
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय

Ritual से Renewal: निर्माल्य का Sustainable Shift
नदियों-झीलों को प्रदूषण से बचाएगा प्रोजेक्ट उद्वासना, हैदराबाद नगर निगम ने निकाला हल
प्रविष्टि तिथि: 24 AUG 2026 7:26PM by PIB Delhi

3 चरण | 8 मंदिर | 194 प्रतिभागी | 1,262.59 किलोग्राम पूजित सामग्री का सम्मानजनक एवं वैज्ञानिक प्रबंधन
नई ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियमों और स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत रिस्पॉन्सिबल वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम ने “प्रोजेक्ट उद्वासना“ की शुरुआत की है। यह अभिनव पहल पूजा-अर्चना में उपयोग किए गए पवित्र एवं धार्मिक सामग्री के सम्मानजनक, वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल संग्रहण, पुनर्चक्रण और निस्तारण का मार्ग प्रशस्त कर रही है। अक्सर देवी-देवताओं के फोटो, क्षतिग्रस्त मूर्तियां, पूजा सामग्री, धार्मिक पुस्तकें, कैलेंडर, माला और फूल जैसी पवित्र वस्तुएं नदियों, झीलों, नालों या खुले स्थानों पर फेंक दी जाती हैं, जिससे जल स्रोत प्रदूषित होते हैं और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रोजेक्ट उद्वासना के माध्यम से हैदराबाद नगर निगम ने इस समस्या का ऐसा समाधान निकाला है, जिसमें आस्था भी सुरक्षित है और पर्यावरण भी।

नगर निगम ने इस पहल की शुरुआत इस्कॉन मंदिर, जुबली हिल्स से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की। जिसके अंतर्गत मंदिर परिसर में विशेष संग्रह केंद्र बनाए गए, जहां श्रद्धालुओं ने अपने घरों से पूजित धार्मिक सामग्री स्वेच्छा से जमा कराई। पहले चरण में 7 प्रतिभागियों ने 66 किलोग्राम धार्मिक सामग्री जमा कराकर इस पहल की नींव मजबूत की। पायलट स्तर की सफलता के बाद यूसुफगुड़ा में दूसरे चरण का आयोजन किया गया। इस बार लोगों की भागीदारी कई गुना बढ़ी और 443 किलोग्राम पूजित सामग्री एकत्र की गई। इससे स्पष्ट हुआ कि नागरिक जिम्मेदार धार्मिक कचरा प्रबंधन को अपनाने के लिए तैयार हैं।

तीसरे चरण में इस अभियान का विस्तार करते हुए हैदराबाद नगर निगम के सभी छह जोनों के छह प्रमुख मंदिरों में एक साथ संग्रह अभियान चलाया गया। इस चरण में 124 श्रद्धालुओं ने भाग लिया और 753.59 किलोग्राम धार्मिक सामग्री एकत्र की गई। सबसे अधिक संग्रह खैरताबाद जोन (217 किलोग्राम) में हुआ, जबकि सिकंदराबाद (187.10 किलोग्राम) और चारमीनार (169.40 किलोग्राम) ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया। संग्रहित सामग्री का वैज्ञानिक तरीके से पृथक्करण (Segregation), दस्तावेजीकरण (Documentation) और पुनर्चक्रण (Recycling) सुनिश्चित किया गया। इसके लिए सामग्री को अधिकृत एजेंसी Waste Ventures Ltd. को भेजा जाने लगा, जहां परियोजना के निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उसका पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण और पुनर्चक्रण किया गया।

यह पहल केवल धार्मिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन (Scientific Waste Management) तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों में जिम्मेदार व्यवहार, स्रोत पर कचरा पृथक्करण और सतत अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही है। अब GHMC इस पहल को नियमित रूप से प्रमुख मंदिरों में आयोजित करने, जन-जागरूकता अभियान चलाने, मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) विकसित करने तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों और पुनर्चक्रण एजेंसियों के सहयोग से इसे संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में कार्य कर रहा है।
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SK
(रिलीज़ आईडी: 2302866) आगंतुक पटल : 13

