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अलीगढ़: अलीगढ़ जहरीली शराब कांड में अलग-अलग मौत के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं. जिला प्रशासन ने 25 मौतों की बात कही है. वहीं 26 संदिग्ध लोग बताएं, जिनका विसरा जांच के लिए आगरा भेजा गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही उनकी मौत का कारण सामने आएगा. हालांकि, पोस्टमार्टम हाउस अलग हकीकत ही बयां कर रहा है. रविवार को झट्टरी कस्बा के गांव की करीब 6 से 7 बॉडीज रविवार पोस्टमार्टम ऑफिस पहुंची. परिजनों ने बताया कि इन की मौत जहरीली शराब पीने से हुई है. 

आसपास के गांवों में फैली दहशत 
शराबकांड में हुई मौतों के बाद से जिले के कई गांवों में दहशत का माहौल है. गौरतलब है कि सीएम योगी ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिये हैं. जिसके बाद आबकारी विभाग एक्शन मोड में है. साथ ही कई आबकारी विभाग के अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है. शराब कांड से करसुआ गांव सबसे प्रभावित गांव है, यहां 10 लोगों के मौत की पुष्टि और 10-12 का इलाज चल रहा जो गंभीर भी हैं. गांव वाले आक्रोशित हैं उनका कहना है कि ठेके को यहां से हटाया जाए.

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बीजेपी सांसद ने मौत के आंकड़े को लेकर उठाए सवाल
भाजपा सांसद सतीश गौतम ने शराब से मौत की घटना के लिए जिलाधिकारी को जिम्मेदार बताया है. सांसद ने दावा किया है कि कल तक 35 मौतें हो चुकी हैं. गांव-गांव जाकर शराब से हुई मौतों की गिनती हुई है. जिला प्रशासन मामले को छुपाने में जुटा है. वह इसकी रिपोर्ट शासन को भेजेंगे. आने वाले 2 -3 दिन में   जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है. 

अब तक 51 लोगों का पोस्टमार्टम हुआ- CMO
वहीं शराब से मौत के मामले में सीएमओ ने भी बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अब तक 51 लोगों का पोस्टमार्टम हुआ है. जिसमें 25 लोगों की मौत सजेस्टिव है शराब से हुई है. वहीं 26 लोगों की मौत को सीएमओ ने संदिग्ध माना है. उन्होंने कहा कि 26 लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद विसरा रिपोर्ट लैब भेजी गई है. रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण पता चल पायेगा. 

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करसुआ के लोगों ने लगाए आरोप
गांव के बुज़ुर्ग ने बताया कि पेटियों में अक्सर मिलावट शिकायत मिलती है. लेकिन ठेके वालों की सेटिंग है, उन्हें पहले पता चल जाता है तो वो पेटियां खेतों में छुपा देते हैं. शराब खराब होने की शिकायत करो तो बताते हैं कि ऊपर से ही ऐसी आ रही है लेना है तो लो. मनमाने ढंग से शराब बेची जा रही थी. बुजुर्ग ने बताया कि उनका खेत इसी ठेके के सामने है, ऐसे में उनको इस सारी बातें अक्सर सुनाई देती थीं. 

ग्राम प्रधान रितेश उपाध्याय ने बताया कि ग्राम करसुआ में 10 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं करीब 7 लोगों का इलाज चल रहा है. जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है. उन्होंने जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि 3 दिन बीत गए लेकिन अभी तक कोई भी अधिकारी गांव में झांकने तक नहीं आया है. आबकारी आयुक्त आए थे और उन्होंने घरवालों के बयान लिए हैं. उन्होंने पूर्व में पत्र भी लिखा है. ताकि इस ठेके को हटाया जा सके.

शराब में मिलावट का लगाया आरोप
गुस्साए गांव वालों ने कहा कि मिलावट होती थी. जब शराब खरीदते थे तो बोतल की सील पहले से ही खुली होती थी. गांव के कपिल कुमार ने कई संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि जब अपने पिता को लेकर पहुंचे तो उन्हें किसी भी तरीके की कोई मदद नहीं दी गई और उनके पिता ने दम तोड़ दिया. न मिलावट होती न जान जाती. उन्होंने बताया कि लोधा थाना में कई बार शिकायत की गई लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. 3 से 4 साल पहले ठेका खोला गया था उसी दौरान शिकायत कर दी गई लेकिन आज तक ठेका नहीं हटाया गया.

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ग्रामीणों के आक्रोश के बाद सील किया गया शराब ठेका
शराब कांड के बाद ग्रामीणों ने आक्रोश जताया. जिसके चलते पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने देसी शराब के ठेके को सील कर दिया है. ग्रामीण गुस्से में हैं, पुलिस मामले की जांच कर रही है.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल मामला अलीगढ़ जिले के लोधा क्षेत्र के करसुआ ,निमाना, हैबतपुर अंडला गांव का है. जिसमें करसुआ में ही 7 लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हुई थी. जो आंकड़ा बाद में बढ़ता गया. जिला प्रशासन ने 25 मौतों की बात कही है. वहीं 26 संदिग्ध लोग बताएं, जिनका बिसरा जांच के लिए आगरा भेजा गया है. आरोप है कि सभी ने गांव के ठेके से ही शराब खरीद कर पी थी. मृतकों में करसुआ एचपी गैस प्लांट के 2 ड्राइवर भी शामिल हैं. 

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