
अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में कोरोना के कहर ने दहशत फैला दी है. यूनिवर्सिटी के कुल 19 प्रोफेसर्स की अभी तक मौत हो चुकी है. इनमें से 16 प्रोफेसर्स कोविड पेशंट्स थे और नॉन-कोविड के तीन. AMU के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में 10 प्रोफेसर्स की मौत की खबर है. वहीं, 4 प्रोफेसर्स का अलीगढ़ के दूसरे अस्पताल में निधन हुआ है, जबकि 2 की मौत अलीगढ़ के बाहर हुई.
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स्टूडेंट्स ने कहा आंकड़े गलत बताए जा रहे
इसके अलावा, बताया जा रहा है कि 20 के करीब नॉन टीचिंग स्टाफ भी कोरोना की चपेट में आ गए थे, जिनसे उनकी मौत हो गई. यह आंकड़ें पिछले 25 दिनों के अंदर के हैं. यह आंकड़ें PRO ने मीडिया को जानकारी देते वक्त बताए थे. वहीं, एएमयू के छात्रों का कहना है कि आंकड़े गलत बताए जा रहे हैं. उनका कहना है कि टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ मिलाकर करीब 70 मौतें हुई हैं. जिसमें रिटायर्ड प्रोफेसर्स भी शामिल हैं. छात्रों ने आरोप लगाया था कि अस्पतालों की लापरवाही और ऑक्सीजन की कमी की वजह से इतनी बड़ी संख्या में लोग मरे हैं.
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टेस्टिंग दर में हुआ इजाफा
वहीं, डीएम चंद्र भूषण सिंह का कहना है कि वहां पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, किसी चीज की कोई कमी नहीं है. इसके अलावा, पॉजिटिविटी रेट भी कम हुआ है. सोशल मीडिया पर केवल अफवाह फैलाई जा रही है. सीएम के आदेश पर टेस्टिंग में भी इजाफा किया गया है. अब हम 5 से 7 हज़ार तक टेस्टिंग करवा रहे हैं. जिन प्रोफेसर्स की कोरोना से डेथ हुई, उन्होनें वैक्सीन लगवाई थी या नहीं, इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते. लेकिन ज्यादातर लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई थी.
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मेडिकल ट्रीटमेंट से संतुष्ट थे तीमारदार
प्रोफेसर शकील समदानी के बेटे अब्दुल्ला समदानी का कहना है कि उनके अब्बा कोरोना से रिकवर कर रहे थे. लेकिन डाइबिटिक होने चलते उनकी स्थिति खराब हुई और जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में उनकी डेथ हो गई. मृत प्रोफेसर के बेटे का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि कोई लापरवाही हुई है.
वहीं, AMU के पॉलिटिकल साइंस प्रोफेसर अर्शी खान कैंपस में ही रहते हैं. उनका कहना है कि इस चीज की जांच होनी चाहिए. AMU ने अपने धोरोहर को खोया है. इसकी भरपाई नहीं की जा सकती है.
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मदद करने के लिए ईद पर भी घर नहीं गए छात्र
बताया जा रहा है कि किल्लत को देखते हुए AMU के कुछ छात्रों ने लोगों को ऑक्सीजन मुहैया करवाई. इन छात्रों ने डेढ़ लाख का उधार लिया ओर लोगों की मदद करनी शुरू कर दी. वे हर रोज़ 70 से 80 लोगों की मदद कर रहे हैं. ये छात्र ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए आपस में चंदा इकट्ठा करते हैं और दवाई और ऑक्सीजन मुहैया करवाते हैं. इस बार लोगों की मदद के लिए बच्चे ईद पर भी घर नहीं गए हैं.
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