News in Brief

Motihari: भारत और नेपाल के रिश्ते एतिहासिक और सांस्कृतिक आधार से जुड़े हुए हैं. दोनों देशों के बीच बेटी और रोटी का रिश्ता रहा है. इतना ही नहीं भारत हमेशा खुद को नेपाल का बड़ा भाई बताता रहा है. इस सबके बावजूद पिछले कुछ वक्त से कभी कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को नेपाली नक्शे में दिखाने तो कभी अयोध्या के नेपाल में स्थित होने, तो कभी  प्रचंड और केपी ओली के विवाद को लेकर भारत और नेपाल के रिश्तों में खटास महसूस हो रही हैं. 

हालांकि, भारत के संतुलित रवैये और कूटनीति के कारण हालात गंभीर होने से पहले थोड़े संभले जरूर है. रिश्तों के इस धागे को और मजबूत करने का काम या कहे कि सौहार्द को बनाए रखने का काम भारत-नेपाल बॉर्डर (Indo-Nepal border) पर मोतिहारी के पास तैनात एसएसबी (SSB) के जवान कर रहे हैं.

यहां ये लोग जितनी मुस्तैदी से जवान बॉर्डर पर अपनी ड्यूटी करते हैं. उतनी ही लगन और उत्साह के साथ यह गरीब और अशिक्षित बच्चों का भविष्य सुधारने का काम कर रहे हैं. भारतीय जवानों के इस नेक काम में नेपाल आर्म्ड फोर्स भी कंधे से कंधा मिलाकर काम में सहयोग कर रही है.

दरअसल भारत-नेपाल बॉर्डर के पास कोरैया गांव के पिलर संख्या 377 के नजदीक जवान शिक्षा की अलख जगाने में लगे हैं. दोनों देशों के सैनिक एक घंटे सुबह भारत के कोरैया गांव के तो एक घंटे शाम में नेपाल के चंद्रमन गांव के बच्चों को पढ़ाते हैं. वहीं, उन्हें कोविड (Covid) गाइडलाइन्स के साथ भारत और नेपाल के व्यवहारिक कानून के बारे में बताते हैं.

इससे यह नौनिहाल भविष्य में जिम्मेदार नागरिक और सच्चे देशभक्त बन सकें. साथ ही हैरत की बात यह है कि जितने बच्चे पढ़ने आते हैं. इनमें लड़कियों की संख्या ज्यादा है. एसएसबी 71 बटालियन के डिप्टी कमांडेट अंशु श्रीवास्तव के मुताबिक, ‘बॉर्डर निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूल बंद होने की वजह से बच्चों को घूमते देखा. इसके बाद उन्होंने मासूमों को पढ़ाने का निश्चिय किया और देखते-देखते उनकी एक छोटी सी सोच बड़ी हो गई. इसका नेपाल सैनिक भी हिस्सा बन गए.’