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Jaisalmer: कोरोना माहमारी के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली गिलोय-तुलसी की उपयोगिता के कारण अब इसको व्यापक स्तर पर घर-घर पहुचाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने आगाज कर दिया है व घर-घर में गिलोय की योजना बनाई है, जिसके चलते पिछले 10 दिनों से स्थानीय आदर्श विद्या मंदिर परिसर में गिलोय की पौध तैयार करने का कार्य जोरों पर है.

इसमें 20 स्वयंसेवकों की टोली प्रतिदिन 4 घंटे का समय लगाकर इस कार्य को कर रही है. अभी तक गिलोय के लिए जैसलमेर जिले में 15000 पौधे तैयार करने के लिए मोहनगढ़, नाचना, मोरानी में भी स्वयंसेवकों द्वारा गिलोय के पौधे तैयार किए जा रहे हैं. वहीं, जैसलमेर शहर में दस हजार गिलोय तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.

कैसे होता है गिलोय का संग्रहण?
गिलोय की पौध तैयार करने के लिए 10 स्वयंसेवकों की टोली गिलोय के स्थान का पता लगाकर वहां से इकट्ठा करने का कार्य करती हैं. वहीं, अभी तक 10 से अधिक स्थानों से इसके संग्रहण का कार्य किया जा चुका है. फिर उसे काटकर प्लास्टिक की थैलियों में डाल तैयार किया जाता है. इसको अंकुरित होने में 7 से 10 दिन का समय लगता है.

हर गांव में गिलोय पहुंचाने की है योजना
पर्यावरण गतिविधि के संयोजक डॉक्टर उमेश कुमार ने बताया कि गिलोय का हर गांव में वितरण किया जाएगा. जिले भर में 80 केंद्र बनाकर इसके वितरण की योजना है. प्रत्येक व्यक्ति दैनिक जीवन में गिलोय का उपयोग करें, इसके लिए गिलोय की आवश्यकता होने पर वहीं उपलब्ध हो जाए.

5 जून को अभियान की होगी शुरुआत
विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर इस अभियान का शुभारंभ किया जाएगा. गांवों में गिलोय के पौधे पहुंचाने की भी व्यवस्था तय की है. इसका न्यूनतम शुल्क भी तय किया जाएगा. सभी जगह इसके लिए कार्यकर्ताओं को तय भी किया है, जो कार्यकर्ता घर-घर जाकर गिलोय वितरण करेंगे. गिलोय के उपयोग की जानकारी के लिए एक पत्रक का भी वितरण साथ में किया जाएगा.

BOP पर भी गिलोय भेजी जायेगी
सीमा पर तैनात जवानों की इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने के प्रत्येक बीओपी पर भी गिलोय लगाने की योजना है. सीमाजन कल्याण समिति के नेतृत्व में बीएसएफ अधिकारियों से संपर्क करके गिलोय प्रदान की जाएगी. इसके लिए सीमाजन कार्यकर्ताओं द्वारा योजना बनाई जा रही है.

(इनपुट-शंकर दान)