Venezuela News: बीते कुछ हफ्तों में वेनेजुएला की राजनीति में आए बदलावों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. वेनेजुएला की सत्ता पर एक दिशक से अधिक काबिज निकोलस मादुरो अब न्यूयॉर्क की जेल में ड्रग तस्करी के आरोपों का सामना कर रहे हैं. वहीं अमेरिकी विशेष बलों द्वारा किए गए एक गुप्त ऑपरेशन के बाद मादुरो को हटा दिया गया. लेकिन अब सवाल ये है कि वेनेजुएला से मादुरो की विदाई का मतलब लोकतंत्र की शुरुआत या सत्ता का नया चेहरा है?
लोकतांत्रिक बदलाव या सत्ता का नया रूप?
वेनेजुएला से मादुरो के जाने के बाद उप-राष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिग्ज कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कमान संभाली. अमेरिका ने भी इस बदलाव का स्वीकारा और ट्रंप प्रशासन रॉड्रिग्ज के साथ सहयोग भी कर रहा. लेकिन वेनेजुएला की राजनीति को गहराई से देखने वाले आलोचकों का मानना है कि ये बदलाव केवल चेहरा बदलने जैसा है. शासन की पुरानी संरचना और सुरक्षा तंत्र अभी भी वैसी ही है. अभी तक चुनाव की कोई स्पष्ट तारीख घोषित नहीं की गई, जिससे यह डर बना हुआ है कि क्या असल में यह एक लोकतांत्रिक बदलाव है या केवल सत्ता का नया रूप?
अर्थव्यवस्था और तेल क्षेत्र में बड़े बदलवा
वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार उसका तेल भंडार है. ऐसे में मादुरो के जाने से अर्थव्यवस्था और तेल क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं. नए प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए तेल क्षेत्र का निजीकरण शुरू कर दिया है. नए कानूनों के तहत निजी कंपनियां भी अप स्वतंत्र रूप से तेल निकाल सकेंगी, जो कि पहले सरकारी कंपनी PDVSA के नियंत्रण में था. वहीं अमेरिका भी अपने तेल निवेश को वेनेजुएला में वापस लाने के लिए काफी उत्सुक है. भारत जैसे देशों के लिए भी यह खबर जरूरी है, क्योंकि वेनेजुएला कच्चे तेल का एक बड़ा स्रोत रहा है.
अमेरिका के साथ बदले रिश्ते
मादुरो के समय में अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्ता बेहद खराब थे. लेकिन सरकार बदलने से अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अमेरिका ने काराकस में अपना दूतावास फिर से खोल दिया है और राजनयिक संबंध बहाल हो रहे हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने रॉड्रिग्ज प्रशासन को 10 में से 10 अंक दिए है. लेकिन इसी के साथ चेतावनी भी दी है कि अगर तेल समझौतों पर काम नहीं हुआ, तो उनका हाल भी मादुरो जैसा ही होगा.
