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कर्ण मिश्रा/जबलपुर: आपने हमेशा मछलियों को पानी मे तैरते हुए देखा होगा, लेकिन क्या आपने उन्हें सड़क पर तैरते हुए देखा है? एक नहीं दो नहीं बल्कि हजारों की संख्या में. जिसने भी इस वाक्ये को देखा, आंखे मलता रह गया. कुछ वीडियो बनाने में लग गए, तो कुछ मछलियों को लूटने में जुट गए. 

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दरअसल जबलपुर-कटनी हाईवे पर बहदन रेलवे ओवरब्रिज के पास सुबह सुबह कटनी की तरफ जा रहा तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर हाइवे पर पलट गया. हादसा इतना भीषण था की ट्रक के चारों टायर हवा में आ गए. हादसे की वजह से कंटेनर सड़क पर जा गिरा, जिसमें भरी मछलियां सड़क पर तैरने लगीं, सड़क पर मछलियों के तैरने की घटना की खबर मिलते ही देखते ही देखते वहां आसपास के तमाम गांव के लोगो की भीड़ जमा हो गई. राह चलते लोग भी सड़क पर तैरती हुई मछलियों को देखने अपने-अपने वाहन खड़े कर वहां रुक गए.

आंध्रप्रदेश से आ रहा था ट्रक
सूचना मिलते ही भेड़ाघाट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मोर्चा संभाला, पुलिस ने तस्दीक में पाया कि ट्रक आंध्रप्रदेश से रीवा जा रहा था. वही हादसे को अंजाम देकर ट्रक चालक भी मौके से भाग गया था, गनीमत रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ. हालांकि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ इसका पता लगाया जा रहा है. इसके साथ ही पुलिस ने पाया की मौके पर पाई गई जिन मछलियों का परिवहन किया जा रहा था, वह देश मे प्रतिबंधित की गई मांगुर मछली थी. 

मछलियों को बचाने में जुटे रहे पुलिस
हादसे के बाद मछलियों को लूटने और सड़क पर तेज रफ्तार भाग रहे वाहनों के पहियों से मछलियों को कुचलने से बचाने की पुलिस कवायद करती रही. कई बार पुलिस को मछलियां लूट रहे लोगों को बलपूर्वक खदेड़ना पड़ा. इसके साथ ही पुलिस ने फिशरीज विभाग के अधिकारियों को इसकी सूचना दी. 

जमीन में दबा कर नष्ट किया
पुलिस ने बताया मछलियों को ड्रम में भरकर मां नर्मदा में बहाने की तैयारी की जा रही थी. जिसके बाद कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि यह प्रतिबंधित थाई मांगुर मछलियां नर्मदा के अन्य तमाम जलीय जीवों के लिए घातक हो सकती हैं, इसलिए इन्हें वहां न बहाया जाए. तब कही जाकर निर्णय में बदलाव किया गया. अंत मे फिशरीज विभाग ने सभी जब्त की गई प्रतिबंधित मांगुर मछलियों को नियमानुसार जमीन में दवा कर नष्ट किया. 

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क्यों हुई मांगुर मछली प्रतिबंधित?
थाई मांगुर मछली को साल 2000 में भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था, क्योंकि यह मछली पानी के अंदर पाये जाने वाले लाभदायक शैवालो तथा लाभदायक प्रजातियों की छोटी मछलियों को खा जाती थी. थाई मांगुर मछली मांसाहारी मछली है और यह मांस को बड़े चाव से खाती है. जिसकी वजह से सड़े हुए मांस खाने से मछलियों के शरीर की वृद्धि एवं विकास बहुत तेजी से होता है. यह मछलियां तीन माह में दो से 10 किलोग्राम वजन की हो जाती हैं. इन मछलियों के अंदर घातक हेवी मेटल्स जिसमें आरसेनिक, कैडमियम, क्रोमियम, मरकरी, लेड अधिक पाया जाता है. जो स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक हानिकारक है. इसलिए भारत सरकार द्वारा इस मछली को खाने,इसके पालन ओर परिवहन को अवैध घोषित किया गया है.

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