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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए 31 मई तक कोरोना कर्फ्यू लगाया गया है. इससे फायदा भी देखने को मिला है, क्योंकि डेली एक्टिव केस, जो दूसरी लहर की शुरुआत में 30 हजार तक पहुंच गए थे वह घट कर अब 3000 के अंदर हो गए हैं. ऐसे में ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट का मॉडल भी कारगर साबित हुआ. लेकिन सवाल ये है कि अब जब प्रदेश में कोरोना काबू में आ गया है, तो क्या कर्फ्यू बढ़ाया जाएगा या इसमें कुछ छूट मिले सकती है. इस मुद्दे पर आज सीएम योगी फैसला ले सकते हैं. हालांकि, सूत्रों के हवाले से ये बात सामने आ रही है कि संक्रमण के तेजी से घटने के बाद अब कुछ शर्तों के साथ प्रदेशवासियों को बंदी में छूट दी जा सकती है.

UP में 3.30 लाख से ज्यादा कोरोना टेस्टिंग में 2287 नए केस मिले, रिकवरी रेट 96.10% पहुंचा

कुल संक्रमितों की संख्या करीब 46 हजार
गौरतलब है कि यूपी में कोरोना की गति धीमी पड़ रही है. एक महीने पहले ही जहां राज्य में 3 लाख से ज्यादा मरीज थे, वहीं अब संक्रमितों की संख्या 50 हजार से कम हो गई है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में सक्रिय केस 46,201 हैं. वहीं 2287 नए केस सामने आए हैं. एक महीना पहले ही रोजाना आने वाले केसों की संख्या 30 हजार से ज्यादा थी. इसी प्रकार से रिकवरी रेट भी तेजी से बढ़कर 96% के पार चला गया है. पॉजिटिविटी रेट भी गिरकर 0.7% हो गया है. 

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ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना जांच में भी लाई गई तेजी
इस बीच अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने जानकारी दी थी कि प्रदेश में लगातार कोरोना जांचों की संख्या बढ़ाई जा रही है. अब हर दिन जांच के लिए भेजे जाने वाले सैंपल में से 75% ग्रामीण इलाकों के हैं.  

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कोरोना से सतर्कता बेहद जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर से लड़ते हुए आज उस स्थिति में हैं, जहां सजगता, सतर्कता, सावधानी बहुत आवश्यक है. उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपने-अपने गांवों की निगरानी समितियों के जरिए कोरोना संबंधी कार्य बढ़ाने के लिए कहा. उन्होंने बताया कि निगरानी समितियों ने स्क्रीनिंग, जरूरत के अनुसार मेडिकल किट, टेस्ट कराए, क्वारन्टीन किया. निगरानी समितियों के पास इन्फ्रारेड थर्मामीटर है, सैनीटाइज़र है. प्रधानों की देखरेख में यह काम तेजी से आगे बढ़ेगा.

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