Hindu Rashtra Debate: अभिनेता अन्नू कपूर ने हिंदू राष्ट्र की बहस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जब दुनिया में ईसाई, मुस्लिम और बौद्ध राष्ट्र मौजूद हैं, तो हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर सवाल क्यों उठाया जाता है. मीडिया से बातचीत में अन्नू कपूर ने कहा कि विभिन्न धर्मों के आधार पर कई देशों की पहचान स्थापित है. ऐसे में भारत में हिंदू राष्ट्र की चर्चा को असामान्य या विवादास्पद बताना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि इस विषय पर खुली और तार्किक बहस होनी चाहिए.
अभिनेता ने यह भी कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति हजारों वर्षों पुरानी है और इसकी जड़ें सनातन परंपरा में हैं. उनके मुताबिक, किसी भी विचार पर चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और उसे केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. अन्नू कपूर के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने भारत के संवैधानिक ढांचे और धर्मनिरपेक्ष चरित्र का हवाला देते हुए असहमति जताई है.
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: On National Song Vande Mataram Row, Actor Annu Kapoor says, “… It is a great decision by the government. I have been chanting and singing Vande Mataram for over 32 years. If you ever see someone on the US West Coast or in New Jersey humming Vande… pic.twitter.com/3OI3lt9FoY
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— ANI (@ANI) February 20, 2026
‘वंदे मातरम’ की नई गाइडलाइंस के समर्थन में बोले अन्नू कपूर
इस बीच, अभिनेता अनु कपूर ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस पर भी खुलकर बात की. अभिनेता अनु कपूर ने इसे अद्भुत और शानदार निर्णय बताया. उन्होंने कहा कि वह पिछले 32 वर्षों से ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करते आ रहे हैं. कपूर ने दावा किया कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी ‘वंदे मातरम’ के अभिवादन को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका रही है.
वंदे मातरम राष्ट्र की आत्मा का प्रतीक: अन्नू कपूर
अभिनेता ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का प्रतीक है. उन्होंने गीत के शब्द ‘सुजलाम सुफलाम’ की व्याख्या करते हुए इसे अच्छे कर्मों और नैतिकता से जोड़ा. कपूर ने कहा कि यह प्रार्थना केवल किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्व के कल्याण के लिए है.
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अन्नू कपूर ने ये भी कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में अहिंसा और शांति का संदेश निहित है, लेकिन साथ ही आत्मरक्षा की तैयारी भी आवश्यक है.
