Why Trump enraged by decision to return Chagos Islands to Mauritius: अमेरिका के प्रभाव से जुड़े इस दौरे में अमेरिका का सबसे मजबूत और सक्रिय सहयोगी ब्रिटेन था. आज ट्रंप को अपने पुराने सहयोगी ब्रिटेन के फैसले भी कबूल नहीं हो रहे हैं.  अब हम आपके सामने ब्रिटेन और ट्रंप के बीच छिड़े नए टकराव का विश्लेषण करने जा रहे हैं. इस विश्लेषण का केंद्रबिंदु है भारत से एक हजार मील दूर स्थित मॉरीशस का चागोस द्वीप. एक द्वीप को लेकर ट्रंप और ब्रिटेन के बीच तकरार क्यों ठनी है . ये आपको भी बेहद गौर से देखना चाहिए.

चागोस द्वीप वाले फैसले से भड़का यूएस

ब्रिटेन ने फैसला किया है कि वो चागोस द्वीपसमूह को दोबारा मॉरीशस को सौंप देगा. वर्ष 1814 में ब्रिटेन ने इस द्वीप समूह पर कब्जा किया था. 70 के दशक में ब्रिटेन ने इस द्वीप समूह के मूल निवासियों को विस्थापित कर दिया था. इस विस्थापन के बाद चागोस में अमेरिका और ब्रिटेन ने एक संयुक्त सैन्य अड्डा बनाया था जिसे डिएगो गार्सिया नाम दिया गया था. वर्ष 2019 में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने चागोस पर ब्रिटेन के कब्जे को अवैध करार दिया था . अब यानी फैसले के तकरीबन 6 साल बाद ब्रिटेन ने द्वीप समूह से कब्जा छोड़ने का फैसला किया है. हालांकि मॉरीशस से ब्रिटेन उस हिस्से को दोबारा लीज़ पर लेगा जहां डिएगो गार्सिया सैन्य बेस मौजूद है.

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ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान और सामरिक हितों से जुड़ी प्रक्रियाओं को पूरा करने का दावा किया है लेकिन ट्रंप को ये कदम हजम नहीं हो रहा है. ब्रिटेन के इस फैसले पर डॉनल्ड ट्रंप ने क्या कहा है. ये भी आपको गौर से देखना और समझना चाहिए.

फैसले के लिए ट्रंप ने ब्रिटेन को फटकारा

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डॉनल्ड ट्रंप ने लिखा है. ब्रिटेन ने सामरिक रूप से अहम द्वीप समूह को लौटाने का फैसला किया है . नाटो में हमारे इस महत्वपूर्ण सहयोगी के फैसले ने मुझे चौंका दिया है. हमारे कुछ प्रतिद्वंदी सिर्फ शक्ति प्रदर्शन की भाषा ही समझते हैं. ब्रिटेन ने इस सामरिक अड्डे को लौटाकर बेवकूफी से भरा काम किया है.

ब्रिटेन ने अपने ही कब्जे वाले क्षेत्र को वापस लौटाने का फैसला किया है. इसके बावजूद ट्रंप बेवकूफी जैसे सख्त अल्फाजों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ट्रंप के इस गुस्से के पीछे दो बड़ी वजह है. पहली वजह है वो पैसा जो नई लीज के लिए मॉरीशस को दिया जाएगा. ब्रिटेन नई लीज के लिए मॉरीशस को हर साल 1 हजार करोड़ रुपए देगा. ट्रंप के गुस्से की दूसरी वजह है उनके अंदर बैठा डर. ट्रंप को ये आशंका है कि रूस या चीन के प्रभाव में आकर मॉरीशस नई लीज़ पर इनकार कर सकता है. यानी हिंद महासागर में एक अहम सैन्य बेस अमेरिका के हाथों से निकल सकता है. आखिर चागोस द्वीप समूह और डिएगो गार्सिया को लेकर ट्रंप की चिंता क्यों बढ़ी हुई हैं . ये समझने के लिए आपको डिएगो गार्सिया का इतिहास ध्यान से देखना चाहिए.

ये द्वीप यूएस के लिए क्यों हैं इतना जरूरी?

वर्ष 1991 में जब अमेरिका ने सद्दाम हुसैन के खिलाफ पहला युद्ध छेड़ा था तो अमेरिकी बमवर्षक डिएगो गार्सिया से ही उड़ान भरकर बगदाद पर बमबारी करते थे. वर्ष 2001 से 2006 के बीच अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ बमबारी के मिशन इसी एयरबेस से किए गए थे. गाजा युद्ध के दौरान हूती आतंकियों पर हमलों के लिए भी डिएगो गार्सिया एयरबेस का ही इस्तेमाल किया गया था. ये तथ्य बताते हैं अगर डिएगो गार्सिया से अमेरिकी सेना को हटना पड़ा तो हिंद महासागर में उनकी कमजोरी उजागर हो जाएगी.

डॉनल्ड ट्रंप की प्राथमिकताओं में अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान से ज्यादा अमेरिका के सामरिक हित शामिल हैं . ऐसे ही  जिद और आक्रामक बर्ताव की वजह से ही आज अमेरिका मुक्त संसार जैसे विषय पर चर्चाएं तेज हो गई हैं.