में फ्यूल भरने में मदद करेगा और इजरायल के संभावित मार्गों पर स्थित देशों से उड़ान भरने की अनुमति देगा. ऐसा इसलिए क्योंकि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन समेत खाड़ी देशों ने सार्वजनिक रूप से ईरान पर किसी भी हमले के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एयर स्पेस को उपलब्ध कराने से इनकार किया है. इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा देश हमले और फ्यूल भरने के मकसद के लिए एयर स्पेस उपलब्ध कराएगा.
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ईरान पर दबाव डाल रहा अमेरिका
बता दें कि यह सब ऐसे वक्त पर देखने को मिला है जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रविवार 15 फरवरी 2026 को अमेरिका के साथ इस हफ्ते के अंत में होने वाली वार्ता के दूसरे दौर के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हुए हैं. अमेरिका ने दबाव बनाए रखते हुए ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाया है. इसके साथ ही ईरानी तेल निर्यात से जुड़ी शिपिंग कंपनियों और जहाजों को टारगेट करते हुए बैन भी लगाया है. ईरान ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह यूरेनियम संवर्धन नहीं छोड़ेगा. इसको लेकर अराघची ने 8 फरवरी 2026 को कहा था कि ईरान अपने उस न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए बेहद भारी कीमत चुकाई है, जिसे वह शांतिपूर्ण बताता है.

