Donald Trump Vs Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अब ऑपरेशन AI चलाने जा रहे हैं जिसके टारगेट पर है ईरान के खलीफा यानी अयातुल्ला खामेनेई. इन दिनों एक शब्द आपने कई बार सुना होगा. ये शब्द है एंथ्रोपिक AI यानी वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल जिसकी वजह से भारतीय IT कंपनियों के शेयर नीचे आ गए हैं. अब इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का ट्रंप कनेक्शन सामने आ गया है. आज अमेरिकी मीडिया ने खुलासा किया है कि वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को किडनैप करने के लिए अमेरिकी सेना ने इसी एंथ्रोपिक AI का इस्तेमाल किया था.

एआई की मदद से हुआ था वेनेजुएला पर अटैक

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इस टूल ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस के उन संवेदनशील इलाकों का चयन किया था जिनपर आगे चलकर अमेरिकी वायुसेना ने बमबारी की थी. इसके साथ ही साथ सैटेलाइट की तस्वीरों का आकलन करके इस AI टूल ने ये भी बता दिया था कि मादुरो की सुरक्षा को किस तरह भेदा जा सकता है. यानी महीनों तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मादुरो से जुड़ी हर डीटेल की जानकारी जुटाई गई. फिर उस जानकारी का AI से आकलन करके मादुरो को किडनैप कर लिया गया.

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आपको याद होगा कुछ महीने पहले ट्रंप ने एक बयान में कहा था कि उन्हें खामेनेई के बारे में छोटी से छोटी जानकारी पता है. इसका सीधा मतलब है कि एंथ्रोपिक या फिर उस जैसे किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए खामेनेई से जुड़ी हर डीटेल का आकलन अमेरिका कर रहा है. ट्रंप की प्लेबुक यानी प्लान में एक और तथ्य खामेनेई के खिलाफ मादुरो जैसे ऑपरेशन का सबूत बनकर सामने आया है. वेनेजुएला की राजधानी काराकस से मादुरो को किडनैप करने के लिए अमेरिका ने अपनी सेना की स्पेशल यूनिट यानी डेल्टा फोर्स का इस्तेमाल किया था. इसी डेल्टा फोर्स को दोबारा एक्टिवेट किया जा चुका है और अब इस फोर्स से जुड़ी एक बड़ी जानकारी सामने आई है.

अमेरिकी थलसेना कर रही बड़ी तैयारी

अंतर्राष्ट्रीय न्यूज एजेंसियों ने ये पुष्टि कर दी है कि अमेरिकी थलसेना के ये दस्ते 2 हफ्ते तक चलने वाले सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे हैं. स्पेशल यूनिट्स के साथ ही साथ अमेरिकी मिसाइल फोर्स भी ईरान में टारगेट्स को चिन्हित कर रही है. इन मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस बार अमेरिका की तरफ से ईरान के परमाणु संयंत्रों के साथ ही साथ सैन्य अड्डों पर भी मिसाइल दागी जाएंगी.

डॉनल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में इस नई महाभारत की स्क्रिप्ट का आखिरी पन्ना आज लिख दिया है. डेल्टा फोर्स के अभ्यास के साथ ही अब ट्रंप ने घातक नौसैनिक बेड़ों  की तैनाती पर भी बड़ा ऑर्डर दे दिया है.

डॉनल्ड ट्रंप के ऑर्डर पर अमेरिकी नौसेना का दूसरा स्ट्राइक ग्रुप यानी नौसैनिक बेड़ा ईरान की तरफ बढ़ गया है. अमेरिका का USS ABRAHAM LINCON बेड़ा पहले से ईरान के नजदीक तैनात है. अब USS GERALD FORD को भी पहले बेड़े के साथ मिलने के लिए आगे बढ़ा दिया गया है.ईरान के इर्द गिर्द बड़ी तादाद में फौज तैनात होने का एक ही मतलब है कि अब ट्रंप ने खलीफा पर फाइनल एक्शन का फैसला कर लिया है.

कैसी है ईरान की तैयारी?

ट्रंप के प्लान के जवाब में ईरान का खेमा क्या कर रहा है, ये भी हम आपको बताएंगे लेकिन  उससे पहले आपको समझना चाहिए कि ईरान को अमेरिका की कितनी बड़ी फायर पावर ने घेर लिया है.

अगर अमेरिकी नौसेना के अब्राहम लिंकन और जेराल्ड फोर्ड बेड़े की कुल ताकत की बात करें तो इन दोनों बेड़ों पर तकरीबन 12 हजार अमेरिकी नौसैनिक तैनात रहते हैं. इन दोनों बेड़ों पर कुल 180 लड़ाकू विमान और अटैक हेलीकॉप्टर मौजूद हैं. इनके साथ ही दोनों बेड़ों को 1500 मिसाइलों की फायर पावर भी हासिल है. समुद्री लड़ाई के लिए इन दोनों बेड़ों के पास 20 भारी तोप भी हैं. इतनी बड़ी तैयारी और तैनाती सिर्फ और सिर्फ युद्ध जैसी स्थिति में ही की जाती है.

ट्रंप ने पूरी कर ली तैयारी

बातचीत की आड़ में ट्रंप सैन्य तैनाती को पुख्ता करने की प्लानिंग कर रहे थे और आज की खबर इस बात की पुष्टि करती है कि ट्रंप ने सैन्य तैनाती को पूरा कर लिया है.एक तरफ ईरान के इर्द गिर्द अमेरिकी नौसेना की हलचल बढ़ रही है तो दूसरी तरफ  ट्रंप ने अमेरिकी थलसेना को भी लामबंद करना शुरू कर दिया है. अब से कुछ ही घंटों पहले ट्रंप अमेरिकी सेना के बड़े सैन्य अड्डे फोर्ट ब्रैग पहुंचे थे. फोर्ट ब्रैग से भी ट्रंप ने ईरान के लिए सख्त संदेश जारी किया है.

ईरान का खेमा भी समझ चुका है कि अब ट्रंप रुकने वाले नहीं हैं. इसी वजह से अब ईरान के प्रॉक्सी यानी आतंकी गुट भी सीधी धमकियां देने लगे हैं. इन धमकियों को समझने के लिए आपको ईरान समर्थित हूती आतंकियों का एक बयान  समझना चाहिए.

हूती आतंकी गुट अंसारउल्ला ने कहा है.हमारी वफादारी ईरान और उसके शासन के प्रति आज भी कायम है. हम अमेरिका और इजरायल को बता देना चाहते हैं अगर ईरान पर हमला किया गया तो हम लाल सागर को दोबारा बाधित कर देंगे. इस इलाके से किसी भी देश का जहाज आवाजाही नहीं कर पाएगा.

पिछली बार हमास के समर्थन में हूती आतंकियों ने लाल सागर के व्यापारिक रूट को बंद कर दिया था, जो भी जहाज गुजरता था उसपर हमला कर दिया जाता था. इन हमलों की वजह से इजिप्ट को 9 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था. इजरायल के एलियाट बंदरगाह पर जहाजों की आवाजाही 85 प्रतिशत कम हो गई थी. लंबे रूट से जाने वाले जहाजों को हर चक्कर में 1 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा था. ट्रंप की प्लानिंग और हूती आतंकियों की धमकी बताती है कि ईरान से युद्ध शुरु होते ही दुनिया में दोबारा सप्लाई चेन और आर्थिक अस्थिरता जैसे हालात पैदा होने तय हैं.