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Jaipur : सूर्य पुत्र शनिदेव का जन्म शास्त्रों के अनुसार प्रति वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है. शनि जयंती (Shani Jayanti) को शनिश्चर अमावस्या के नाम से भी जानते हैं. धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन न्याय के देवता शनि देव का जन्म हुआ था. शनि जयंती इस बार  गुरुवार 10 जून को मनाई जा रही है. अमावस्या पर पूर्णा तिथि गुरुवार होने से सिद्धा तिथि रहेगी शनि जयंती (Shani Jayanti 2021) इस बार गुरुवार को होने बहुत लाभकारी हो गई है.

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शनिश्चर जयंती पर ग्रहों की चाल
पं. निलेश शास्त्री ने बताया कि शनिश्चर जयंती के दिन शनि ग्रह स्वग्रही मकर राशि में वक्री अवस्था में है शनि ग्रह की तीन दृष्टि होती हैं. 3 ,7 ,10 वर्तमान में तीसरी दृष्टि मीन राशि में और सप्तम दृष्टि कर्क राशि पर है. कर्क राशि में मंगल ग्रह नीच अवस्था में गोचर कर रहे हैं. मंगल ग्रह की सप्तम दृष्टि शनि ग्रह पर मकर राशि पर है. शनि देव की दशम दृष्टि तुला राशि पर है वही मंगल ग्रह की चतुर्थ दृष्टि भी तुला राशि पर है.

वृषभ राशि में चार ग्रहों की युति रहेगी अर्थात सूर्य चंद्र राहु बुध ग्रह गोचर करेंगे. सूर्य राहु की युति से सूर्य ग्रहण का योग बनता है परंतु यह सूर्य ग्रहण का योग भारत में अदृश्य रहेगा. वृश्चिक राशि में केतु, कुंभ राशि में देवगुरु बृहस्पति, मिथुन राशि में  शुक्र ग्रह गोचर कर रहे हैं तो वहीं शनि की साढ़े साती धनु मकर कुंभ राशि पर चल रही है.

शनि ग्रह के उपाय
पंडित निलेश शास्त्री के अनुसार शनि ग्रह को प्रसन्न करने के लिए ज्योतिषी उपाय करें, जिन जातकों की जन्म कुंडली में शनि की दशा महादशा अंतर्दशा और साढ़े साती ढैया चल रही है उनको यह उपाय करना चाहिए .

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी के सिंदूर का चोला चढ़ाएं.
पशु पक्षियों तथा गरीबों को अन्न जल की सेवा करें.
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ नित्य पाठ करें.
पीपल वृक्ष के नीचे मीठे तेल का दीपक जलाएं.
उड़द दाल तेल लोहे काले वस्त्र काले तिल का दान करें तुला दान करे.
ज्योतिषी की सलाह लेकर नीलम या लोहे का छल्ला धारण कर सकते हैं.

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