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Alwar: अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को पत्र लिखकर राजकीय राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सुनील चौहान पर लापरवाही का आरोप लगाया है. साथ ही, उन्हें हटाने की मांग की है.

उन्होंने इस पत्र में कोरोना से संक्रमित मरीजों की मौत का जिम्मेदार भी माना है और आरोप लगाया है कि संसाधन होने के बावजूद भी प्रमुख चिकित्सा अधिकारी ने सभी संसाधनों को स्टोर में बंद कर रखा है. साथ ही, उनका समय पर उपयोग नहीं हुआ है.

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संगठन जिला अध्यक्ष पंकज शर्मा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि वर्तमान में कोरोना महामारी की दूसरी लहर में पैदा हुई असामान्य परिस्थितियों के दौरान अलवर जिले में प्रतिदिन 500 से भी अधिक मरीज पॉजीटिव आ रहे हैं. 

उन्होंने कहा कि अलवर जिले के सबसे बड़े अस्पताल राजकीय राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय में बीते वर्ष मार्च 2020 से अब तक विधायक,  सांसदगणों, पीएम केयर्स फंड, भामाशाहों एवं दानदात्ताओं द्वारा करोड़ों रुपए की राशि व्यय कर अनेकों जीवन रक्षक उपकरण आम जनता की प्राणों की रक्षा हेतु स्वीकृत किए गए है. लेकिन लगातार ऐसे समाचार प्राप्त हो रहे है कि सामान्य चिकित्सालय अलवर में अब भी दर्जनों महत्व॑पूर्ण जीवन रक्षक उपकरणों को लंबे समय से स्थापित नहीं किया गया हैं एवं ऐसे उपकरण चिकित्सालय के स्टोर में अनुपयोगी रखे हुए हैं, जिससे की आम जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.

जिले में अब तक सैंकड़ों लोग महामारी के दौरान जान गवां चुके हैं. एक वर्ष के दौरान इन परिरिथतियों में ऐसे जीवन रक्षक उपकरणों को स्थापित कर क्रियाशील नहीं कराया जाना स्पष्ट रूप से पीएमओ अलवर कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह पैदा करता है.

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इतने उपकरणों की स्वीकृति जारी होने के उपरांत भी अस्पताल में उपकरणों की स्थापना कर आम जनता को सुविधाएं मुहैया नहीं कराने से न केवल राज्य सरकार की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. बल्कि मरीजों के जीवन पर भी संकट आता है. इसके साथ ही उपकरण क्रियाशील नहीं होने की स्थित्ति में मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है. यहां उन्हे उपचार में अत्यधिक राशि व्यय करनी पड़ती है.

इतना हीं नहीं, सामान्य चिकित्सालय के ऑक्सीजन प्लांट से निर्मित ऑक्सीजन भी निर्धारित मानकों से कम शुद्ध होने की जानकारी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई है, जो कि मरीजों के जीवन से खिलवाड़ की श्रेणी में आता है. इस प्रकार की अव्यवस्था होने के कारण अस्पताल कार्यरत विभागीय कर्मचारियों के समक्ष भी आए दिन अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो जाती है.

पत्र में कहा गया है कि चिकित्सा अधिकारी के स्थान पर किसी अन्य वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी को पीएमओ लगाने का श्रम कराएं ताकि आमजन को राहत मिल सके. इससे पहले  पिछले दिनों अलवर जिला कलेक्टर नन्नू मल पहाड़िया ने स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर अलवर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ ओमप्रकाश मीणा पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए उन्हें अलवर से हटाने की मांग की थी.

(इनपुट-जुगल किशोर गांधी)