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रीवाः कोरोना महामारी के इस दौर में संक्रमण फैलने से ज्यादा खतरा गलत जानकारी और निगेटिविटी फैलने का है. इस संकट काल में कई लोग ऐसे भी हैं, जो अपने काम और जज्बे से लोगों में सकारात्मकता फैला रहे हैं. ऐसा ही कुछ रीवा जिले में भी देखने को मिला, जहां मउगंज थाना प्रभारी और उनकी बेटी संक्रमित होने के बावजूद गाना गाकर कोविड वॉरियर्स का हौसला बढ़ाते नजर आए.

परिवार के सदस्य भी हो गए संक्रमित
हम बात कर रहे हैं जिले के मउगंज थाने में पदस्थ विद्या वरिधि तिवारी व उनकी बेटी वैदेही की. जी मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि ड्यूटी के दौरान उनमें संक्रमण की पुष्टि हुई, परिवार की जांच कराई तो बेटी व बेटा भी पॉजिटिव पाए गए.

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इलाज के दौरान याद आई पॉजिटिविटी की सीख
थाना प्रभारी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान ड्यूटी करते हुए वो लोगों को गाइडलाइंस का पालन करवाते हुए उनमें जागरूकता फैला रहे थे. अब वो खुद संक्रमित हो गए, इलाज के दौरान उन्होंने देखा डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्यकर्मी पूरी मेहनत से काम कर रहे हैं. ऐसे में उन्होंने अपनी बेटी के साथ सकारात्मकता फैलाने के बारे में सोचा. अब वे दोनों ही संक्रमित होने के बावजूद गाना गाकर कोविड वॉरियर्स की हौसला अफजाई कर रहे हैं.

पिता व बेटी दोनों को संगीत पसंद
टीआई ने बताया कि वो और उनकी बेटी दोनों को म्यूजिक पसंद हैं, इसीलिए वे संगीत के जरिए पॉजिटिविटी फैला रहे हैं. उन्होंने बताया कि बीमारी के दौरान व्यक्ति के शरीर पर मनोवैज्ञानिक असर ज्यादा होता है, जब वे ड्यूटी करते थे तो लोगों को पॉजिटिव रहने का संदेश देते थे. आज वे खुद जब इस मनोदशा से गुजरे तो उन्हें लगा म्युजिक के माध्यम से सकारात्मकता फैलाई जा सकती है.

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इंटरनेट पर Video Viral
पिता-बेटी का एक Video इंटरनेट पर भी वायरल हो रहा है, जिसमें पिता के हाथ में हारमोनियम तो बेटी गिटार संभाले हुए हैं. बताया गया कि ड्यूटी के दौरान हमेशा सख्त रहने वाले टीआई ने अपने गीत के बोल के माध्यम से सभी का दिल छू लिया. वायरल वीडियो में वे ‘संसार है एक नदिया, सुख दुख दो किनारे हैं’ नामक भजन गाते नजर आए.

टीआई ने दिया सकारात्मकता फैलाने का संदेश
थाने की बागडोर बखूबी निभाने वाले टीआई के काम की लॉकडाउन के दौरान प्रशंसा हो रही थी. संक्रमित होने के बाद वे थाने से दूर हो गए, लेकिन इलाज के दौरान अब वो होम आइसोलेशन में सकारात्मकता फैला रहे हैं. उनका कहना है कि इस बीमारी को हम पॉजिटिव अप्रोच से ही हरा पाएंगे. डॉक्टरों का भी यही मानना है कि इस बीमारी में इलाज तो मायने रखता ही मरीजों की पॉजिटिव सोच का भी उतना ही असर होता है.

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