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Kerala Muslim District: कश्मीर के कट्टरपंथी धर्म को दशहतगर्दों की ढाल बना रहे हैं तो केरल में कट्टरपंथी धर्म के आधार पर बंटवारे की मांग कर रहे हैं. केरल और कश्मीर में भौगोलिक दूरी है. लेकिन वैचारिक तौर पर दोनों जगह कट्टरपंथियों में गजब की एकता है. एक धर्म को अलगाववादियों की ढाल बना रहे हैं तो दूसरे धर्म को आधार बनाकर अलगाववाद का बीज बो रहे हैं.

एर्नाकुलम जिले के बंटवारे की मांग

अब हम धर्म को बंटवारे का आधार बनानेवाली इसी सोच की वैचारिक मरम्मत करेंगे.केरल में एक संगठन है केरल मुस्लिम जमात. नाम से ही समझ में आता है कि इस संगठन का वैचारिक और सामाजिक आधार क्या होगा. तो केरल मुस्लिम जमात ने बंटवारे की मांग की है. मांग है कि एर्नाकुलम जिले का बंटवारा किया जाए. मुवत्तुपुझा को मुख्यालय बनाकर एक नया जिला बनाया जाना चाहिए. केरल मुस्लिम जमात ने तर्क दिया है कि एर्नाकुलम की आबादी 34 लाख से ज्यादा है, इसलिए विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिले का बंटवारा किया जाना चाहिए.

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मुवत्तुपुझा को नया जिला बनाने की मांग

पहली नजर में इस मांग में कोई गड़बड़ी नहीं दिख रही है. अब विस्तार से समझिए. एर्नाकुल में करीब 46% हिंदू आबादी है. ईसाई 38 प्रतिशत और मुस्लिम 16 प्रतिशत हैं. यानी यहां हिंदू बहुमत में हैं. इसलिए कट्टरपंथी मनमानी नहीं कर पाते हैं. लेकिन जिस मुवत्तुपुझा को नया जिला बनाने की मांग हो रही है वहां मुस्लिम आबादी करीब 40 प्रतिशत है, हिंदू 39 प्रतिशत और ईसाई 21 प्रतिशत हैं. अब समझिए नया जिला बनने के बाद यहां सिस्टम पर कट्टरपंथियों का कब्जा होगा. कट्टरपंथी ही नीतियां बनाएंगे और उनकी ही मनमानी चलेगी.

समझिए ये जिन्ना वाली सोच है. ये वही सोच है जिसने सांस्कृतिक और धार्मिक विभेद की बात कर भारत का बंटवारा कराया था. जिन्ना की इसी सोच ने 1947 में बंटवारा कराया और धर्म के आधार पर पाकिस्तान बना. केरल के कट्टरपंथी उसी विभाजन वाली वैचारिक सोच को नए सिरे से आकार दे रहे हैं. समझिए आज ये प्रशासनिक सहूलियत के आवरण में धार्मिक आधार पर नया जिला बनाने की मांग करेंगे. कल ये नया राज्य बनाने की मांग करेंगे और उसके बाद शरियत के आधार पर नया देश बनाने की मांग कर सकते हैं.