Trump Tariff: एक बार अपनी स्पीच में किसी ने कहा था कि दुनिया में अगर कहीं भी सर्वश्रेष्ठ इंजीनियर, सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर की चर्चा होती है तो 10 लोगों में से तो 7 लोग भारतवंशी ही होते हैं. अब टैरिफ को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा झटका लगा है. अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है. इस टैरिफ को रद्द करवाने में जिसने अहम भूमिका निभाई जिसने ट्रंप के टैरिफ को कानूनी चुनौती दी उसका ताल्लुक भारत से रहा है. इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे भारतीय मूल के नील कत्याल हैं, जिनकी दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने अमल किया. आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार के साथ.
अदालत के सामने रखा पक्ष
भारतीय मूल के अमेरिका के पूर्व एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल कत्याल ने ट्रंप के 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के इस्तेमाल के खिलाफ तर्क दिया और इसे गलत, गैर-संवैधानिक टैक्स बताया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसी दलीलें दी की सुप्रीम कोर्ट को उसे मानना ही पड़ा और फिर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुना दिया. दलीलों के बाद अदालत ने पाया कि अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) नाम के कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है.
क्या बोले नील कत्याल?
इस फैसले के बाद नील कत्याल ने कहा कि US सुप्रीम कोर्ट ने हमारे लीगल केस में हमें वह सब कुछ दिया जो हमने मांगा था, यह केस हमेशा प्रेसिडेंसी के बारे में रहा है, किसी एक प्रेसिडेंट के बारे में नहीं, यह हमेशा पावर्स के बंटवारे के बारे में रहा है, न कि उस समय की पॉलिटिक्स के बारे में. आगे कहा कि मैं कोर्ट जाकर यह कह सका कि यह प्रेसिडेंट गैर-कानूनी तरीके से काम कर रहा है. मैं अपना केस पेश कर सका, उनसे बहुत मुश्किल सवाल पूछे और आखिर में उन्होंने वोट दिया और हम जीत गए. यह इस देश के बारे में कुछ खास बात है.
कौन हैं नील कत्याल ?
शिकागो में भारतीय इमिग्रेंट माता-पिता के घर जन्मे, डॉक्टर और इंजीनियर, कत्याल ने अपने करियर का ज्यादातर समय बड़े संवैधानिक झगड़ों के सेंटर में बिताया है. उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से ग्रेजुएशन किया और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस स्टीफन ब्रेयर के लिए क्लर्क का काम किया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 2010 में प्रेसिडेंट बराक ओबामा ने उन्हें एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल अपॉइंट किया, जिससे वे फेडरल गवर्नमेंट के टॉप कोर्टरूम एडवोकेट बन गए. इन सालों में कत्याल ने सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा केस लड़े हैं. साथ ही साथ देश के सबसे जाने-माने अपीलेट वकीलों में से एक के तौर पर पहचान बनाई है. फिलहाल वो अभी मिलबैंक LLP में पार्टनर और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में प्रोफेसर हैं.
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