Iran Protests: भारत में धार्मिक स्थलों और पर्यटन स्थलों पर नये साल की भीड़ दिख रही है तो ईरान में इस समय, आंदोलन वाली भीड़ सड़कों पर दिख रही है.एक ऐसी भीड़ जो खलीफा के खिलाफ खड़ी है. एक ऐसी भीड़ जो तेहरान में तख्तापलट की आहट और खलीफा के खेमे में घबराहट की तरह है. ईरान की जनता आखिर खलीफा के खिलाफ सड़कों पर क्यों उतर गई, चलिए आपको बताते हैं. 

ईरान की सड़कों पर इस वक्त नारे लग रहे हैं. दिस इज द फाइनल बैटल यानी ये निर्णायक लड़ाई है.इस यलगार का सीधा मतलब है कि ईरान की अवाम सूप्रीम लीडर के खिलाफ निर्णायक युद्ध में उतर गई है.

वायरल हो रहीं तस्वीरें

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खलीफा के खिलाफ इस फाइनल बैटल की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. सड़क से लेकर शॉपिंग मॉल्स तक में प्रदर्शन हो रहा है. खलीफा की आर्मी प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट चला रही है.बावजूद इसके भीड़ पीछे हटने को राजी नहीं है. लेकिन सवाल उठता है कि अचानक ईरान की अवाम इतनी आक्रमक क्यों हो गई.अचानक सुप्रीम लीडर के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन क्यों होने लगे.

इसकी पहली वजह है- ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था और दूसरी वजह है- सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की नीतियां. ईरान में ताजा प्रदर्शन की शुरुआत आर्थिक संकट की वजह से हुई.. शुरुआती प्रदर्शन तेहरान के दुकानदारों और व्यापारियों ने किया. लेकिन इस प्रदर्शन में फिर हर वर्ग जुड़ता गया क्योंकि ईरान भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहा है. अमेरिकी प्रतिबंध और क्षेत्रीय युद्धों की वजह से ईरान की मुद्रा ऑल टाइम लो पर पहुंच गई है.

बुरी तरह गिरी करंसी

ईरान की करंसी रियाल जो 2020 में 1 लाख 75 हजार प्रति डॉलर थी वो अब 8 लाख के पार पहुंच गई है. मुल्क में आर्थिक संकट की वजह खलीफा की नीतियों को माना जा रहा है. यही वजह है कि अब ईरान में शाही शासन की वापसी की भी मांग तेज हो गई है.

ईरान की सड़कों पर इस वक्त रेजा पहलवी की वापसी के नारे भी लग रहे हैं.इसी नारे की वजह से ये भी माना जा रहा है कि खामेनेई के शासन का अंत निकट है.रेजा पहलवी ईरान के आखिरी शासक के वारिस हैं, जो इस वक्त अमेरिका में निर्वासन काट रहे हैं. माना जाता है कि पहलवी को अमेरिका का समर्थन हासिल है और पिछले कुछ वक्त में पहलवी एक्टिव भी हो गए हैं.

ईरान में आर्थिक संकट और रेजा पहलवी का एक्टिव होना ये दोनों फैक्टर्स ईरान में प्रदर्शन का कारण बने हैं.. जो खलीफा खामेनेई के लिए खतरे की घंटी हैं.