Nepal General Election 2026: नेपाल में 5 मार्च 2026 को प्रस्तावित आम चुनाव को लेकर राजनीतिक असमंजस बना हुआ है. चुनाव आयोग के अनुसार, चुनाव की 60% तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और सुरक्षा के लिए सेना की तैनाती भी शुरू हो चुकी है लेकिन चुनाव के समय पर होने को लेकर कई कानूनी और राजनैतिक विवाद उभर रहे हैं.

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिकाएं

सीपीएन-यूएमएल और नेपाली कांग्रेस के सांसदों ने संसद की बहाली की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में 17 याचिकाएं दाखिल की हैं. अदालत जनवरी के पहले सप्ताह से इस मामले में सुनवाई करने की योजना बना रही है. इस बीच, जेन-जी आंदोलन (Gen-Z Movement) ने भी अपनी शर्तों को लेकर सरकार से समझौता किया था लेकिन संगठन के भीतर आंतरिक मतभेद बने हुए हैं. आंदोलन के कई गुट चुनाव को टालने की मांग कर रहे हैं जबकि कुछ का मानना है कि चुनावी मैदान में उतरकर ही बदलाव संभव है.

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नेपाल की अंतरिम सरकार जो प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व में काम कर रही है ने चुनाव की तारीख घोषित कर दी है लेकिन सरकार और आंदोलन के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है. जेन-जी की मुख्य शर्तों में संवैधानिक संशोधन, भ्रष्टाचार जांच आयोग और चुनावी सुधार जैसे मुद्दे शामिल हैं लेकिन इन पर अभी तक किसी भी पक्ष से लिखित आश्वासन नहीं मिला है.

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इसके अलावा, नेपाली राजनीति में पुरानी पार्टियां भी सक्रिय हो गई हैं. केपी शर्मा ओली तीसरी बार सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष चुने गए हैं जबकि प्रचंड ने कई छोटी पार्टियों को मिलाकर नई नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनपीसी) बना ली है. चुनाव के निकट आते ही राजनीतिक ध्रुवीकरण और शक्ति प्रदर्शन तेज हो गया है.

इस बीच, Gen-Z के नेताओं जैसे कि बालेन शाह (काठमांडू के मेयर), रवि लामिछाने (राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी) और कुलमान घिसिंग (पूर्व बिजली प्राधिकरण प्रमुख) भी चुनावी मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, इन नेताओं के बीच किसी संयुक्त मोर्चे पर सहमति नहीं बन पाई है जिससे जेन-जी आंदोलन में नेतृत्व का संकट जारी है. चुनाव से पहले विवादित मुद्दे जैसे कि संविधान में सुधार, चुनावी प्रणाली में सुधार, भ्रष्टाचार जांच आयोग और हिंसा की जवाबदेही जैसे सवाल अब तक हल नहीं हो पाए हैं जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.