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Sheikhpura: शेखपुरा के कृषि कार्यालय में कस्टम हार्डिंग योजना में लाखों रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है. जिला कृषि अधिकारी ने मामले पर संज्ञान लेते हुए जिले के डीएम के साथ विभाग को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

दरअसल, किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से बिहार सरकार और कृषि विभाग की ओर से आधुनिक कृषि यंत्र के माध्यम से किसानों को लाभ देने के लिए कृषि विभाग ने कस्टम हार्डिंग योजना की शुरुआत की, ताकि योजना के माध्यम से किसान समूह को अनुदान दर पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराया जा सके. लेकिन कृषि अधिकारी ने इस योजना में अनुदान की राशि में ही हेराफेरी कर ली गई.

पूरा घोटाला वर्ष 2018 से 2020 तक का है
मामले का खुलासा तब हुआ जब पूर्व जिला कृषि पदाधिकारी लाल बचन राम के तबादले के बाद वर्तमान जिला कृषि अधिकारी को योजना का प्रभार नहीं दिया गया. पूरा घोटाला वर्ष 2018 से 2020 तक का है.

कस्टम हायरिंग योजना के तहत किसान समूह को अनुदान पर कृषि यंत्र दिया जाना था, जो 2 साल में शेखपुरा शेखोपुसराय और चेवाड़ा के किसान समूह को अनुदान दर पर कृषि यंत्र भी दिया गया. लेकिन किसानों को आज तक अनुदान की राशि नहीं मिल सकी.

अधिकारियों ने फायदे के लिए किसानों का 8 बैंक में खुलवाया खाता
इस योजना में किसान समूह को दो बैंक खाता के माध्यम से अनुदान दर की राशि देनी थी लेकिन अधिकारी की ओर से अपने फायदे के लिए 8 बैंक खाता खोल दिया गया और किसानों के अनुदान की राशि इसी खाते में दिया जाने लगा.

हालांकि, इस मामले में जिला कृषि अधिकारी शिवदत्त कुमार सिन्हा ने का कहना है कि कृषि यंत्र अनुदान में घोटाला को लेकर डीएम और कृषि विभाग को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की गई है. 

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योजना के नाम पर कितनी राशि की हेराफेरी की गई?
कितनी राशि का घोटाला किया गया, इस सवाल पर कृषि अधिकारी ने कहा कि जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि योजना के नाम पर कितनी राशि की हेराफेरी की गई.

वहीं, कृषि विभाग में हुए घोटाले को लेकर LJP जिलाध्यक्ष ने इसे करोड़ो रुपये का घोटाला बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता ने भी कृषि विभाग में बड़े पैमाने पर हुए घोटाले की न्यायिक जांच की मांग कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है.

(इनपुट-अनुज आनंद)