
ईरान की नजर अमेरिका की एक एक गतिविधि पर है . ओमान और जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच कई राउंड की वार्ता हो चुकी है . लेकिन अमेरिका की कड़ी शर्तों के सामने ईरान झुकने को तैयार नहीं है . इसलिए ईरान और अमेरिका की वार्ता को असफल माना जा रहा है. इससे ईरान पर हमले की आशंका और बढ़ गई है . इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले का फैसला करना है. इस संभावित फैसले का संकेत ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने दे दिया है . ट्रंप ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप पर ब्रिटेन को चेतावनी दी है . ब्रिटेन इस द्वीप को लीज़ पर मलेशिया को देने की तैयारी कर रहा है लेकिन यूएस प्रेसिडेंट ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से ऐसा नहीं करने के लिए कहा है . आज आपको इसकी वजह भी जाननी चाहिए..जो खुद डॉनल्ड ट्रंप ने बताई है . उन्होंने कीर स्टार्मर से साफ-साफ शब्दों में कहा है..
अगर ईरान डील न करने का फैसला करता है, तो यूनाइटेड स्टेट्स के लिए डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड में मौजूद एयरफील्ड का इस्तेमाल करना ज़रूरी हो सकता है, ताकि एक बहुत अस्थिर और खतरनाक सरकार के संभावित हमले को खत्म किया जा सके – एक ऐसा हमला जो संभावित रूप से यूनाइटेड किंगडम के साथ-साथ दूसरे दोस्त देशों पर भी किया जा सकता है. प्राइम मिनिस्टर स्टारमर को, किसी भी वजह से, डिएगो गार्सिया पर कंट्रोल नहीं खोना चाहिए.
48 घंटों में हो सकता है ईरान पर अमेरिका का हमला
डॉनल्ड ट्रंप..ईरान पर हमले की तैयारी की इससे बड़ी क्या चेतावनी दे सकते हैं . ट्रंप सीधे सीधे अपने सहयोगियों को बता रहे हैं..ईरान पर हमला कहां कहां से होगा..किस तरह से होगा..आज आपको भी जानना चाहिए..जिस वक्त ईरान पर हमला 48 घंटे के अंदर तय माना जा रहा है . उस वक्त डॉनल्ड ट्रंप डिएगो गार्सिया को लेकर इतने चिंतित क्यों है. हिंद महासागर का छोटा सा द्वीप डिएगो गार्सिया कागज में ब्रिटेन के नियंत्रण मे है…लेकिन यहां पर एक बड़ा अमेरिकी सैन्य बेस मौजूद है . अमेरिका ने यहां बहुत लंबा रनवे बनाया है, जहां बड़े बमवर्षक और कार्गो विमान उतर सकते हैं.
डिएगो गार्सिया गहरा समुद्री बंदरगाह है..जहां बड़े युद्धपोत और पनडुब्बियां रुक सकती हैं.
अमेरिका ने यहां पर ईंधन, हथियार और सैन्य सामान का बड़ा भंडार रखा है .
यानी यहां से अमेरिकी जहाज़ों और विमानों को ईंधन और हथियार मिल सकते हैं.
अमेरिका ने बी-2 और बी-52 बॉम्बर यहां पर तैनात कर रखे हैं . और ईरान पर हमले की स्थिति में ट्रंप के बॉम्बर भी डिएगो गार्सिया से उड़ान पर भरकर तेहरान में धमाके करेंगे .
अमेरिका के कई बॉम्बर तैनात
अमेरिका के बी-2 और बी-52 बॉम्बर की तैनाती इस बेस को सबसे महत्वपूर्ण बनाती है . डिएगो गार्सिया से B-2 बाम्बर उड़ान भर सकता है . इसकी उड़ान क्षमता 40 घंटे से ज्यादा है . एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के साथ ये ईरान पर एक बार फिर से 30,000 पाउंड के GBU-57 बम गिरा सकता है . स्टेल्थ तकनीक के कारण इसे रडार पर पकड़ना कठिन माना जाता है . Diego Garcia से Tehran की दूरी लगभग 4,000 किलोमीटर है . अमेरिका का B-52 बॉम्बर भी एक बार में 14 हजार किलोमीटर तक हमला कर सकता है . एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के साथ उनकी ऑपरेशनल क्षमता बढ़ जाती है . यानी B-52 बॉम्बर भी यहां से ईरान पर हमला कर सकता है . इस बेस में अमेरिका 6 B-2 बाम्बर और 4 B-52 बॉम्बर मौजूद हैं . अगर सऊदी अरब और कतर जैसे देश अमेरिका को एयर स्पेस या बेस देने से इंकार करते हैं . तो ये बेस अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण हो जाएगा.
ईरान को अंदाजा है कि हमला किसी भी वक्त शुरू हो सकता है
ईरान भी अपने खिलाफ हमले की तैयारियों को बहुत ध्यान से देख रहा है . ईरान को भी इस बात का अंदाजा है..उस पर किसी भी वक्त हमला हो सकता है . और इसीलिए ईरान अपने संवेदनशील परमाणु और सैन्य ठिकानों को सुरक्षित करने में जुट गया है. सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा है कि ईरान के कुछ सैन्य और परमाणु ठिकानों को कंक्रीट और मिट्टी से ढका जा रहा है. इन जगहों को मजबूत बंकर में बदला जा रहा है ताकि इन्हें…हवाई हमलों से बचाया जा सके. जिन ठिकानों पर पहले इजरायल और अमेरिका हमला कर चुके थे, वहां सुरक्षा और निर्माण कार्य तेज कर दिया गया है. पारचिन सैन्य परिसर में ‘तालेघन-2’ नाम की नई इकाई को भी मिट्टी से ढका जा रहा है. यानी ईरान चाहता है कि अमेरिकी हमले में उसका कम से कम नुकसान हो .
अरब सागर में तैनात है अमेरिका का गल्फ ऑफ ओमान
आज ईरान को अमेरिका के संभावित हमले के खिलाफ एक बड़ा सहारा भी मिला है . अमेरिका की नेवी..गल्फ ऑफ ओमान और अरब सागर में तैनात है . और आज रूस ने इसी इलाके में ईरान के साथ नौसैनिक युद्धाभ्यास किया है . जब किसी भी वक्त युद्ध शुरू होने का खतरा मंडरा रहा है तब, रूस का ईरान के साथ युद्धाभ्यास बताता है कि वो ईरान को बिल्कुल अकेला नहीं छोड़ेगा . इस युद्धाभ्यास में चीन को भी शामिल होना था . लेकिन चीन ने अपने युद्धपोतों को इस युद्धाभ्यास में नहीं भेजा . यानी ईरान को ऐन वक्त पर धोखा दे दिया . अमेरिका ने इस युद्धाभ्यास को लेकर ईरान को चेतावनी भी दी थी . लेकिन इसके बावजूद..अमेरिकी युद्धपोतों से कुछ ही दूरी पर तेहरान..नौसैनिक युद्धाभ्यास कर रहा है . ये कदम बताता है, कि ईरान…अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करेगा.
दुनिया में जंग बढ़ने के साथ बढ़ते हैं तेल और सोने के दाम
दुनिया में जब भी जंग की आशंका बढ़ती है..तेल और सोने के दाम अचानक बढ़ने लगते हैं. इस बार भी यही हो रहा है. दुनिया भर में क्रूड आयल और सोने के दाम फिर से बढ़ रहे हैं . इससे अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का अंदेशा और बढ़ गया है . शनिवार तक ईरान पर हमले की खबर के बाद सोने की कीमत अमेरिका में साढ़े 5 हजार डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई. यह एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है. अमेरिका में सोना कभी इतना महंगा नहीं हुआ . भारत में भी सोने की कीमत 3 हजार रुपये बढ़कर एक लाख 55 हजार रुपये हो गई है.
सोने का भाव भी बढ़ा रहा अमेरिका यूएस में तनाव
17 फरवरी 2026 को जिनेवा में परमाणु बातचीत में कोई ठोस प्रगति न होने की खबर के बाद सोना लगभग 2% ऊपर गया . यानी बाजार इसे राजनीतिक और आर्थिक जोखिम का संकेत मान रहा है, इसलिए निवेशक सुरक्षित संपत्ति यानी सोने की ओर भाग रहे हैं. इसके अलावा तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं . ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है . इसकी वजह भी ईरान और अमेरिका में बढ़ रहा तनाव है . स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से रोज लगभग 20% वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है..इसीलिए अगर तनाव बढ़ा तो तेल की सप्लाई और कीमतों पर इसका सीधा असर होगा. और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा.
