Amrit Wilson OCI card controversy: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से यूके में रहने वाली लेखिका और पत्रकार अमृत विल्सन की ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) का रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब देने को कहा है. मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि हमें इतना सहिष्णु भी नहीं बनना चाहिए कि हम अपने ही देश की इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर बुराई या बदनामी होने दें.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि विल्सन के खिलाफ IB की रिपोर्ट्स थीं, जिसमें उन पर भारत विरोध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था. ऐसे में विल्सन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील त्रिदीप पैस ने कहा कि अमृत विल्सन का ओसीआई कार्ड कैंसिल करने वाला शो कॉज नोटिस बिना किसी पर्याप्त डिटेल के था. वहीं, वरिष्ठ वकील ने भारत विरोधी गतिविधि में उनके शामिल होने के आरोपों का भी बचाव किया है.
OCI कार्ड कैंसिल होने को विल्सन ने बताया गलत
इस सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने न्यायायल को एक सीलबंद लिफाफा सौंपा. माना जा रहा है कि इस लिफाफा में विल्सन के OCI कार्ड होने की वजहों का वर्णन था. अब इस मामले में अगस्त में सुनवाई होगी और केंद्र सरकार को इससे पहले अपनी दलीलें दाखिल करनी होंगी. जानकारी के अनुसार, जानीमानी पत्रकार अमृत विल्सन ने 17 मार्च 2023 को लंदन में भारतीय हाई कमीशन के पास किए गए ऑर्डर को रद्द करने की मांग की है. विल्सन ने कहा कि उनका ये कार्ड रद्द करना पहली नजर में ही गैरकानूनी है.
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क्या है पूरा मामला?
उल्लेखनीय है कि भारतीय उच्चायोग ने साल 2022 में अमृत विल्सन को कारण बताओं नोटिस जारी किया था. इसमें उन पर भारत सरकार के खिलाफ नुकसान पहुंचाने वाले प्रोपेगैंडा में शामिल होने और कई भारत विरोधी गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगा था. इसके बाद अमृत विल्सन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की. इस याचिका में दावा किया गया है कि इस नोटिस का जवाब वह नहीं दे पाईं और कारण उनका OCI कार्ड रद्द कर दिया गया. याचिका में यह भी बताया गया कि एक लेखिका और पत्रकार होने के कारण मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर भारत सरकार समेत अलग-अलग सरकारों के एक्शन पर कमेंट करना उनकी ड्यूटी है.
