
कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय

डिजिटलीकरण और कौशल विकास को बढ़ावा देना
प्रविष्टि तिथि: 16 MAR 2026 3:27PM by PIB Delhi
भारत सरकार के कौशल भारत मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत कौशल विकास केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) की शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) द्वारा समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशलीकरण और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। कौशल भारत मिशन का उद्देश्य भारत के युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है। सरकार युवाओं के बीच डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने और कौशल विकास को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पिछले तीन वर्षों और वर्तमान वर्ष (दिसंबर 2025 तक) के दौरान एमएसडीई की विभिन्न योजनाओं के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवारों का ब्यौरा निम्नलिखित है:
वित्त वर्ष | पीएमकेवीवाई | जेएसएस | एनएपीएस | सीटीएस |
2022-23 | 2,11,170 | 7,26,284 | 7,38,490 | 12,51,181 |
2023-24 | 5,39,962 | 5,07,337 | 9,32,322 | 14,45,362 |
2024-25 | 20,38,319 | 5,00,490 | 9,85,031 | 13,15,133 |
2025-26 | 1,31,703 | 2,75,663 | 9,23,955 | 14,70,277 |
उद्योग की मांग को पूरा करने, डिजिटल परिवर्तन को गति देने और उद्योग 4.0 तथा भविष्य की कौशल आवश्यकताओं के लिए कार्यबल को तैयार करने के उद्देश्य से, पीएमकेवीवाई 3.0 और 4.0 जैसी पहलों के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, ड्रोन और अन्य जैसी नई तकनीकों पर केंद्रित विशेष अल्पकालिक और उन्नत मॉड्यूल शुरू किए गए हैं। पीएमकेवीवाई के तहत डिजिटल कौशल प्रशिक्षण प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों (पीएमकेके), औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई), कौशल केंद्रों और सिद्ध से जुड़े अन्य प्रशिक्षण केंद्रों जैसे प्रशिक्षण अवसंरचनाओं के नेटवर्क के माध्यम से प्रदान किया जाता है। डिजिटल और उभरती प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम इन अनुमोदित केंद्रों के माध्यम से योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार और राष्ट्रीय कौशल अर्हता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप पेश किए जाते हैं।
इसके अलावा, सरकार ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सक्षम करके, डिजिटल प्रयोगशालाओं की स्थापना करके और सिद्ध जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षण संसाधनों तक पहुंच प्रदान करके डिजिटल कौशल प्रदान करने हेतु सरकारी आईटीआई, स्कूलों, कॉलेजों और कौशल केंद्रों जैसे मौजूदा बुनियादी ढांचे के उपयोग को मजबूत करने के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ मिलकर काम कर रही है। जिला कौशल समितियां जिला कौशल विकास योजनाएं तैयार करती हैं जो डिजिटल बुनियादी ढांचे में कमियों की पहचान करती हैं और आकांक्षी, पहाड़ी और सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त केंद्रों और उपकरण सहायता के लिए स्थानों को प्राथमिकता देती हैं।
प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप 169 पाठ्यक्रम विकसित किए हैं, जिनमें आईटी और आईटीईएस क्षेत्र के 19 पाठ्यक्रम शामिल हैं, जिनका उद्देश्य देश भर के युवाओं को डिजिटल प्रौद्योगिकी कौशल से सुसज्जित करना है।
सीटीएस के तहत, देश के युवाओं के कौशलीकरण और कौशलोन्नयन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स, एआई और ड्रोन आदि जैसे 31 नए जमाने के पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से दिया जाता है।
कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत कौशल विकास पहलों के लिए डीजीटी ने आईबीएम इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट, सिस्को, एडोब इंडिया, अमेज़न वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस), फ्यूचर राइट स्किल्स नेटवर्क (एफआरएसएन), एडुनेट फाउंडेशन, ऑटो डेस्क आदि संस्थाओं के साथ सहयोग किया है। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।
स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) मंत्रालय की एक प्रमुख डिजिटल पहल है जो कौशल विकास, मूल्यांकन, प्रमाणन, शिक्षुता और रोजगार संबंधी सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाती है। सिद्ध के उद्देश्यों में एक संपूर्ण डिजिटल कौशल विकास प्रणाली का निर्माण, कौशल विकास कार्यक्रमों की पारदर्शिता और दक्षता में सुधार, कौशल विकास परिणामों को रोजगार और शिक्षुता के अवसरों से जोड़ना और डेटा-आधारित योजना एवं निगरानी को सक्षम बनाना शामिल है। सिद्ध की प्रमुख विशेषताओं में हितधारकों का डिजिटल ऑनबोर्डिंग, आधार-आधारित प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर के माध्यम से डिजिटल रूप से सत्यापित प्रमाणपत्रों का जारी करना और यूआईडीएआई, पीएफएमएस, ई-श्रम और राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल जैसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण शामिल हैं।
देश में स्थापित कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या, राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र-वार, दिनांक 31.12.2025 तक अनुबंध में दी गई है।
अनुबंध
दिनांक 16.03.2026 को उत्तरार्थ ‘डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना और कौशल विकास को बढ़ाना‘ विषय पर लोकसभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 3811 के भाग (क) से (ख) के उत्तर में उल्लिखित अनुबंध
कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों की संख्या
(दिनांक 31.12.2025 तक)
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र | पीएमकेवीवाई 4.0 (एसटीटी+एसपी) केन्द्र | जेएसएस केन्द्र | एनएपीएस प्रतिष्ठान | सीटीएस/आईटीआई |
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह | 5 | 1 | 25 | 4 |
आंध्र प्रदेश | 371 | 6 | 1,216 | 521 |
अरुणाचल प्रदेश | 82 | – | 30 | 10 |
असम | 798 | 6 | 942 | 47 |
बिहार | 537 | 21 | 720 | 1356 |
चंडीगढ़ | 10 | 1 | 176 | 3 |
छत्तीसगढ | 177 | 14 | 319 | 227 |
दिल्ली | 144 | 3 | 1,846 | 46 |
गोवा | 6 | 1 | 513 | 13 |
गुजरात | 266 | 9 | 10,399 | 493 |
हरियाणा | 530 | 2 | 5,970 | 380 |
हिमाचल प्रदेश | 180 | 11 | 778 | 268 |
जम्मू और कश्मीर | 543 | 2 | 618 | 56 |
झारखंड | 206 | 13 | 474 | 354 |
कर्नाटक | 398 | 12 | 2,806 | 1468 |
केरल | 132 | 9 | 1,972 | 442 |
लद्दाख | 11 | 2 | 16 | 3 |
लक्षद्वीप | 1 | 1 | 2 | 1 |
मध्य प्रदेश | 1,351 | 29 | 1,214 | 953 |
महाराष्ट्र | 571 | 21 | 9,652 | 1046 |
मणिपुर | 163 | 4 | 31 | 11 |
मेघालय | 93 | 1 | 45 | 8 |
मिजोरम | 106 | 1 | 23 | 3 |
नागालैंड | 85 | 2 | 24 | 9 |
ओडिशा | 241 | 29 | 755 | 500 |
पुदुचेरी | 22 | – | 262 | 15 |
पंजाब | 572 | 2 | 1,071 | 329 |
राजस्थान | 1,454 | 9 | 1,088 | 1543 |
सिक्किम | 37 | – | 82 | 4 |
तमिलनाडु | 490 | 9 | 3,138 | 457 |
तेलंगाना | 119 | 6 | 1,406 | 301 |
डीएनएच और डीडी | 9 | 2 | 139 | 4 |
त्रिपुरा | 117 | 2 | 83 | 22 |
उत्तर प्रदेश | 2,581 | 47 | 7,196 | 3304 |
उत्तराखंड | 196 | 8 | 835 | 170 |
पश्चिम बंगाल | 252 | 8 | 1,407 | 317 |
कुल | 12,856 | 294 | 57,273 | 14,688 |
यह जानकारी कौशल विकास और उद्यमशीलता (एमएसडीई) राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयन्त चौधरी द्वारा आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी गई।
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