
Iran Vs US: अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप धरती को, घूमता ताबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हमारे पास ट्रंप से जुड़ी ऐसी 5 बड़ी खबरें हैं, जो दुनिया के लिए बड़े खतरे के संकेत दे रही हैं.अब जानिए कि ट्रंप ने ऐसा क्या किया..जिससे वो पूरी दुनिया के लिए सबसे खतरनाक शख्स बन गए हैं. डॉनल्ड ट्रंप ने एलान कर दिया है कि वेनेजुएला के बाद अब उनका निशाना क्यूबा है, जिसे तोड़ने का प्लान आज ट्रंप ने दुनिया के सामने रखा.
इसके अलावा ईरान के पड़ोसी देश इराक में नया प्रधानमंत्री किसे ना बनाया जाए, ट्रंप ने इस पर भी वीटो कर दिया है. ट्रंप ने ईरान पर अपने खतरनाक इरादों का एक और संकेत आज दुनिया को दे दिया. ट्रंप ने बताया यूएसएस अब्राहम लिंकन के बाद एक और कैरियर स्ट्राइक ग्रुप वो ईरान की तरफ भेज चुके हैं.
ट्रंप से प्लान से नेतन्याहू अपसेट
इसके अलावा गाजा पर ट्रंप के नए प्लान से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू भी अपसेट हो गए हैं. अब ट्रंप और नेतन्याहू के बीच सीजफायर करवाने वाले की तलाश हो रही है. इसके अलावा कुछ बड़े देश ट्रंप के जंग वाले जुनून का जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे संघर्ष की संभावनाएं बढ़ रही हैं. इसे देखते हुए वैज्ञानिकों ने वैश्विक तबाही का संकेत देने वाली डूम्सडे क्लॉक को चार सेकंड आगे बढ़ा दिया. यानी वैश्विक तबाही के और करीब आने का एलान कर दिया है.
अब आपको जानना चाहिए कि आखिरकार ट्रंप क्यों अब अपनी पसंद की दुनिया और अपने पसंद के बादशाह बनाना चाहते हैं. एक तरफ ट्रंप दुनिया को अपने हिसाब से चलाना चाहते हैं. दूसरी तरफ उनको काउंटर करने के लिए चीन ने बड़ी तैयारी की है.
जिनपिंग के तख्तापलट की तैयारी के पीछे अमेरिका
जब से चीन में जिनपिंग के तख्तापलट की तैयारी और उसके पीछे अमेरिका की साजिश की खबरें सामने आई हैं. तब से चीन भी अमेरिका को एक बड़ा झटका देना चाहता है. चीन ने इसके लिए ईरान को समंदर का सबसे घातक हथियार सौंपा है. ये हथियार अमेरिका के लिए संभावित युद्ध में कितना बड़ा खतरा है, ये भी जान लीजिए.
डॉनल्ड ट्रंप ने एक और अर्माडा के ईरान की तरफ बढ़ने की बात कही. यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप पहले से मिडिल ईस्ट में मौजूद है और आज ट्रंप ने एलान किया है.यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसा ताकतवर एक और बेड़ा ईरान की तरफ जा रहा है. यानी ईरान पर खतरा दोगुना हो चुका है. आज आपको अमेरिका के दूसरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के बारे में जानना चाहिए.
#DNAमित्रों | ईरान-इराक..क्यूबा-कनाडा..यूरोप में ‘ट्रंप प्रकोप’! ट्रंप..कैसे दुनिया के सबसे खतरनाक इंसान बने?
ट्रंप और इजरायल में ‘सीजफायर’ कौन कराएगा?#DNA #DNAWithRahulSinha #UnitedStates #DonaldTrump #Israel @RahulSinhaTV pic.twitter.com/FKp1jgtg6y
— Zee News (@ZeeNews) January 28, 2026
ईरान पहुंचा अमेरिका का दूसरा युद्धपोत
अमेरिका के ईरान पहुंचने वाले दूसरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप का नाम यूएसएस जॉर्ज डब्ल्यू बुश है, जिसका नाम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर रखा गया है. ये कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी लगभग 90 फाइटर जेट्स को साथ लेकर चलता है. एयरक्राफ्ट कैरियर के अलावा इस बेड़े के साथ भी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से लैस युद्धपोत और परमाणु सबमरीन मौजूद रहती हैं.
ऐसे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप किसी देश की पूरी सेना को अकेले तबाह कर सकते हैं और अब ऐसे एक नहीं दो तैरते बेस ईरान के पास तैनात रहेंगे. इस खबर के साथ ट्रंप ने ईरान को एक बार फिर से डील करने की धमकी दी है. यहां पर डील का मतलब सरेंडर से है. यानी अमेरिकी की सारी शर्तों को मानने से है. अब समझिए कि अमेरिका को ईरान के पास दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर क्यों भेजना पड़ा.
मुस्लिम देशों ने अमेरिका को दिखाया ठेंगा
इसकी सबसे बड़ी वजह है मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देश, जिन्होंने ईरान पर हमले में अमेरिका की मदद नहीं करने की रणनीति बनाई है. यूएई के बाद सऊदी अरब और कतर जैसे देशों ने साफ कर दिया है कि ईरान पर हमले के लिए वो अमेरिका को अपने देशों के एयरबेस इस्तेमाल करने नहीं देंगे. इस ऐलान के बाद ईरान पर हमले की अमेरिकी क्षमता काफी कमजोर हुई.
कतर का अल-उदीद एयर बेस ईरान पर अमेरिकी एयर स्ट्राइक का नर्व सेंटर होता. क्योंकि ये एयरबेस सिर्फ़ एक रनवे नहीं है. य
ह पूरे Middle East में अमेरिकी हवाई युद्ध का दिमाग है. कतर के अल-उदीद एयर बेस में अमेरिका का Combined Air Operations Center मौजूद है.
यहीं से तय होता है कि कौन-सा विमान कब उड़े, किस लक्ष्य पर हमला हो. किस समय वापस लौटे. यानी ईरान पर कोई भी बड़े पैमाने की एयर स्ट्राइक यहीं से संचालित की जाती.
इसके अलावा यूएई का अल-धफरा एयर बेस अमेरिका के स्टेल्थ लड़ाकू विमान और खुफिया, निगरानी और टोही एयरक्राफ्ट का प्रमुख केंद्र है.
वहीं सऊदी अरब का प्रिंस सुल्तान एयर बेस अमेरिकी लड़ाकू विमानों और बॉम्बर विमानों की तैनाती का मुख्य अड्डा है.
अगर ये अड्डे अमेरिका के पास होते तो अमेरिका ईरान पर तेजी से बार बार हमला कर सकता था. कम दूरी से हमले की वजह से मिड एयर रिफ्यूलिंग की जरूरत भी नहीं पड़ती.
इस तरह इन तीनों एयरबेस से हमले की अनुमति नहीं मिलने पर अमेरिका का हमला ईरान के दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम से सबसे ज्यादा कमजोर होगा और इसी इस कमजोरी को बैलेंस करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एक और Carrier Strike Group को ईरान के पास भेजा है, जिसे अरब सागर या फिर गल्फ ऑफ ओमान में तैनात किया जाएगा. जो समंदर में अमेरिकी फाइटर जेट्स के लिए अस्थायी एयरबेस का काम करेगा.
युद्धपोतों से दागी जाएंगी ईरान पर मिसाइलें
इसके अलावा युद्धपोतों से भी ईरान पर मिसाइलें दागी जा सकेंगी. वैसे इस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को पर्शियन सागर यानी फारस की खाड़ी में तैनात करने का भी विकल्प है. लेकिन ईरान के इतने पास एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती से ईरानी मिसाइलों का खतरा बढ़ जाएगा. इसलिए दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मिलकर अमेरिकी हमले की कमान संभालेंगे.
ट्रंप ने अमेरिका के दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स को ईरान को घेरने का ऑर्डर दे दिया है. और बस थोड़ी देर पहले अमेरिका के राष्ट्रपति ने ईरान को सबसे बड़ी धमकी दे दी है. ट्रंप ने साफ साफ कहा है कि जो बेड़ा ईरान में भेजा गया है, वो वेनेज़ुएला भेजे गए बेड़े से भी बड़ा है और इसकी अगुवाई महान एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन कर रहा है.
ईरान को बातचीत की टेबल पर चाहता है अमेरिका
वेनेजुएला की तरह, यह बेड़ा पूरी तरह तैयार है, ज़रूरत पड़ने पर तेज़ी के साथ घातक हमला करने के लिए तैयार है. इसलिए ईरान परमाणु हथियारों को छोड़कर जल्दी से बातचीत की टेबल पर आ जाए. वक्त बहुत कम बचा है. और ये बहुत महत्वपूर्ण वक्त है.
ट्रंप ने कहा कि अगला हमला इससे कहीं ज़्यादा भयानक होगा और इसे दोबारा मत होने दीजिए. आप भी सोचिए इससे बड़ी युद्ध की धमकी और क्या हो सकती है.
अमेरिका के राष्ट्रपति सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए ईरान को धमकी दे रहे हैं. लेकिन ईरान से बातचीत की कोई औपचारिक पेशकश नहीं की गई है. ट्रंप धमकी दे रहे हैं कि परमाणु महात्वाकांक्षा को छोड़कर ईरान बातचीत करने नहीं आया तो भीषण हमला करेंगे.
मिडिल ईस्ट में नहीं टलेगा जंग का खतरा
दूसरी तरफ ईरान ने कहा है ट्रंप धमकी देंगे तो वार्ता संभव नहीं है. दोनों देशों का रुख बता रहा है कि मिडिल ईस्ट में जंग का खतरा टलने वाला नहीं है. ईरान भी इसे समझता है और इसीलिए उसने अमेरिका के खिलाफ तैयारियां तेज कर दी हैं. अब ईरान की इन तैयारियों के बारे में भी जान लेते हैं.
ईरान ने तैनात किए ड्रोन कैरियर
अमेरिका ने समंदर में अपने कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किए हैं. तो इसके जवाब में ईरान ने समंदर में ड्रोन कैरियर तैनात कर दिए हैं. इसका नाम शाहिद बघेरी ड्रोन कैरियर है. जिसे ईरान ने फारस की खाड़ी में बंदर अब्बास पोर्ट से करीब 5 किलोमीटर दक्षिण समुद्र में तैनात किया है. पहले यह एक साधारण कंटेनर जहाज़ था. लेकिन ईरान ने 2022 से 2024 के बीच इसे ड्रोन कैरियर में बदला दिया. इस जहाज़ पर स्की-जंप रैंप है, जिससे ड्रोन उड़ाए जा सकते हैं. इससे ड्रोन और हेलिकॉप्टर दोनों चलाए सकते हैं. यानी ये कोई बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं, बल्कि कम लागत वाला ऐसा युद्ध प्लेटफॉर्म है, जो अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बन गया है.
ईरान कर रहा हॉर्मुज स्ट्रेट की निगरानी
इसकी मदद से ईरान हॉर्मुज़ स्ट्रेट की लगातार निगरानी कर रहा है. ये रास्ता मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण है. ये कैरियर ईरान को समंदर से ड्रोन हमला करने की क्षमता देता है, जिससे दुश्मन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ता है. इसकी मदद से ईरान अमेरिका के युद्धपोतों पर स्वार्म ड्रोन अटैक यानी एक साथ कई ड्रोन्स से हमले कर सकता है. इस ईरानी कैरियर से अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के लिए नया खतरा पैदा हो गया है. क्योंकि एक साथ कई ड्रोन से हमला करके बड़े जहाजों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है.
सबसे बड़ा ड्रोन युद्ध लडे़गा ईरान
अमेरिका के खिलाफ ईरान ने दुनिया का सबसे बड़ा ड्रोन युद्ध लड़ने की तैयारी की है. इसके लिए ईरान ने 80,000 से ज्यादा शाहिद ड्रोन तैयार किए हैं. ये आत्मघाती ड्रोन दुश्मनों के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं. ईरान रोजाना ऐसे 400 से ज्यादा ड्रोन बना रहा है. रूस की तकनीकी मदद से ईरान ने ऐसे ड्रोन के उत्पादन को तेज कर दिया है. ये वही ड्रोन्स हैं, जिनका इस्तेमाल रूस यूक्रेन के खिलाफ कर चुका है.
इसके अलावा ईरान ने फिर से दुनिया को अपनी ड्रोन सिटी दिखाई है, जिसमें दुनिया के सबसे घातक ड्रोन्स मौजूद हैं,जिनका इस्तेमाल इस युद्ध में किया जाएगा. इतनी बड़ी संख्या में ईरान के पास ड्रोन की मौजूदगी इसलिए भी घातक है. क्योंकि इससे स्वार्म ड्रोन अटैक की क्षमता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. लेकिन अमेरिका के खिलाफ ईरान के आत्मविश्वास की वजह सिर्फ ड्रोन पावर नहीं है.
चीन ने ईरान को दी घातक मिसाइल
अब समझिए कि ईरान पर ट्रंप की धमकियों का असर क्यों नहीं हो रहा तो इसकी सबसे बड़ी वजह है चीन. एक तरफ ट्रंप ने दो दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप से ईरान को घेरने की योजना बनाई है. दूसरी तरफ चीन ने ईरान को वो मिसाइल दे दी है, जिसे कैरियर किलर कहा जाता है, जो ईरान के आस पास मौजूद अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के लिए सबसे बड़ा खतरा है.
क्योंकि चीन ने इस मिसाइल को खास तौर पर अमेरिकी Aircraft Carrier को निशाना बनाने के लिए तैयार किया है. अब चीन की इस खास मिसाइल यानी DF-21D के बारे में भी जान लीजिए.
DF-21D चीन की एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइल है, जो जमीन से समंदर में चलते एयरक्राफ्ट कैरियर पर निशाना साधती है.
इसकी रेंज लगभग 1,500 से 1,700 किलोमीटर के बीच है. इस मिसाइल की वजह से अमेरिकी स्ट्राइक ग्रुप ईरान के बहुत करीब नहीं जा सकते.
ये एक हाइपरसोनिक स्पीड वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी वजह से इसे बेहद खतरनाक माना जाता है.
इसकी रफ्तार 10 मैक यानी 10 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा है और ये लॉन्च के बाद पहले धरती की सतह से 50 से 100 किलोमीटर तक ऊपर जाती है.
इसके बाद इतनी ऊंचाई से लक्ष्य के ऊपर तक पहुंचती है फिर सीधे लक्ष्य पर बहुत तेज रफ्तार से गिरती है. इसलिए इसको इंटरसेप्ट करके नष्ट करना मुश्किल है.
ये मिसाइल सीधे एयरक्राफ्ट कैरियर फ्लाइट डेक को नष्ट करने में सक्षम है. फ्लाइट डेक वो जगह होती है, जहां से कोई फाइटर जेट उड़ान भरता है. यानी इसके हमले से पूरा एयरक्राफ्ट कैरियर निष्क्रिय हो जाता है.
मतलब साफ है चीन अमेरिका के खिलाफ अपने उन हथियारों की टेस्टिंग करना चाहता है, जो उसने अमेरिका से युद्ध के लिए खासतौर पर तैयार किए हैं. इसीलिए चीन ईरान को अमेरिका के खिलाफ अपनी सबसे घातक मिसाइलें दे रहा है. जो सफल हो गईं तो अमेरिका से किसी संभावित युद्ध के लिए चीन इनका प्रोडक्शन तेजी से करेगा.
