News in Brief

रजनी ठाकुर/रायपुर। कोरोना काल में छत्तीसगढ़ के लोगों को महंगाई का एक और झटका लग सकता है. प्रदेश में बसों का किराया बढ़ सकता है. क्योंकि छत्तीसगढ़ यातायात संघ ने बसों के किराए में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मांग की है. 

कोरोना काल में नुकसान होने की कही बात 
दरअसल, छत्तीसगढ़ यातायात संघ का कहना है कि कोरोना काल में लगाए गए लॉकडाउन से बसें पूरी तरह से बंद हैं. जबकि डीजल के दामों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. ऐसे में  बस मालिकों ने परिवहन विभाग को पत्र लिखकर कहा कि दिसंबर 2021 तक बस संचालकों का मासिक कर माफ किया जाए. जबकि किराए में 40 प्रतिशत वृद्धि करने की अनुमति दी जाए. 

दो महीनें से बंद हैं बसें 
छत्तीसगढ़ यातायात संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली ने कहा कि पिछले ढ़ाई महिने से 12 हजार बसों के पहिए थमे है बस ऑपरेटर काफी परेशान है, डीजल के दामों में बेतहासा वृद्धि हो रही है. ऐसी स्थिती में बसों का संचालन असंभव हो चुका है. काफी राज्यों में यात्री किराए बढ़ाए गए है तो छत्तीसगढ़ में भी किराया बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए. 

ऐसे में अगर सरकार छत्तीसगढ़ यातायात संघ की बात मानता है और बसों के किराए में वृद्धि करता है तो प्रदेश की जनता पर महंगाई की मार का यह एक और झटका हो सकता है. हालांकि अब तक यातायात संघ की मांग पर सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया है. 

यात्रियों की संख्या में भी कमी 
दरअसल, दो महीने से जारी लॉकडाउन से बसों और ट्रेनों में यात्री कम सफर कर रहे हैं. साल 2021 में जनवरी के समय प्रदेश में काफी कम मामले थे. वहीं 80 प्रतिशत बसों का संचालन सभी जिलों में हो रहा था, लेकिन अप्रैल आते ही कोरोना के मामले बढ़ने शुरू हुए. जिसके कारण जिलों में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई. जिसके चलते बसों का परिचालन रोक दिया गया. अब कोरोना गाइडलाइन के साथ जिलों में और इंटर स्टेट बसें शुरू हुई हैं, लेकिन यात्री न मिलने से बसें भी लगभग खाली ही चल रही है. जिसके चलते डीजल तक का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है.

आर्थिक तंगी से परेशान बस चलाने वाले ड्राइवर और अन्य कर्मचारी
कोरोना की वजह से बसों की पहिए थमे हुए हैं. जिसका सबसे ज्यादा नुकसान बसों के ड्राईवर और अन्य कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है. इन लोगों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है. बस चलाने वाले ड्राइवरों का कहना है कि पिछले साल सरकार ने बस कर्मचारियों को तीन महीने का वेतन देने का वादा किया था, लेकिन सरकार ने अब तक भुगतान नहीं किया. प्रदेश में 52,000 से ज्यादा बस कर्मचारी हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. बसें बंद होने से घर चलाना मुश्किल हो रहा है. घर का किराया, बिजली बिल तक पटाने के लिए पैसे नहीं हैं. उन्होंने बताया कि काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है.

ये भी पढ़ेंः ‘लॉकडाउन का प्यार!’ यहां हुआ अनोखा विवाह, मास्क के साथ सैनिटाइजर ने लिए सात फेरे

WATCH LIVE TV