Which 8 prisoners has US asked Iran to release: ईरान में खामेनेई के खिलाफ लगातार बढ़ते जनाक्रोश के बीच मरने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ईरान में सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दे रहे हैं. अब ट्रंप प्रशासन ने खामेनेई को बख्श देने के एवज में ईरान के 8 राजनीतिक क़ैदियों को तुरंत छोड़ने की मांग की है. इसके लिए धमकी भरी भाषा में ईरान को चेतावनी दी गई है. ये क़ैदी कौन हैं, इन्हें किस वजह से जेल में रखा गया है. क्या इनके छूट जाने से खामेनेई बचे रहेंगे. इन सवालों को डिकोड करने से पहले आपको ये जानना चाहिए कि अमेरिका ने क्या कहा है.
‘इन 8 लोगों को छोड़ दो वरना…’
अमेरिकी विदेश विभाग की फारसी भाषा के एक्स अकाउंट से एक पोस्ट किया गया है. इसमें आठ राजनीतिक कैदियों की तस्वीर और उनके नाम लिखे गए हैं. इनमें से 4 महिलाएं हैं तो 4 पुरुष. इसके साथ लिखा गया है, हम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा पर चिंता जता रहे हैं तो ये न समझा जाए कि हमने उन राजनीतिक कैदियों को भुला दिया है. जिन्हें इन विरोध प्रदर्शनों से पहले ही जेल में डाल दिया गया था. इन लोगों को लगातार हिरासत में रखा गया है जो गंभीर चिंता का विषय है. हम मांग करते हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक की सरकार इन सभी कैदियों को तुरंत रिहा करे.
यानी एक तरफ ट्रंप प्रशासन प्रदर्शनकारियों से सख़्ती नहीं करने की हिदायत दे रहा है. दूसरी तरफ़ राजनीतिक कैदियों को रिहा करने का भी दबाव बना रहा है. अब आपको इन 8 राजनीतिक क़ैदियों के बारे में भी जानना चाहिए.
जेल में बंद है नोबेल पुरस्कार विजेता
इनमें पहला नाम नरगिस मोहम्मदी का है. नरगिस 2023 की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. महिलाओं के अधिकारों और फांसी की सजा के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं. वो कई बार जेल जा चुकी हैं. जब उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया था तब भी वो जेल में ही थीं. फिलहाल वो तेहरान की एविन जेल में बंद हैं.
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अमेरिकी की सूची में दूसरा नाम सपीदेह गोलियान का है. महिला अधिकार कार्यकर्ता गोलियान खामेनेई शासन के निशाने पर रही हैं और कई बार जेल जा चुकी हैं. गोलियान लेखिका और स्वतंत्र पत्रकार भी हैं. तीसरा नाम जवाद अली कोर्दी का है जो सरकार विरोधी कार्यकर्ता हैं. चौथा नाम पूरान नाजेमी का है जो महिला और नागरिक अधिकारों के लिए काम करती हैं.
खामेनेई की सत्ता के खिलाफ करते रहे हैं जंग
पांचवां नाम रज़ा खंदान का है जो मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और हिजाब के खिलाफ़ आंदोलन में शामिल रहे हैं. छठा नाम मजीद तवक्कोली का है जो छात्र नेता हैं. सातवां नाम शरीफेह मोहम्मदी का है जो सामाजिक कार्यकर्ता हैं. इन्हें देशद्रोह के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई थी. आठवां नाम हुसैन रोनागी का है जो ब्लॉगर और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं.
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— Zee News (@ZeeNews) January 14, 2026
ये सभी राजनीतिक क़ैदी खामेनेई की इस्लामिक सत्ता के खिलाफ रहे हैं. जिस वक़्त लोग खामेनेई के ख़िलाफ़ आंदोलन के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, उस समय उन्होंने सड़कों पर उतरकर विरोध किया था. यही वजह है कि उनका दमन किया जाता रहा है.
आखिर क्या करना चाहता है यूएस?
जिस तरह से अमेरिका के कहने पर ईरान प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई से पीछे नहीं हट रहा है. वैसे ही अमेरिका के कहने पर इन्हें भी नहीं छोड़ा जाएगा. जब तक खामेनेई की सत्ता है, इन्हें छोड़ने की उम्मीद नहीं की जा सकती.
अमेरिका का उद्देश्य इस मांग के ज़रिए ईरान पर राजनीतिक दबाव बनाना है. दुनिया के सामने मानवाधिकार पर उसके खराब रिकॉर्ड का पर्दाफाश करना है. एक आंकड़े के मुताबिक ईरान में 15 हजार से ज़्यादा राजनीतिक कैदी हैं. इस मामले में ईरान का नंबर म्यांमार और तुर्किए के बाद आता है.
