

Gaya: बिहार में कोरोना वायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर सुस्त होने के बाद 28 जून से सरकारी स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई शुरू करने के लिए घोषणा की गई थी. एक से लेकर 5वीं कक्षा के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराने के लिए घोषणा सरकार की तरफ से की गई थी.
वहीं, कक्षा छह से 12 तक के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई (Online Study) पहले से ही जारी है. कक्षा एक से 5 तक के बच्चों को पढ़ने के लिए दूरदर्शन चैनल के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा देने की पहल की गई हैं. लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले एक से पांच व छः से 10 तक के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ नहीं ले सकते हैं.
ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के पास मोबाइल नहीं है जिसके कारण वो इस क्लास से महरूम हो जा रहे हैं. इससे बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है. गया जिले के माउंटेन मैन दशरथ मांझी के नाम पर बसा मोहड़ा प्रखंड के गहलौर घाटी के समीप दशरथ नगर में रहनेवाले महादलित परिवार के बच्चों को शिक्षित करने के लिए प्राथमिक विद्यालय की स्थापित किया गया था ताकि माउंटेन मैन दशरथ मांझी के परिवार के बच्चों के साथ-साथ इस क्षेत्र के बच्चों को एक बेहतर भविष्य दिया जा सके.
कोरोना की वजह से विगत वर्षों से कोरोना महामारी को लेकर सरकारी स्कूलों में ताला लगा हुआ है और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से बाधित हो गई है. बच्चे अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं क्योंकि स्कूल नही खुलने से बच्चों के पढ़ाई नही कर रहे है और पढ़ाई नही होने से परीक्षा में फेल होने का डर सता रहा है. वहीं, बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के आदेश के बाद ऑनलाइन क्लास की शुरुआत करने के बाद भी महादलित परिवार के बच्चों के सामने क्लास नहीं करने की समस्या बरकरार हैं क्योंकि महादलित परिवार के बच्चों के पास न तो मोबाइल है और न ही टीवी जिससे कि वो ऑनलाइन क्लास में भाग ले सकते हैं और अपनी पढ़ाई को पूरा कर सकते हैं.
वहीं, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि स्कूल कब खुलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है. जब स्कूल खुलेगा तो बच्चे पढ़ाई में पिछड़ सकते हैं और जबकि प्राइवेट स्कूल में लाइव बच्चे पढ़ा रहे हैं तो सरकारी स्कूल के बच्चे को क्यों नही पढ़ाया जाए. उन्होंने बताया कि अभी का जो समय है उसमें एनरॉयड मोबाइल होना जरूरी है. एनरॉयड मोबाइल बच्चों के पास नही है तो अभी के समय मे बहुत मुश्किल है. ऐसे में मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि सरकार से अभी के समय मे बच्चों को एनरॉयड मोबाइल दिलाया जाए.
बहरहाल, जिले में ऐसे कितने इलाके होंगे जहां के बच्चों के पास मोबाइल की सुविधा नहीं होगी. उन बच्चों के भविष्य पर कितना असर होगा जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल है क्योंकि शहरी क्षेत्रों के बच्चों को तो कहीं न कहीं से सुविधा मिला जा सकती है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को हर तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
(इनपुट- जयप्रकाश)

