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Nagaur: पूर्व सार्वजनिक निर्माण मंत्री यूनुस खान एक बार फिर डीडवाना क्षेत्र में सक्रिय होते नजर आ रहे हैं. कोरोना काल मे सेवा के बहाने ही सही पूरे राजस्थान में सक्रिय हुए वसुंधरा राजे गुट के नेता अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में ‘वसुंधरा जन रसोई’ के नाम से जरूरतमंद लोगों तक भोजन पहुंचा रहे हैं. 

नदारद रहे BJP नेता
पूर्व डीडवाना विधायक और पूर्व की बीजेपी सरकार में सार्वजनिक निर्माण और परिवहन मंत्रालय के मंत्री रहे यूनुस खान ने एक बार फिर से क्षेत्र में सक्रियता दिखाई है. इसे लेकर डीडवाना की सियासत में गर्माहट देखी जा रही है. वसुंधरा जन रसोई के बहाने सक्रिय हुए खान यहां एक्टिव तो हो गए हैं लेकिन इसके साथ ही पार्टी की धड़ेबाजी भी जमीन पर भी नजर आने लगी है. वसुंधरा जन रसोई के पैकेट बांटने में फोटो खिंचवाने के लिए जुटी भीड़ में यूनुस खान के कार्यकर्ता तो नजर आए लेकिन मूल बीजेपी के नेता इसमें नदारद रहे जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है. 

विधानसभा चुनाव में मिली थी हार
दरअसल, बीते विधानसभा चुनाव में लाख कोशिशों के बावजूद सरकार में दमदार भूमिका में रहे मंत्री को डीडवाना से टिकट नहीं देकर सचिन पायलट के सामने टोंक से चुनाव लड़ाया गया, जहां उन्हें बड़ी हार का सामना करना पड़ा. इसकी वजह खान ने फिर कभी टोंक का रुख ही नहीं किया और अब एक बार फिर से अपने पुराने क्षेत्र में ही सक्रिय हो गए हैं. 

पूर्व मंत्री के लिए राह नहीं आसान!
हालांकि, मंत्री खान कि राह अब यहां भी आसान नहीं है. बीते विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी संगठन में यहां आमूलचूल परिवर्तन भी हुआ और भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले जितेंद्र जोधा सहित पार्टी के मूल कार्यकर्ता पहले से ही यहां सक्रिय हैं. भाजपा द्वारा प्रदेश भर में चलाए जा रहे सेवा ही संगठन कार्यक्रम के तहत पहले ही कार्यकर्ता जरूरतमंद लोगों तक खाने के पैकेट पहुंचा रहे हैं.

पोस्टर से सिर्फ वसुंधरा-युनूस खान की तस्वीर
यहां गौर करने वाली बात यह है कि पूर्व मंत्री के स्थानीय निवास से तीन दिन पूर्व जन सेवा रसोई के नाम से शुरू की गई योजना का नाम आज बदला-बदला नजर आया. इस टिपर पर ‘जन सेवा रसोई’ का बोर्ड लगा हुआ था, आज उसी टिपर पर ‘सेवा ही संगठन’ का बोर्ड नजर आया. लेकिन यहां प्रदेश भाजपा के किसी नेता की तस्वीर की बजाय केवल पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) और खुद यूनुस खान की ही तस्वीर लगी हुई है.

बहरहाल अभी विधानसभा चुनावों में दो साल का समय बाकी है. लेकिन स्थानीय भाजपा की गुटबाजी अभी से हावी हो गई है, जो आने वाले दिनों में बढ़ने की ही संभावना है.

(इनपुट-हनुमान तंवर)