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इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय

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बाधाओं को पार किया: बहुभाषी एआई लोकतांत्रिक पहुंच के सेतु के रूप में कार्य कर रहा है


व्यक्तिगत, स्थानीय, बहुभाषी: नई दिल्ली में लोकतांत्रिक एआई के नए विजन का उदय

एज पर एआई: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में गोपनीयता-संरक्षित बहुभाषी उपकरण को प्रदर्शित किया गया

वैश्विक नेताओं ने सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ और नागरिक-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आह्वान किया

एआई भाषिणी जैसी पहलों से समावेशी डिजिटल भविष्य की ताकत बना है

प्रविष्टि तिथि: 20 FEB 2026 8:35PM by PIB Delhi

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में आयोजित सत्र “सभी के लिए एआई: व्यक्तिगत, स्थानीय और बहुभाषी एआई की आवश्यकता” विषय पर आयोजित सत्र में दिखाया गया कि कैसे भाषा प्रौद्योगिकी, खुले बुनियादी ढांचे और वैश्विक भागीदारी के माध्यम से कनेक्टिविटी, साक्षरता या भाषाई पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना प्रत्येक नागरिक तक एआई की पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है।

सत्र की शुरुआत ‘करंट एआई‘ और भाषिणी द्वारा एक लाइव डेमो से हुई, जिसमें एक हैंडहेल्ड (हाथ में पकड़े जाने वाले), गोपनीयता–संरक्षित बहुभाषी एआई उपकरण पेश किया गया जो न्यूनतम या शून्य इंटरनेट कनेक्टिविटी पर स्थानीय स्तर पर काम कर सकता है। इस प्रदर्शन में दिखाया गया कि भाषण की पहचान, अनुवाद और विज़न मॉडल एक साथ “एज” पर संचालित हो सकते हैं, जिससे उपयोगकर्ता अपनी मातृभाषा में एआई से संवाद कर सकते हैं और डेटा गोपनीयता भी सुरक्षित रह सकता है। इसने रेखांकित किया कि इंटरऑपरेबल और ऑफलाइन–सक्षम सिस्टम एआई को अंतिम छोर तक (ग्रामीण क्षेत्रों और कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों) तक पहुंचा सकते हैं।

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सांस्कृतिक रूप से मजबूत और नागरिक-केंद्रित एआई पर केंद्रित एक संवाद में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री अभिषेक सिंह और फ्रांस सरकार की एआई विशेष दूत ऐन बौवेरोट शामिल हुए।

श्री अभिषेक सिंह ने परिणाम-उन्मुख नवाचार पर जोर देते हुए कहा, “जब हम तकनीक को देखते हैं… तो अंतिम उद्देश्य मॉडल, हार्डवेयर, जीपीयू या डेटा प्लेटफॉर्म नहीं है; अंतिम उद्देश्य वह मूल्य (value) है जो यह नागरिकों और व्यवसायों के लिए पैदा करता है।” उन्होंने कहा कि एआई तब बदलावकारी बनता है जब इंटरनेट या डिजिटल साक्षरता के बिना भी व्यक्ति अपनी भाषा में डिवाइस यानि उपकरण से बात कर सार्थक उत्तर पा सके। उन्होंने पारंपरिक और सामुदायिक ज्ञान को एआई प्रशिक्षण डेटा का हिस्सा बनाने तथा सार्वजनिक हित, गोपनीयता और निष्पक्षता के संतुलन वाले डेटा-साझाकरण ढांचे की जरूरत पर बल दिया।

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ऐन बौवेरोट ने एआई प्रणालियों में सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “एआई दुनिया को कुछ प्रभावशाली सांस्कृतिक मॉडलों तक सीमित नहीं कर सकता। जब हम एआई से संवाद करें, तो हमें अपनी पहचान और समुदायों का प्रतिबिंब उसमें दिखना चाहिए।” उन्होंने ऐसे विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय ढांचे का आह्वान किया जो रचनाकारों की सुरक्षा और सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखते हुए जिम्मेदार डेटा शेयरिंग को सक्षम बनाए। उन्होंने कहा कि “कोई भी देश अकेले संपूर्ण एआई इकोसिस्टम नहीं बना सकता।”

‘कलपा इम्पैक्ट‘ के सुशांत कुमार द्वारा संचालित एक अन्य चर्चा में ‘करंट एआई‘ की सीईओ आया बदीर और ‘भाषिणी के सीईओ श्री अमिताभ नाग ने बहुभाषी एआई को समावेशी डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डीपीआई) की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया।

आया बदीर ने मौजूदा एआई को “पेरिस एआई समिट से जन्मी एक सार्वजनिक-निजी भागीदारी” बताया, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक हित के लिए एआई बनाना है। उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य “वैश्विक समुदाय को एकजुट कर ओपन एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर का सहयोगात्मक निर्माण करना” है। उन्होंने जोर देकर कहा, “यदि तकनीक हमारे द्वारा निर्मित नहीं है, तो वह हमारे लिए नहीं है।” और भाषाई व सांस्कृतिक विविधता को एआई के आरंभिक डिजाइन में शामिल करने की आवश्यकता बताई।

अमिताभ नाग ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे बहुभाषी वास्तविकताओं ने भाषिणी के मिशन को आकार दिया है।  उन्होंने कहा, “हम सभी अपनी मातृभाषा से शुरुआत करते हैं, फिर औपचारिक तंत्र में अनेक भाषाओं की आवश्यकता होती है।” भारतीय भाषाओं में सीमित डिजिटल डेटा की चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि व्यापक डेटा संग्रह और क्षेत्रीय सहयोग से उपयोगी मॉडल विकसित किए गए। उन्होंने कहा, “आज, तैनाती और निरंतर सीखने के बाद, हम प्रतिदिन लगभग 15 मिलियन इन्फेरेंस चला रहे हैं।” उनका स्पष्ट संदेश था: “कोई भाषा पीछे न छूटे, और कोई नागरिक भी पीछे न छूटे।”

इस सत्र ने एक साझा दृष्टिकोण पेश किया: बहुभाषी, सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ एआई, जो खुले बुनियादी ढांचे और निजता-सुरक्षित डिजाइन द्वारा संचालित हो, लोकतांत्रिक पहुंच के लिए एक सेतु का काम कर सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि तकनीकी प्रगति विविधता को मिटाने के बजाय उसे और मजबूत करे।

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पीके/ केसी/ केजे

(रिलीज़ आईडी: 2230986) आगंतुक पटल : 11

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